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Water Research: पानी में मौजूद नैनोप्लास्टिक कैसे बढ़ा रहे ‘सुपरबग’ का खतरा, वॉटर फिल्टर भी फेल!

Superbugs : वाटर रिसर्च जर्नल के चौंकाने वाले खुलासे के मुताबिक, पीने के पानी में मौजूद नैनोप्लास्टिक कण हानिकारक बैक्टीरिया को अभेद्य सुरक्षा कवच देकर 'सुपरबग' बना रहे हैं, जिन पर वॉटर प्यूरीफायर और क्लोरीन भी बेअसर हैं।
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भारत

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MI Zahir

Jul 18, 2026

Drinking Water News, Water Pollution News,

पाइपलाइन से आ रहे पानी में बैक्टीरिया और नैनोप्लास्टिक के कारण यह पानी प्रदूषित हो कर हमारे घरों में पहुंच रहा है। विजुअल: ChatGPT व पत्रिका)

Nanoplastics In Drinking Water: हमारे घरों तक आ रही पानी की पाइप लाइन की दीवार पर चिपके हुए मजबूत होते जिददी और खतरनाक बैक्टीरिया पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। इससे अनजान हम लोग वही पानी पी रहे हैं, यहां तक कि उस पानी में घुले नैनो प्लास्टिक के कण वॉटर प्यूरीफायर से भी नहीं निकल पा रहे हैं। ये हालात हमारे लिए जलजनित बीमारियों का कारण बन रहे हैं। 'वाटर रिसर्च' (Water Research) जर्नल में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययन से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

हमारे पीने के पानी में घुल कर खतरा बना प्लास्टिक : रिसर्च

रिसर्च के अनुसार अब तक हम जानते थे कि प्लास्टिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और समुद्री जीवों के पेट में जमा हो जाता है। आज के आधुनिक युग में प्लास्टिक हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न ना किसी रूप में प्लास्टिक से घिरे हुए हैं। यही प्लास्टिक अब हमारे पीने के पानी में घुल कर एक ऐसा अदृश्य व अनजान खतरा बन गया है, जो सीधे तौर पर हमारी सेहत पर हमला कर रहा है।

नैनो प्लास्टिक और बैक्टीरिया के कारण पीने का पानी प्रदूषित हो कर हमारे घरों तक पहुंच रहा है। (फोटो : Gogole LLM)

पानी के बैक्टीरिया को अधिक जिद्दी और खतरनाक बना रहे नैनोप्लास्टिक्स

रिसर्च के अनुसार, पीने के पानी में मौजूद प्लास्टिक के बहुत बारीक कण यानि नैनोप्लास्टिक्स (Nanoplastics), पानी के अंदर पाए जाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को और अधिक शक्तिशाली, जिद्दी और खतरनाक बना रहे हैं। ये कण बैक्टीरिया को एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें मारना या पानी से साफ करना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है। आइए इस गंभीर वैज्ञानिक विषय को विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए यह कितनी बड़ी चेतावनी है।

आखिर क्या होते हैं नैनोप्लास्टिक्स?

प्लास्टिक जब पर्यावरण में धूप, हवा और पानी के थपेड़ों के कारण टूटता है, तो वह बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाता है।माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics): ये प्लास्टिक के वे कण होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर से कम होता है।

नैनोप्लास्टिक्स (Nanoplastics): यह माइक्रोप्लास्टिक से भी छोटी श्रेणी है। इनका आकार 1 से लेकर 1,000 नैनोमीटर तक होता है।

कितने छोटे होते हैं ये कण? एक नैनोमीटर एक मीटर का अरबवां हिस्सा होता है। ये कण इतने बारीक होते हैं कि इन्हें हम नंगी आंखों से तो क्या, साधारण प्रयोगशाला वाले माइक्रोस्कोप से भी नहीं देख सकते। अपने इसी सूक्ष्म आकार के कारण ये पानी साफ करने वाले सामान्य फिल्टर को पार कर जाते हैं और इंसानी शरीर के अंगों के पार भी पहुंच सकते हैं।

'बायोफिल्म' या जैव परत क्या है और यह कैसे बनती है?

इस पूरे खतरे को समझने के लिए हमें 'बायोफिल्म' (Biofilm) या जैव परत को समझना होगा। जब बैक्टीरिया किसी सतह के संपर्क में आते हैं-जैसे हमारे घरों में आने वाले पानी के पाइप की अंदरूनी दीवारों पर चिपक जाते हैं। चिपके रहने के बाद, ये बैक्टीरिया अपने चारों ओर एक चिपचिपा, लेसदार पदार्थ (Matrix) छोड़ते हैं। बैक्टीरिया के इस सामूहिक समूह और उनके सुरक्षात्मक चिपचिपे कवच को ही 'बायोफिल्म' या जैवपरत कहा जाता है।

बैक्टीरिया के लिए एक किले या ढाल की तरह काम करती है बायोफिल्म

यह बायोफिल्म बैक्टीरिया के लिए एक किले या ढाल की तरह काम करती है। यह उन्हें बाहरी खतरों जैसे तापमान में बदलाव या पानी में मिलाए जाने वाले कीटाणुनाशकों (जैसे क्लोरीन) से बचाती है। हालांकि कुछ बायोफिल्म पर्यावरण के लिए फायदेमंद होती हैं, लेकिन पीने के पानी की प्रणालियों के अंदर इनका बनना खतरनाक होता है क्योंकि इनमें बीमारी फैलाने वाले रोगाणु पल सकते हैं।

हमारे घरों में सप्लाई किए जा रहे पाने में घुले नैनो प्लास्टिक बैक्टीरिया में बदलने के कारण यह पानी प्रदूषित हो रहा है। (फोटो : Gogole LLM)

रिसर्च की मुख्य खोज: नैनोप्लास्टिक कैसे बना रहे बैक्टीरिया को 'अजेय'?

वर्जीनिया टेक (Virginia Tech) की सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग की सहायक प्रोफेसर जिंगकिउ लियाओ (Jingqiu Liao) और उनके साथ काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस शोध में ई. कोलाई (E. coli) और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा (Pseudomonas aeruginosa) जैसे हानिकारक बैक्टीरिया से बनी बायोफिल्म पर नैनोप्लास्टिक्स के प्रभावों का अध्ययन किया। जब इन बायोफिल्म्स को नैनोप्लास्टिक्स के संपर्क में लाया गया, तो वैज्ञानिकों ने पाया कि बैक्टीरिया ने बहुत आक्रामक और रणनीतिक प्रतिक्रियाएं दीं। नैनोप्लास्टिक के कारण बैक्टीरिया के अंदर तीन मुख्य प्रक्रियाएं सक्रिय हो गईं:

  1. 'कोरम सेंसिंग' और मजबूत ढाल का निर्माण

नैनोप्लास्टिक के संपर्क में आते ही अलग-अलग बैक्टीरिया आपस में 'बातचीत' (Chemical Communication) करने लगे, जिसे विज्ञान में कोरम सेंसिंग (Quorum Sensing) कहा जाता है। इस बातचीत के बाद उन्होंने भारी मात्रा में ऐसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ना शुरू कर दिया जिससे बायोफिल्म पहले के मुकाबले बहुत अधिक मोटी, भारी और भौतिक रूप से मजबूत हो गई।

  1. प्रोफेज (Prophage) का सक्रिय होना

बैक्टीरिया के शरीर के अंदर कुछ ऐसे वायरस छिपे होते हैं जो सोई हुई अवस्था में रहते हैं, इन्हें प्रोफेज कहते हैं। नैनोप्लास्टिक के तनाव के कारण ये वायरस अचानक जाग गए (Active हो गए)। सक्रिय होने के बाद, इन वायरस ने उन जीवाणु कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जिनमें वे रह रहे थे और बड़ी संख्या में नए वायरस कणों का उत्पादन किया।

  1. बैक्टीरिया का अपना 'CRISPR' सुरक्षा तंत्र

जब वायरस सक्रिय हुए, तो बैक्टीरिया ने अपनी आत्मरक्षा के लिए अपने अंदर मौजूद एंटीवायरल रक्षा प्रणाली यानि CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats) का उपयोग करना शुरू कर दिया। इस आंतरिक युद्ध और नैनोप्लास्टिक की मौजूदगी ने बैक्टीरिया को जैविक रूप से और अधिक लचीला और प्रतिरोधी (Resilient) बना दिया।

जल उपचार संयंत्रों (Water Treatment Plants) के लिए बड़ी चुनौती

आम तौर पर, शहरों में पानी की सप्लाई करने से पहले जल शोधन संयंत्रों में पानी साफ करने के लिए क्लोरीन, ओजोन या अन्य कीटाणुनाशकों का उपयोग किया जाता है। लेकिन इस शोध का सबसे चिंताजनक निष्कर्ष यह है कि नैनोप्लास्टिक्स के कारण जो बायोफिल्म बनती है, वह रासायनिक कीटाणुनाशकों (Disinfectants) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (Resistant) हो जाती है। यानि, पानी को साफ करने वाली दवाइयां भी इस परत को आसानी से नष्ट नहीं कर पातीं।

पानी की पाइपलाइन की सफाई न होना खतरनाक

रिसर्च के मुताबिक यदि पानी की पाइपलाइनों के अंदर नैनोप्लास्टिक मौजूद है, तो वहां ऐसी जिद्दी जैवपरत जम जाएगी जिसे हटाना लगभग नामुमकिन होगा। यह स्थिति जल वितरण नेटवर्क (Water Distribution Networks) को हमेशा के लिए दूषित कर सकती है। रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) आज के समय में चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। जब बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाओं या कीटाणुनाशकों का असर होना बंद हो जाता है, तो उन्हें 'सुपरबग' कहा जाता है। अगर हमारे पीने के पानी की प्रणालियां ही इन सुपरबग्स के पनपने का जरिया बन गईं, तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज करना भी असंभव हो जाएगा।

शोध में शामिल मुख्य वैज्ञानिक : एक नजर

जिंगकिउ लियाओ (Jingqiu Liao): सहायक प्रोफेसर, वर्जीनिया टेक, अमेरिका (सूक्ष्मजीव पारिस्थितिकी और मेटाजेनोमिक विश्लेषण की विशेषज्ञ)।

हैबो वांग और हुई चेन: पारिस्थितिकी-पर्यावरण विज्ञान अनुसंधान केंद्र, चीनी विज्ञान अकादमी, बीजिंग।

चुजिन रुआन: पोस्टडॉक्टोरल फेलो, स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ एक्वाटिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्विट्जरलैंड।

कोरी श्वार्ज़ और पेड्रो जे.जे. अल्वारेज़: राइस वाटर इंस्टीट्यूट, राइस यूनिवर्सिटी, टेक्सास, अमेरिका।

पिंगफेंग यू: झेजियांग विश्वविद्यालय, चीन।

इस ऐतिहासिक शोध की टीम के सदस्य : एक नजर

इस महत्वपूर्ण और आंखें खोलने वाले अध्ययन को दुनिया भर के प्रमुख संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर अंजाम दिया है। इस शोध पत्र का शीर्षक है: Nanoplastics enhance the mechanical and chemical resistance of biofilms by inducing prophage activation and quorum sensing (नैनोप्लास्टिक्स, प्रोफेज एक्टिवेशन और कोरम सेंसिंग को प्रेरित कर के बायोफिल्म के मैकेनिकल और कैमिकल रेजिस्टेंस को बढ़ाते हैं।)।

एक्सपर्ट कमेंट: 'सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मंडराता 'रोगाणुरोधी प्रतिरोध' का खतरा'

प्रोफेसर जिंगकिउ लियाओ के अनुसार, "नैनोप्लास्टिक्स इंसानी स्वास्थ्य को सीधे तो नुकसान पहुंचाते ही हैं, लेकिन पर्यावरण के माध्यम से इनका अप्रत्यक्ष प्रभाव और भी घातक है। ये कण रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance - AMR) करने वाले रोगाणुओं को अधिक समय तक जीवित रहने में मदद कर सकते हैं।"

आगे की राह: अभी और शोध हैं जरूरी

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है। प्रकृति में मौजूद बायोफिल्म में कई तरह की सूक्ष्मजीव प्रजातियां एक साथ रहती हैं, इसलिए इस प्रक्रिया को और गहराई से समझने के लिए अभी और आणविक (Molecular) अध्ययनों की आवश्यकता है। साथ ही, यह भी देखना बाकी है कि प्लास्टिक के कई आकार (जैसे माइक्रोप्लास्टिक बनाम नैनो प्लास्टिक) और विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक (जैसे पीवीसी, पीईटी आदि) बैक्टीरिया और वायरस के इस अंतर्संबंध को कैसे प्रभावित करते हैं।

हमारे जल चक्र के सबसे सूक्ष्म स्तर में प्रवेश कर चुका है प्रदूषण

बहरहाल यह शोध हमें यह चेतावनी देता है कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल एक दृश्यमान समस्या नहीं है जिसे हम साफ कर सकें। यह हमारे जल चक्र के सबसे सूक्ष्म स्तर में प्रवेश कर चुका है। पीने के पानी में मौजूद ये नैनोप्लास्टिक्स अदृश्य रूप से सुपर-बैक्टीरिया के किलों को मजबूत कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि वैश्विक स्तर पर जल शोधन की तकनीकों को अपग्रेड किया जाए ताकि इन नैनो-कणों को पानी से अलग किया जा सके, अन्यथा भविष्य में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का संकट और अधिक गहरा सकता है।