
1820 में फैजाबाद की तंग गलियों में जन्मी एक लड़की, जिसके जन्म के साथ ही मां की मृत्यु और बचपन में पिता का साथ छूट गया, ने न केवल अवध की बेगम बनकर इतिहास रचा, बल्कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की मशाल जलाकर अमर हो गई। मुहम्मदी खानम से बेगम हजरत महल बनीं। इस वीरांगना ने अपने बेटे को नवाब घोषित कर, हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ लखनऊ को अंग्रेजों से मुक्त कराया। उनकी कहानी संघर्ष, साहस और स्वाभिमान की ऐसी गाथा है, जो आज भी प्रेरणा देती है। आइए जानते हैं पूरी कहानी…।
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