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‘किसी मां ने दूध में मिलाकर पिलाया पानी, किसी ने दी सिरप…’ फिर बिलख-बिलख कर रोईं

MP News: इंदौर में दूषित में पानी पीने से अभी तक 16 मौतें हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन बताया है। पूरे मामले को विस्तार से समझिए आज के इस EXPLAINER में।
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MP News: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 16 मौतों ने प्रदेश की व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है। बीते साल दिसंबर महीने में ही सतना जिला अस्पताल में रक्त कोष के संक्रमित रक्त से छह बच्चों के एचआइवी पॉजिटिव हो गए थे। अक्टूबर में छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप ने करीब 20 बच्चों की जान ले ली थी। सिंतबर में इंदौर के एमवाय अस्पताल के NICU वार्ड में चूहों ने दो नवजातों को काट लिया था। जिसके बाद दोनों की मौत हो गई थी। 3 जनवरी 2026 तक इंदौर में दूषित पानी से 16 लोगों को मौत हो चुकी है, जिनमें कई मासूम बच्चे भी शामिल हैं। आइए सबकुछ समझते हैं EXPLAINER में...

सवाल यह नहीं है कि ये घटनाएं कैसे हुईं? सवाल तो ये है कि इन्हें होने से रोका क्यों नहीं गया? लगातार सात साल से 'स्वच्छता सर्वेक्षण' में नंबर वन आने वाले इंदौर में 500 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो यह सफाई का नहीं, सफाई देने वाला शहर बन जाता है। बीते कई दिनों से बच्चे-बुजुर्ग अस्पताल के ICU में पड़े हैं, लेकिन नगर निगम और प्रशासन के पास सिवाय आंकड़ों में गड़बड़ी के कुछ नहीं है।

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