
जल सुरक्षा की पहरेदार गांव की महिलाएं (photo source- Patrika)
Jal Bahini Mission: राजनांदगांव जिले के गांवों में अब सिर्फ पानी पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उसे शुद्ध बनाए रखना भी प्राथमिकता बन गया है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के सभी 662 गांवों में ‘जल बहिनी मिशन’ शुरू किया जा रहा है, जहां गांव की महिलाएं ही पेयजल की गुणवत्ता की जांच कर जल सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह पहल ग्रामीण स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में एक बड़ा जमीनी बदलाव मानी जा रही है।
पीएचई विभाग के प्रभारी कार्यपालन अभियंता पलक जैन के अनुसार, जिले के प्रत्येक गांव से महिलाओं का चयन किया जा रहा है। ये महिलाएं अपने ही गांव के जलस्रोतों की निगरानी करेंगी और पेयजल की गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी निभाएंगी। इससे पानी की जांच अब सिर्फ लैब या कागजी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्राउंड लेवल पर लगातार निगरानी संभव होगी।
चयनित जल बहिनी महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे मौके पर ही पानी की जांच कर सकेंगी। हैंडपंप, नल-जल योजना और अन्य पेयजल स्रोतों के पानी को फ्लोराइड, आयरन, नाइट्रेट और पीएच स्तर जैसे मानकों पर परखा जाएगा।
फिलहाल जल बहिनी महिलाओं को इस कार्य के लिए कोई मानदेय नहीं दिया जा रहा है। वे यह जिम्मेदारी निशुल्क सेवा के रूप में निभा रही हैं। हालांकि, प्रशासन का मानना है कि यह पहल महिलाओं को गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी और सामाजिक पहचान दे रही है।
अशुद्ध पानी से फैलने वाली बीमारियां ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से चुनौती रही हैं। जल बहिनी मिशन के जरिए बीमारी फैलने से पहले ही खतरे की पहचान की जा सकेगी। पानी दूषित पाए जाने पर इसकी जानकारी तुरंत पंचायत और पीएचई विभाग को दी जाएगी, ताकि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
जल बहिनी मिशन जल जीवन मिशन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बना रहा है। लोगों में अब यह जागरूकता बढ़ रही है कि पानी सिर्फ दिखने में साफ होना काफी नहीं, बल्कि पीने लायक शुद्ध होना जरूरी है।राजनांदगांव में 662 गांवों में एकसाथ लागू हो रहा यह प्रयोग आने वाले समय में अन्य जिलों और प्रदेश के लिए भी मॉडल साबित हो सकता है।
भारत सरकार की गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के तहत हर गांव में जल बहिनी मिशन के अंतर्गत महिलाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से महिलाएं मौके पर ही पानी की गुणवत्ता और मानकों की जांच कर सकेंगी- पलक जैन, प्रभारी कार्यपालन अभियंता, पीएचई राजनांदगांव
राजनांदगांव में शुरू हुआ जल बहिनी मिशन यह साबित कर रहा है कि अगर योजनाओं को गांव की जमीन से जोड़ा जाए, तो उनका असर भी गहरा होता है। जब गांव की महिलाएं खुद पानी की शुद्धता की जिम्मेदारी संभालती हैं, तो यह सिर्फ एक योजना नहीं रहती, बल्कि जन-आंदोलन बन जाती है। आने वाले समय में यह मॉडल न केवल ग्रामीण स्वास्थ्य को बेहतर करेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में जल सुरक्षा की नई दिशा भी तय कर सकता है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि “हमें पानी जांचने का पूरा प्रशिक्षण दिया गया है। अब हम खुद हैंडपंप और नल-जल का पानी टेस्ट करते हैं। अगर पानी में कोई दिक्कत मिलती है तो तुरंत पंचायत और पीएचई को जानकारी देते हैं। इससे गांव के बच्चों और बुजुर्गों को बीमारियों से बचाया जा सकेगा। हमें गर्व है कि हम अपने गांव के लिए यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं।”
Updated on:
25 Jan 2026 03:40 pm
Published on:
25 Jan 2026 03:36 pm
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