
जब Big B बने विलेन(AI)
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी बहुमुखी अभिनय और किरदारों में गहराई की बात होती है, अमिताभ बच्चन का नाम सबसे पहले आता है। अपने पांच दशकों से भी लंबे करियर में उन्होंने एंग्री यंग मैन, रोमांटिक हीरो और भावुक पारिवारिक मुखिया से लेकर कई जटिल भूमिकाएं निभाई हैं। हालांकि, मिस्ट्री और सस्पेंस थ्रिलर शैली में उनका योगदान अद्वितीय है।
बॉलीवुड में जब मसाला फिल्मों का बोलबाला था, तब अमिताभ बच्चन ने ऐसी थ्रिलर फिल्मों को चुना जिन्होंने न केवल बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदले, बल्कि भारतीय दर्शकों को सस्पेंस और साइकोलॉजिकल ड्रामा का नया अनुभव भी दिया। इस संदर्भ में दो फिल्मों की चर्चा सबसे अहम है 2002 की हीस्ट थ्रिलर ‘आंखें’ और 2019 की कोर्टरूम-सस्पेंस ड्रामा ‘बदला’।
विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्देशित फिल्म ‘आंखें’ भारतीय सिनेमा की सबसे साहसी और अनोखी प्रयोगधर्मी फिल्मों में से एक थी। यह गुजराती नाटक ‘अंधलो पाटो’ पर आधारित थी। फिल्म की मूल अवधारणा ही इतनी अनोखी थी कि इसने रिलीज होते ही दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींच लिया।
सुजॉय घोष द्वारा निर्देशित ‘बदला’ 2016 की मशहूर स्पैनिश फिल्म ‘द इनविजिबल गेस्ट’ (Contratiempo) की आधिकारिक रीमेक थी। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे किसी विदेशी थ्रिलर को भारतीय परिवेश और पौराणिक संदर्भों (महाभारत) के साथ ढालकर प्रस्तुत किया जा सकता है।
कहानी का ताना-बाना:
फिल्म की कहानी एक बंद कमरे में होने वाली हत्या के इर्द-गिर्द घूमती है। नैना सेठी (तापसी पन्नू), जो एक सफल बिजनेसवुमन है, पर अपने प्रेमी की हत्या का आरोप लगता है। अमिताभ बच्चन इसमें ‘बादल गुप्ता’ नाम के एक वरिष्ठ और कभी कोई केस न हारने वाले वकील की भूमिका में हैं, जिसके पास केस की तैयारी के लिए सिर्फ तीन घंटे का समय होता है। पूरी फिल्म दोनों के बीच बातचीत, बयानों के विरोधाभास और नए-नए खुलासों के इर्द-गिर्द घूमती है।
महाभारत के रूपक और अमिताभ का अभिनय:
फिल्म में बादल गुप्ता का संवाद "बदला लेना हर बार सही नहीं होता, लेकिन माफ कर देना भी हर बार सही नहीं होता" फिल्म की आत्मा को दर्शाता है। अमिताभ बच्चन ने बिना किसी लाउड एक्शन या नाटकीयता के केवल अपनी आंखों और संवादों के उतार-चढ़ाव से रहस्य की ऐसी परतें बुनीं कि दर्शक अंत तक सच का अंदाजा नहीं लगा पाए।
आधुनिक थ्रिलर का शिखर:
कम बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में ₹130 करोड़ से अधिक की कमाई की। ‘बदला’ ने यह स्थापित किया कि बड़े सेट्स या भारी एक्शन के बिना भी केवल दो किरदारों के बीच की बौद्धिक जंग दर्शकों को सीट से बांधे रख सकती है।
| प्रमुख पहलू | आंखें (2002) | बदला (2019) |
| उप-शैली (Sub-genre) | हीस्ट / साइकोलॉजिकल थ्रिलर | चेंबर मिस्ट्री / व्होडनिट (Whodunit) |
| अमिताभ का किरदार | विजय सिंह राजपूत (प्रतिशोधी और सनकी मास्टरमाइंड) | बादल गुप्ता (शांत, चतुर और अनुभवी वकील) |
| रहस्य का स्वरूप | योजनाबद्ध अपराध और मानवीय सीमाओं की परीक्षा | बयानों के पीछे छिपा सच और अप्रत्याशित क्लाइमेक्स |
| सिनेमाई प्रभाव | हीस्ट थ्रिलर को व्यावसायिक रूप से सफल बनाया | संवाद आधारित थ्रिलर को मुख्यधारा में स्थापित किया |
अमिताभ बच्चन के इस शैली में किए गए प्रयोगों ने भारतीय सिनेमा को कई स्तरों पर समृद्ध किया:
यदि ऐतिहासिक प्रभाव का मूल्यांकन किया जाए, तो दोनों फिल्मों की अपनी अलग-अलग ऐतिहासिक भूमिकाएं रही हैं:
Updated on:
23 Aug 2026 06:27 pm
Published on:
23 Aug 2026 06:27 pm
