
प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT
युवाओं में प्रीडायबिटीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन समय रहते पहचान और बचाव से इसे टाला जा सकता है। हालिया शोध बताते हैं कि यह सिर्फ वयस्कों की बीमारी नहीं, बल्कि किशोरों और युवा वयस्कों में भी आम हो रही है। आइए समझें कि यह क्या है, कैसे पहचानें और बचाव के लिए क्या कर सकते हैं।
Comprehensive National Nutrition Survey (CNNS, 2016–18) के आंकड़ों से पता चला कि 10–19 वर्ष के किशोरों में प्रीडायबिटीज/डायबिटीज की दर लड़कों में 12.3% और लड़कियों में 8.4% थी। मुंबई में 16–25 वर्ष के युवाओं पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि प्रीडायबिटीज की दर 4.5% थी, जिसमें अधिकतर (58%) ओवरवेट थे और लगभग एक‑तिहाई में पेट की चर्बी (एब्डोमिनल ऑबेसिटी) थी।
जोखिम कारक: वजन, मोटापा और जीवनशैली CNNS अध्ययन में बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और सबस्कैपुलर स्किनफोल्ड मोटाई (SSFT) को प्रीडायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारक पाया गया। मुंबई अध्ययन में BMI ≥22.9, शरीर में वसा प्रतिशत और पेट की चर्बी बढ़ने पर प्रीडायबिटीज और इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) का खतरा बढ़ा पाया गया।
RSSDI‑ESI (2020) की क्लिनिकल गाइडलाइंस के अनुसार, 10 वर्ष या उससे अधिक उम्र के किशोरों में जोखिम‑आधारित स्क्रीनिंग की सलाह दी गई है। इसमें फास्टिंग ग्लूकोज, 2‑घंटे का OGTT और HbA1c शामिल हैं। USPSTF (2022) की गाइडलाइंस में कहा गया है कि BMI ≥85वें पर्सेंटाइल वाले किशोरों में स्क्रीनिंग पर विचार किया जा सकता है, और यदि परिणाम सामान्य हों तो हर तीन साल में दोबारा जांच की सलाह दी गई है।
जीवनशैली में बदलाव सबसे असरदार ICMR‑INDIAB अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रीडायबिटीज की कुल दर 10.3% है। यह एक चेतावनी है कि यह डायबिटीज में बदलने से पहले रोकने का समय है। इस अध्ययन में कहा गया है कि जीवनशैली सुधार (लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन) और जरूरत पड़ने पर मेटफॉर्मिन जैसी दवा से प्रीडायबिटीज को रोका जा सकता है। RSSDI‑ESI गाइडलाइंस में परिवार‑केंद्रित पोषण और जीवनशैली सुधार की जोरदार सिफारिश की गई है, जो सांस्कृतिक और पारिवारिक संसाधनों के अनुरूप हो।
यदि किशोर का BMI उच्च है, परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, या वजन बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। स्क्रीनिंग के बाद यदि HbA1c 5.7–6.4% (या FPG 100–125 mg/dL, OGTT 140–199 mg/dL) पाया जाए, तो जीवनशैली सुधार और नियमित निगरानी की सलाह दी जाती है।
जैसे ताजी सब्जियां, साबुत अनाज, कम चीनी और तला‑भुना भोजन कम करें। बच्चों और किशोरों को रोजाना कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि (जैसे तेज चलना, खेलना) में शामिल करें। यदि वजन बढ़ रहा है या परिवार में डायबिटीज है, तो डॉक्टर से HbA1c या FPG जांच कराएं। समय रहते पहचान और सुधार से प्रीडायबिटीज को रोकना संभव है — यह एक मौका है, इसे गंवाएं नहीं।
मेडिकल डिस्क्लेमर- यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले प्रमाणित डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
Updated on:
16 Sept 2026 11:43 am
Published on:
16 Sept 2026 11:43 am
