
BRICS Justice Forum न्यायिक सहयोग के जरिए भारत को वैश्विक कानून और कूटनीति के क्षेत्र में नई भूमिका देने वाला मंच बन सकता है। फोटो: ChatGPT. )
वैश्विक राजनीति में अब केवल आर्थिक और सैन्य ताकत ही किसी देश की भूमिका तय नहीं करती, बल्कि कानून, न्याय व्यवस्था और संस्थागत सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी बदलते दौर में BRICS देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने के लिए चीफ जस्टिस फोरम जैसी पहल चर्चा में है।
BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित विस्तारित सदस्य देश) अब केवल आर्थिक सहयोग का समूह नहीं रह गया है। इसके एजेंडे में वैश्विक शासन, विकास, तकनीक, सुरक्षा और संस्थागत सहयोग जैसे विषय भी शामिल हो चुके हैं।
अलग-अलग देशों की न्याय व्यवस्था, कानून और संवैधानिक ढांचे भले ही अलग हों, लेकिन कई वैश्विक चुनौतियां सभी के सामने समान हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े कानूनी सवाल डिजिटल अपराध और साइबर कानून
पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मामले
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवाद न्याय तक आसान पहुंच
जैसे विषय शामिल हैं।
चीफ जस्टिस फोरम का उद्देश्य BRICS देशों की सर्वोच्च न्यायालयों और न्यायिक संस्थाओं के बीच अनुभव साझा करना, न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार और आपसी समझ बढ़ाना हो सकता है।
ऐसे मंच आमतौर पर सदस्य देशों के मुख्य न्यायाधीशों, वरिष्ठ न्यायाधीशों और कानूनी विशेषज्ञों की भागीदारी से विकसित होते हैं।
नियमित न्यायिक संवाद
संवैधानिक मामलों पर चर्चा
कानूनी शोध और प्रशिक्षण सहयोग
न्यायिक तकनीक के इस्तेमाल पर विचार-विमर्श
जैसे पहलू शामिल किए जा सकते हैं।
यह कोई समान न्याय प्रणाली बनाने का प्रयास नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच सहयोग का माध्यम होगा।
भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में शामिल है और उसकी न्यायपालिका को वैश्विक स्तर पर संवैधानिक अनुभव के लिए जाना जाता है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को सामने रख सकता है
कानून आधारित वैश्विक व्यवस्था पर अपनी बात मजबूत कर सकता है
विकासशील देशों के साथ कानूनी सहयोग बढ़ा सकता है
भारत की विदेश नीति में अब "Legal Diplomacy" यानी कानून और संस्थागत सहयोग के माध्यम से कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
आने वाले BRICS मंचों पर केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहने वाली है।
डिजिटल गवर्नेंस
AI के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम
वैश्विक दक्षिण (Global South) की भूमिका
आर्थिक सहयोग
आतंकवाद और साइबर सुरक्षा
जैसे मुद्दे हो सकते हैं।
21वीं सदी में देशों के बीच संबंध केवल सीमाओं और व्यापार तक सीमित नहीं हैं। कानून, न्याय और संस्थागत भरोसा भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार बन रहे हैं।
Chief Justice Forum जैसी पहल BRICS देशों को एक ऐसा मंच दे सकती है, जहां वे न्यायिक अनुभव साझा कर वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाश सकें।
बहरहाल, ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम भारत के लिए केवल एक कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि वैश्विक न्याय संवाद में अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर हो सकता है। आने वाले समय में यह मंच कानून, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए आयाम खोल सकता है।
Updated on:
03 Sept 2026 07:45 pm
Published on:
03 Sept 2026 07:20 pm
