
cancer type symptoms treatment prevention tips: AI Creative
Cancer in India Prevention Tips: क्या आपने कभी सोचा है कि कैंसर केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आपके शरीर की कोशिकाओं की एक अनियंत्रित स्थिति की कहानी है? क्या यह बीमारी आपके घर में, आपके आसपास या फिर शरीर में भी कहीं पनप रही है। क्योंकि वह दस्तक देकर नहीं, बिना किसी अलार्म या चेतावनी के आती है। क्या आप जानते हैं कि समय रहते पहचान कर इसे रोका जा सकता है? इसे समझने के लिए हमें चलना होगा कैंसर की दुनिया में और जानना होगा, कैंसर क्या है, क्यों होता है, कैसे पहचानें और कैसे क्या
इससे बचने का कोई तरीका है? क्या आपके मन में भी कभी आए हैं ये सवाल, क्या यह बीमारी मुझसे दूर है या मेरे आसपास भी है? क्या मैं इसे पहचान सकता हूं, रोक सकता हूं? इस लेख में जानिए जवाब…
कैंसर एक ऐसी स्थिति है, जब शरीर की सामान्य कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और आसपास के ऊतकों में फैलने लगती हैं। इसे मेटास्टेसिस कहा जाता है।
यह प्रक्रिया अक्सर कई चरणों में होती है, जिसमें आनुवंशिक कारक और बाहरी कारक जैसे विकिरण, रसायन (तंबाकू, शराब, अफ्लाटॉक्सिन) और संक्रमण (HPV,
हेपेटाइटिस, H. pylori) शामिल होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं की मरम्मत की क्षमता कम हो जाती है, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
भारत में स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) का कैंसर, मुंह (ओरल) का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, जठरांत्र संबंधी (कोलोरेक्टल), लिवर, बोन, पैंक्रियास, थायरॉयड, आंख, जीभ आदि कई तरह के कैंसर मामले सामने आ चुके हैं।
GLOBOCAN 2022 के मुताबिक, भारत में पुरुषों में सबसे ज्यादा नए मामले होंठ और मुंह (लिप, ओरल) के 107,812 (15.6%), लंग्स-58,970 (8.5%), और इसोफेगस- 45,608 (6.6%) हैं।
महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम-192,020 (26.6%), इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा-127,526 (17.7%) और ओवरी-47,333 (6.6%)। कुल मिलाकर, दोनों लिंगों में स्तन कैंसर सबसे अधिक 13.6%, फिर लिप/ओरल-10.2%, और गर्भाशय ग्रीवा-9.0% है।
भारत में कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ICMR-NCRP (नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम) के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में लगभग 14,61,427 नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए, जिनकी क्रूड इंसीडेंस रेट (CIR) 100.4 प्रति 1,00,000 थी।
इसमें महिलाओं में यह दर 105.4 और पुरुषों में 95.6 थी। JAMA Network Open में प्रकाशित 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में अनुमानित कैंसर के नए मामले 15,62,099 थे, जिनमें पुरुषों में 7,80,822 (CIR 107.4) और महिलाओं में 7,81,277 (CIR 113.3) शामिल थे।
महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम है, क्योंकि यह शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, शहरी महिलाओं में 22 में से 1, ग्रामीण में 60 में से 1 महिला को जीवन में यह होता है। पुरुषों में ओरल कैंसर सबसे आम है, जिसका मुख्य कारण तंबाकू का सेवन (चबाना या धूम्रपान) है।
भारत में कैंसर का जोखिम क्षेत्रीय रूप से काफी भिन्न है। मिजोरम में जीवनकाल में कैंसर का जोखिम पुरुषों में 21.1% और महिलाओं में 18.9% था, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। आइजोल जिले में आयु-समायोजित इंसीडेंस रेट (AAIR) पुरुषों में 256.1 और महिलाओं में 217.2 था। यह पूरे देश में सबसे अधिक दर्ज किया गया।
शहरी क्षेत्रों में भी असमानताएं नजर आती हैं। दिल्ली में पुरुषों का कुल AAIR 146.7 था, जबकि फेफड़े के कैंसर का AAIR श्रीनगर में 39.5 था। कुछ क्षेत्रों में कैंसर की दर में वृद्धि भी देखी गई, इनमें अहमदाबाद अर्बन में पुरुषों में मुंह के कैंसर में वार्षिक वृद्धि दर 4.7% और महिलाओं में 6.9% थी, कामरूप अर्बन (पुरुषों में) और तिरुवनंतपुरम तालुक (महिलाओं में) में सभी साइटों का कैंसर बढ़ रहा था (AAPC क्रमशः 3.3% और 3.4%)।
भारत में कैंसर डेटा संग्रह का कार्य पॉपुलेशन-बेस्ड कैंसर रजिस्ट्रीज (PBCRs) के माध्यम से होता है, जिसकी शुरुआत 1981 में हुई थी। जनवरी 1982 में बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई में तीन PBCRs शुरू किए गए थे। 2025 तक, NCRP के अंतर्गत 43 PBCRs सक्रिय हैं।
इनमें से 33 ICMR-NCDIR द्वारा, 9 टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा और 1 तमिलनाडु कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम द्वारा संचालित है। इन रजिस्ट्रीज से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर के रुझान, क्षेत्रीय असमानताएं और भविष्य के अनुमान तैयार किए जाते हैं।
सरकार ने NPCDCS (National Programme for Prevention and Control of Cancer, Diabetes,Cardiovascular Diseases and Stroke) के तहत 770 जिला NCD क्लीनिक, 6,410 CHC NCD क्लीनिक, 19 राज्य कैंसर संस्थान, 20 टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर और NCI झज्जर के साथ ही CNCI कोलकाता जैसे उन्नत संस्थान स्थापित किए हैं।
आयुष्मान भारत PM-JAY योजना के तहत प्रति परिवार 5 लाख तक का इलाज उपलब्ध है। अब 70 वर्ष से ऊपर के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया है।
बजट 2025-26 में 200 डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा, NPCDCS के तहत स्क्रीनिंग, जागरूकता, स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता निर्माण और प्राथमिक स्तर पर रोकथाम पर जोर दिया गया है। संघ बजट 2025-26 में स्वास्थ्य और अनुसंधान पर कुल 99,858.56 करोड़ आवंटित किए गए, जिसमें स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को 3,900.69 करोड़ मिले।
संघ बजट 2026-27 में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए बजट बढ़ाकर 1,06,530.42 करोड़ किया गया, जिसमें कैंसर और दुर्लभ रोगों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में कटौती भी शामिल है, ताकि इलाज की लागत और मरीजों की जेब पर बोझ कम हो सके।
कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य होते हैं, लेकिन सतर्कता जरूरी है-
यदि ये लक्षण दो-तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
भारत में कैंसर की रोकथाम और इलाज के लिए शोध और तकनीकी विकास जारी है। क्वाड कैंसर मूनशॉट पहल के तहत भारत ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर गर्भाशय ग्रीवा कैंसर पर काम शुरू किया है। भविष्य में एआई-आधारित निदान, वैक्सीन कवरेज, और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम होना चाहिए। साथ ही, जीवनशैली में सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य शिक्षा पर भी जोर देना आवश्यक है।
Updated on:
31 Aug 2026 02:38 pm
Published on:
31 Aug 2026 02:38 pm
