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डॉक्टरों को मिलेगी यूनिक ID, एक रजिस्ट्रेशन से पूरे देश में कर सकेंगे प्रैक्टिस, किसे होगा फायदा?

डॉक्टरों को अलग-अलग राज्यों में प्रैक्टिस करने के लिए हर बार नए सिरे से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। अब डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस लाइसेंस की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने प्रस्ताव तैयार किया है।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 21, 2026

Doctors will get a unique ID

सांकेतिक इमेज (सोर्स-gemini)

देश में डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस लाइसेंस की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग यानी नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इसके लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत हर पंजीकृत डॉक्टर को नेशनल मेडिकल रजिस्टर में एक यूनिक आईडी नंबर मिलेगा। यह प्रस्ताव 11 अगस्त 2026 को अधिसूचित 'रजिस्ट्रेशन ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एंड लाइसेंस टू प्रैक्टिस मेडिसिन (अमेंडमेंट) रेगुलेशंस, 2026' के मसौदे का हिस्सा है। जिसे 'एक राष्ट्र, एक डॉक्टर, एक लाइसेंस' की तर्ज पर तैयार किया गया है।

कैसे काम करेगी यूनिक ID?

देश की मौजूदा व्यवस्था में डॉक्टर मुख्य रूप से अपने राज्य की मेडिकल काउंसिल में ही रजिस्टर होते हैं। नेशनल डेटाबेस से इलेक्ट्रॉनिक सिंक्रोनाइजेशन न होने के कारण किसी डॉक्टर के अनुशासनात्मक इतिहास या प्रैक्टिस स्टेटस को पूरे देश में ट्रैक करना मुश्किल होता था। नए मसौदे के तहत जब कोई व्यक्ति या विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट किसी राज्य मेडिकल रजिस्टर में पंजीकृत होगा, तो NMC का एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) केंद्रीय स्तर पर उसकी यूनिक ID जनरेट करेगा।

इस यूनिक ID में संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का कोड और राज्य मेडिकल रजिस्टर द्वारा दिया गया रजिस्ट्रेशन नंबर शामिल होगा। एक बार ID मिलने के बाद डॉक्टर देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में बिना नए सिरे से रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लिए प्रैक्टिस कर सकेगा। पहले से पंजीकृत डॉक्टरों को भी यह यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसके लिए उन्हें अपना रिकॉर्ड अपडेट करना होगा।

पांच साल होगी लाइसेंस की वैधता

मसौदा नियमों के अनुसार, प्रैक्टिस लाइसेंस की वैधता 5 साल तय की गई है। इस अवधि के बाद डॉक्टर को संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल में इसका नवीनीकरण कराना होगा। अगर डॉक्टर वैधता खत्म होने के 3 महीने के भीतर नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करता, तो उसका नाम राज्य रजिस्टर में निष्क्रिय (इनएक्टिव) कर दिया जाएगा। यह इनएक्टिव स्टेटस अपने आप नेशनल मेडिकल रजिस्टर में भी दिखने लगेगा। यानी लाइसेंस की सक्रियता अब सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश में एक जैसी दिखेगी।

फर्जी डॉक्टरों पर लगेगी लगाम

नई व्यवस्था लागू होने से देश में फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगेगी। बता दें कि मध्य प्रदेश के दमोह में एक फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट के मामले ने डॉक्टरों की पेशेवर हिस्ट्री को राज्यों के आर-पार ट्रैक करने में आ रही मुश्किल को उजागर किया था, जिसमें कथित तौर पर कई मरीजों की जान गई थी। इसी तरह की समस्याओं को देखते हुए NMC ने प्रस्ताव दिया है कि नेशनल मेडिकल रजिस्टर अब डॉक्टरों के पंजीकरण विवरण के साथ-साथ उनके खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई, जैसे- निलंबन, रजिस्ट्रेशन रद्द होना या बहाली से जुड़े आदेश की जानकारी दर्ज हो।

इसमें डॉक्टर के लाइसेंस का सक्रिय या निष्क्रिय दर्जा और किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल होगा। अगर किसी डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही या पेशेवर कदाचार की शिकायत आती है, तो जिस राज्य में घटना हुई है। वहां की स्टेट मेडिकल काउंसिल ही मामले की जांच करेगी, लेकिन कार्रवाई का रिकॉर्ड राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज होगा, जो हर राज्य को दिखेगा।

रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर मिलेगा अपील का मौका

अगर किसी डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस या नवीनीकरण के आवेदन को कोई स्टेट मेडिकल काउंसिल अस्वीकार करती है, तो वह दोबारा 30 दिनों के भीतर EMRB के समक्ष अपील कर सकेगा। EMRB को भी इस अपील पर 30 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। अगर अपील स्वीकार होती है तो संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल को 15 दिनों के भीतर उसका पालन करना होगा। एनएमसी ने इस मसौदे पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

नई व्यवस्था से क्या असर होगा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन डॉक्टरों को होगा, जो करियर के दौरान एक से ज्यादा राज्यों में काम करते हैं। ट्रांसफर लेते हैं या दूसरे राज्य में बेहतर अवसर तलाशते हैं। उन्हें अब हर बार नए सिरे से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। मरीजों और आम जनता के लिए भी यह व्यवस्था फायदेमंद होगी, क्योंकि नेशनल मेडिकल रजिस्टर का एक हिस्सा सार्वजनिक होगा। जिससे कोई भी व्यक्ति डॉक्टर से इलाज कराने से पहले उसकी डिग्री, योग्यता और अनुशासनात्मक इतिहास की जांच कर सकेगा।

इससे फर्जी डिग्री या फर्जी पहचान के सहारे प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को पकड़ना आसान होगा। यूनिक ID की व्यवस्था से स्टेट मेडिकल काउंसिलों के बीच एकरूपता, पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित होगी। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस पूरी व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य मेडिकल काउंसिलें अपने डेटा को समय पर और सही तरीके से केंद्रीय पोर्टल से जोड़ें। ताकि रजिस्टर में दी गई जानकारी हमेशा अपडेट और भरोसेमंद बनी रहे।