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क्या अब आपके घरों में आ रहा है साफ पानी? जानिए स्वच्छ जल के कितने फायदे?

Drinking water safety standards India: हाल के कुछ वर्षों में पानी की गुणवत्ता को लेकर न केवल सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर सुधार के प्रयास शुरू किए गए, बल्कि अदालतों ने भी सख्ती शुरू की। क्या आप जानते हैं आपके शहर मे पेयजल सुधार के लिए क्या कोशिशें की गईं और स्वच्छ पानी का आपकी सेहत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 26, 2026

Drinking water quality india

Drinking water quality india

Drinking water safety standards India: हाल के कुछ वर्षों में देशभर की सरकारों और अदालतों का ध्यान स्वच्छ जल के लिए कई मोर्चों पर शुरू किया। नए अपडेच हुए और अदालतें सख्त दिखीं। लेकिन अब भी बड़ा सवाल ये है कि इस सख्ती और सरकारी हलचलों के बाद क्या आपके नलों तक साफ पानी पहुंच रहा है? या सिर्फ कागजों में ही सुधार नजर आ रहा है। जानिए किन-किन शहरों में बढ़ी शिकायतें, कहां सुधरे हालात,जानिए क्या आपके शहर का पानी है सुरक्षित?

अब तक यहां आईं शिकायतें

इंदौर- सबसे बड़ा मामला: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच सामने आया, यहां दूषित पानी से 36 लोगों की मौत हुई। जलापूर्ति लाइन में सीवर का पानी मिलने और पानी के नमूनों में ई-कोलाई पाए जाने की पुष्टि हुई।

NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने मामले पर 6 सदस्यीय हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई, इसमें IIT इंदौर, CPCB भोपाल और राज्य पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।

NGT ने जिम्मेदारी तय करने का निर्देश भी दिया। रिपोर्ट में नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही को कारण बताया गया।

अन्य शहरों में भी शिकायतें सामने आईं

गांधीनगर: दूषित पानी से टाइफाइड के 108 मामले, 2 लोगों की मौत।

हैदराबाद: लिए गए 6 सैंपल में से 4 में सीवेज, कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया और औद्योगिक कचरा पाया गया।

ग्रेटर नोएडा: गंदा पानी पीने से उल्टी, बुखार, पेट दर्द के मामले सामने आए।

रोहतक और झज्जर (हरियाणा): गंदे-बदबूदार पानी की शिकायतें, लोग पानी खरीदने को मजबूर।

नए मानकों और निगरानी का ढांचा

देश में पीने के पानी की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने IS 10500:2012 मानक निर्धारित किया है, जिसका पालन शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और जल बोर्डों को हर घर तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए करना होता है।

वैश्विक स्तर पर भी हलचल हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 18 जून 2026 को अपनी पेयजल गुणवत्ता गाइडलाइंस (Guidelines for Drinking Water Quality) का नया अपडेट जारी किया। इसमें छोटे जल-आपूर्ति स्रोतों के लिए जोखिम-आधारित प्रबंधन और सैनिटरी इंस्पेक्शन पर खास जोर दिया गया है।

WHO के मुताबिक, दुनियाभर में अब भी करीब 2.1 अरब लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल नहीं मिलता, जिनमें से 10.6 करोड़ लोग सीधे नदी, झील या अन्य सतही जल-स्रोतों से पानी पीने को मजबूर हैं। यह अपडेट भारत जैसे देश के लिए खास तौर पर प्रासंगिक है, जहां छोटे कस्बों और गांवों में जल-आपूर्ति की चुनौतियां शहरों से अलग होती हैं।

निगरानी और परीक्षण की स्थिति

जल जीवन मिशन (JJM) के तहत 2025-26 में लगभग 24.89 लाख नमूनों की लैब में जांच की गई और 21.92 लाख नमूनों की फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) से जांच हुई, जो 3.92 लाख और 1.52 लाख गांवों से संबंधित थे। इससे स्पष्ट होता है कि निगरानी का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है।

राज्य स्तर पर भी निगरानी का ढांचा मजबूत हो रहा है। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में PHED का वॉटर क्वालिटी डैशबोर्ड बताता है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,09,766 स्रोतों से नमूने लिए गए, जिनमें से 48,161 सुरक्षित और 61,605 असुरक्षित पाए गए। यह आंकड़ा बताता है कि समस्या का पैमाना अभी भी व्यापक है, लेकिन निगरानी की पहुंच बढ़ी है।

न्यायिक हस्तक्षेप और सुधार की दिशा

कुछ शहरों में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें भी सामने आई हैं। जून 2026 में, नोएडा, इंदौर, गांधीनगर, पुणे और बेंगलुरु में नालियों से मिलते पानी की आपूर्ति की शिकायतें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंचीं। NGT ने संबंधित नगर निगमों को चार सप्ताह में सुधारात्मक कार्रवाई करने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को तय हुई है।

इंदौर में हाल ही में गंदे पानी से होने वाली बीमारियों के चलते मौतें और अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं हुईं, जिसके बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी अब ध्यान दिया जा रहा है।

यहां शुरू हुई सुधार की कोशिश

इंदौर- सबसे ठोस प्रशासनिक कदम, लेकिन नतीजा अभी अधूरा

  • भागीरथपुरा हादसे के बाद इंदौर प्रशासन ने हर जल-स्रोत (कुआं, बावड़ी, बोरिंग, नदी, तालाब) का हेल्थ कार्ड बनाने की योजना शुरू की है। यानी जिले के सभी जल-स्रोतों की पहचान, जियो-टैगिंग और नियमित जांच।
  • इंदौर में इसके लिए अलग मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है।
  • NGT के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान संशोधित किए हैं। यानी असर सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं, राज्यभर में नीति बदली है।
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक जांच आयोग बनाया, जिसने हाल ही में (करीब 6 महीने बाद) 600 पन्नों की रिपोर्ट पेश की है। यानी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अब पूरी हुई है।

क्या आपके शहर में सुधार हो रहा है?

यह जानने के लिए कि आपके शहर में पानी की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है या नहीं, आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

  • अपने नगर निगम या जल बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट देखें। कई राज्य और शहर अब नियमित रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
  • JJM के ‘Citizen Corner’ में जाकर गांव या शहर के पानी की जांच रिपोर्ट देखी जा सकती है।
  • यदि पानी गंदा, बदबूदार या रंग बदलता हुआ लगे, तो तुरंत स्थानीय जल विभाग या नगर निगम में शिकायत दर्ज कराएं। NGT के निर्देशों के बाद कई नगर निगमों ने शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया है।

साफ पानी मिलने पर स्वास्थ्य पर सीधा असर

डायरिया/पेट के रोगों में कमी- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता (सैनिटेशन) और हाइजीन में सुधार से डायरिया से होने वाली बीमारियों में काफी बड़ी कमी आ सकती है। यह दुनिया भर में बच्चों की मौत के प्रमुख कारणों में से एक है।

बच्चों की मृत्यु दर में कमी- 5 साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया एक प्रमुख जानलेवा बीमारी है और इसका बड़ा हिस्सा असुरक्षित पानी, खराब स्वच्छता और हाइजीन की कमी से जुड़ा है।

कुपोषण में कमी- बार-बार होने वाला डायरिया शरीर से पोषक तत्व बहा ले जाता है, जिससे बच्चों में स्टंटिंग (कद न बढ़ना) और कुपोषण बढ़ता है। साफ पानी मिलने से यह चक्र टूटता है।

टाइफाइड और हैजा जैसी महामारियों पर नियंत्रण- जैसे गांधीनगर में टाइफाइड के 108 मामले सामने आए, वैसी घटनाएं सीधे दूषित पानी से जुड़ी होती हैं। साफ पानी से इनका प्रकोप रुकता है।

लंबी अवधि में क्रॉनिक बीमारियों से बचाव- पानी में मौजूद भारी धातुएं (जैसे आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट) लंबे समय तक शरीर में जमा होकर किडनी की बीमारी, हड्डियों की समस्या (फ्लोरोसिस) और कैंसर के खतरे तक को बढ़ा सकती हैं। साफ पानी इस दीर्घकालिक जोखिम को कम करता है।

स्कूल जाने की दर और उत्पादकता पर असर- बार-बार बीमार पड़ने से बच्चों की स्कूल में उपस्थिति और वयस्कों की काम पर उपस्थिति प्रभावित होती है। साफ पानी अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा और आर्थिक उत्पादकता को भी सहारा देता है।

पानी की गुणवत्ता को लेकर अब कई स्तरों पर सुधार की दिशा में काम हो रहा है। चाहे वह मानकों का अद्यतन हो, निगरानी का विस्तार हो, न्यायिक हस्तक्षेप हो या प्रशासनिक जवाबदेही। लेकिन यह सुधार अभी पूरे देश में समान रूप से नहीं दिख रहा है। आपके शहर में यह बदलाव हो रहा है या नहीं, यह जानना और इसकी मांग करना आपकी जिम्मेदारी है। यदि आप अपने शहर के पानी की गुणवत्ता में सुधार देख रहे हैं, तो यह एक सकारात्मक संकेत है। यदि नहीं, तो शिकायत दर्ज कराना और जागरूकता बढ़ाना ही अगला कदम हो सकता है।