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फर्जी ऐप्स से बचना है तो अपनाएं ये 5 तरीके, एक गलती भी पड़ सकती है भारी

क्या आपको पता है कि एक गलत ऐप आपके बैंक खाते को खाली कर सकता है? आइए, जानें कैसे आप अपनी जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं और फर्जी ऐप्स से बच सकते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 22, 2026

Fake Apps Safety

फर्जी ऐप्स से सुरक्षित कैसे रहें? (फोटोः एआई)

आजकल स्मार्टफोन पर नकली (फर्जी) ऐप्स का खतरा बढ़ गया है। ये ऐप्स दिखने में असली लगते हैं, लेकिन आपके बैंकिंग डेटा, OTP, संपर्क, SMS और अन्य निजी जानकारी चुरा सकते हैं। ऐसे में सावधान रहना जरूरी है। इस लेख में हम आपको पांच आसान और असरदार तरीके बताने वाले हैं, जिनकी मदद से आप इन फर्जी ऐप्स से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

फर्जी ऐप्स कैसे काम करते हैं?

अक्सर साइबर ठग WhatsApp, SMS या ईमेल के जरिए लिंक भेजते हैं, जिसमें लिखा होता है कि “आपका बैंक खाता ब्लॉक हो सकता है” या “रिवॉर्ड क्लेम करें” और लिंक पर क्लिक करने पर एक ऐप डाउनलोड हो जाता है, जो दिखने में असली लगता है, लेकिन आपके कार्ड, OTP, PAN, Aadhaar जैसी संवेदनशील जानकारी मांगता है। कुछ ऐप्स तो बिना दिखे बैकग्राउंड में चलकर आपके डेटा को चुरा लेते हैं और आपके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं।

आधिकारिक स्रोत से ही डाउनलोड करें

ऐप डाउनलोड करते समय केवल Google Play Store, Apple App Store या संबंधित बैंक/सरकारी वेबसाइट से ही करें। किसी लिंक पर क्लिक कर सीधे APK इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है। यदि किसी संदेश में ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाए, तो पहले बैंक या संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन (जैसे UIDAI का 1947 नंबर) से पुष्टि कर लें।

डेवलपर नाम, रिव्यू और डाउनलोड संख्या जांचें

असली ऐप्स के डेवलपर नाम स्पष्ट और विश्वसनीय होते हैं, जैसे “State Bank of India”, जबकि फर्जी ऐप्स में मामूली बदलाव जैसे “State Bank India Pvt Ltd” हो सकता है। रिव्यू और डाउनलोड संख्या भी मददगार संकेत हैं। असली ऐप्स पर हजारों से लाखों डाउनलोड और मिश्रित रिव्यू होते हैं, जबकि फर्जी ऐप्स पर कम रिव्यू, हालिया तारीख और एकदम पॉजिटिव या जनरिक रिव्यू मिलते हैं।

अनावश्यक परमिशन से सावधान रहें

कई फर्जी ऐप्स SMS, संपर्क, कैमरा, स्टोरेज जैसी संवेदनशील परमिशन मांगते हैं, जबकि उनके काम के लिए ये जरूरी नहीं होते। उदाहरण के लिए, एक कैलकुलेटर ऐप को कैमरा या SMS की जरूरत नहीं होती। ऐप इंस्टॉल करने से पहले परमिशन को ध्यान से पढ़ें और केवल वही अनुमति दें, जो वाजिब हो।

URL, डिजाइन और भाषा पर ध्यान दें

फर्जी ऐप्स अक्सर नाम या URL में मामूली बदलाव करते हैं, जैसे “flipkart-offers.in” या “amaz0n-sale.co.in”। ऐप की डिस्क्रिप्शन में स्पेलिंग गलतियां, खराब व्याकरण या धुंधली तस्वीरें भी चेतावनी हो सकती हैं।

शिकायत और रिपोर्टिंग का रास्ता अपनाएं

यदि आपको कोई संदिग्ध ऐप मिला है, तो उसे Play Store में रिपोर्ट करें, CERT-In की वेबसाइट पर रिपोर्ट दर्ज करें, MeitY को ईमेल करें और संबंधित बैंक या संस्था को जानकारी दें। यदि पैसे डेबिट हो गए हैं, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें और cybercrime.gov.in या 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

डिजिटल सुरक्षा के अन्य उपाय

UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) हमेशा यह सलाह देता है कि अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने के लिए आपको समय-समय पर अपने आधार ऐप का पिन बदलते रहना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि अगर कोई आपका मोबाइल अनलॉक कर लेता है, तब भी बिना पिन के वह आपके आधार डेटा तक नहीं पहुंच सकता।