
सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)
रजिस्ट्री (पंजीकरण) में अक्सर छोटी-छोटी गलतियां बड़ी कानूनी और वित्तीय परेशानियां खड़ी कर देती हैं। चाहे आप पहली बार संपत्ति खरीद रहे हों या अनुभवी हों, इन गलतियों से बचना बेहद आवश्यक है। आइए जानते हैं अक्सर होने वाली आम गलतियों और उनसे कैसे बचा जा सकता है?
गलत नाम या वर्तनी (Spelling Errors): कई बार रजिस्ट्री में खरीदार या विक्रेता का नाम गलत हो जाता है। जैसे- Pratik की जगह Partik, लिख जाना। ऐसी समस्या बाद में दस्तावेजों के मिलान के समय दिक्कत पैदा कर सकती है। इसी प्रकार, रजिस्ट्री इंडेक्स में नाम या संपत्ति विवरण गलत दर्ज हो जाएं, तो RTI के माध्यम से इंडेक्स और रजिस्ट्री दस्तावेज की प्रति लेकर सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।
जब मुख्य PID से विभाजन (स्प्लिट) किया गया हो, तो रजिस्ट्री के लिए सही पीआईडी का टोकन लेना आवश्यक होता है। गलत PID पर टोकन लेने से रजिस्ट्री प्रक्रिया में बाधा आ सकती है। इसलिए टोकन लेते समय सुनिश्चित करें कि वही PID दर्ज हो, जिसके लिए रजिस्ट्री होनी है।
ऑनलाइन आवेदन में दस्तावेज धुंधले या अपठनीय होने पर आवेदन खारिज या लंबित हो सकता है। इसलिए दस्तावेज साफ-सुथरे स्कैन करें और सुनिश्चित करें कि सभी जानकारी स्पष्ट दिखाई दे रही हो।
ऑनलाइन रजिस्ट्री में अक्सर मोबाइल नंबर आधार या पैन से लिंक होना चाहिए। गलत या एजेंट का नंबर दर्ज होने से प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है। अपना ही मोबाइल नंबर दर्ज करें, जो दस्तावेजों से मेल खाता हो।
ऑनलाइन आवेदन में गवाह का विवरण या सब-रजिस्ट्रार कार्यालय गलत भरने से रजिस्ट्री रद्द या स्थगित हो सकती है। इसलिए गवाह की पहचान और कार्यालय का चयन सावधानीपूर्वक करें।
स्टाम्प ड्यूटी कम या गलत दर पर भरने से जुर्माना या रजिस्ट्री में देरी हो सकती है। इसलिए राज्य सरकार की रेट लिस्ट (रेडी रेकनर) से सही दर पता करें और शुल्क सही भरें।
रजिस्ट्री हो जाने के बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में नाम अपडेट नहीं होने से भविष्य में ऋण, बिक्री या उत्तराधिकार में समस्या हो सकती है। इसलिए रजिस्ट्री के बाद तुरंत म्यूटेशन कराएं।
कई लोग टाइटल क्लियरेंस, एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट या मालिकाना इतिहास की जांच नहीं करते, जिससे बाद में विवाद या ऋण की समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में मदर डीड, एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट और पिछले मालिकाना रिकॉर्ड की जांच करें।
कुछ मामलों में रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेज, पावर ऑफ अटॉर्नी या पहचान की नकल से की जाती है, जिससे बाद में कानूनी कार्रवाई की नौबत आ सकती है। इसलिए दस्तावेजों की सत्यता जांचें और आवश्यकता हो तो वकील की सहायता लें।
यदि रजिस्ट्री में कोई त्रुटि हो जाए, जैसे- नाम, पता, क्षेत्रफल आदि तो उसे सुधारने के लिए रेक्टिफिकेशन डीड या संबंधित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। त्रुटि मिलने पर तुरंत सुधार प्रक्रिया शुरू करें।
कुछ राज्यों में, जैसे पश्चिम बंगाल में, नाम, पिता का नाम, पता, खसरा नंबर आदि में छोटे सुधार ऑनलाइन या राजस्व कार्यालय में कराए जा सकते हैं। यदि राज्य में यह सुविधा उपलब्ध हो तो उसका लाभ उठाएं।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष कानूनी या वित्तीय स्थिति में, कृपया प्रमाणित वकील या दस्तावेज विशेषज्ञ से सलाह लें।)
Updated on:
22 Aug 2026 10:01 pm
Published on:
22 Aug 2026 10:01 pm
