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फाइबर के लिए राजस्थानी दालें क्यों हैं सही, उम्र के हिसाब से चुनिए दाल, पेट को रखिए हेल्दी

क्या आप जानते हैं कि राजस्थानी दालें आपकी सेहत का राज छिपाए हुए हैं? फाइबर की इस शक्ति से न सिर्फ आपका पाचन दुरुस्त होगा, बल्कि हर उम्र के लिए ये दालें एक सुपरफूड का काम करेंगी!
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 25, 2026

fiber foods

प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI

राजस्थान की थाली में दालों का स्थान सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है - ये फाइबर, प्रोटीन और कई पोषक तत्वों का भरोसेमंद स्रोत भी हैं, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र में स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर जब बात फाइबर की हो, तो राजस्थानी दालें परफेक्ट हैं।

दालों में फाइबर की ताकत

USDA के अनुसार, दालें - जैसे चना, उड़द, मूंग, मसूर फाइबर का समृद्ध स्रोत हैं। एक अध्ययन के अनुसार, विभिन्न दालों में कुल आहार फाइबर (TDF) की मात्रा 14% से 32% तक होती है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा असुलभ (insoluble) फाइबर का होता है। यह फाइबर हमारे पाचन को सुचारू रखता है, कब्ज से राहत देता है और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

राजस्थानी दालों की खासियत

राजस्थान में उगने वाली दालें जैसे उड़द, मूंग, चना पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। उदाहरण के लिए, FSSAI कहता है, उड़द दाल में 100 ग्राम में लगभग 18% फाइबर होता है, जबकि मूंग दाल में यह 16% तक होता है। चने में भी फाइबर की मात्रा करीब 19% है। ये आंकड़े बतलाते हैं कि राजस्थानी दालें फाइबर के मामले में कितनी मजबूत हैं।

उम्र के हिसाब से फाइबर का महत्व

Mayo Clinic के मुताबिक, बच्चों में फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है। वयस्कों में यह वजन नियंत्रण, ब्लड शुगर संतुलन और दिल की सेहत के लिए जरूरी है। बुजुर्गों में फाइबर कब्ज, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है। दालों में मौजूद असुलभ फाइबर आंत में मल का भार बढ़ाकर नियमितता लाता है, जबकि घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है।

दालों का सही उपयोग कैसे करें

दालों को भिगोकर, अंकुरित करके या खमीरित (fermented) रूप में लेने से उनकी पचने की क्षमता बढ़ती है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। इसके अलावा, दालों को साबुत रूप में पकाना जैसे पूरी उड़द या मूंग उनमें फाइबर की मात्रा को बनाए रखता है। ICMR के शोध बताते हैं कि दालों को छिलका निकालकर (दाल बनाकर) पकाने से फाइबर की मात्रा घट जाती है, जबकि साबुत दाल में यह अधिक रहता है।

राजस्थानी थाली में फाइबर कैसे बढ़ाएं

अगर आप राजस्थानी हैं तो अपनी थाली में दाल-बाटी, गट्टे की सब्जी, बाजरे की रोटी जैसे व्यंजन शामिल करें। इन व्यंजनों में दालों का उपयोग बढ़ाकर फाइबर को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, पूरी उड़द या मूंग की दाल का उपयोग करें, और दाल-बाटी में साबुत दाल का मिश्रण डालें। साथ ही, बाजरे या ज्वार की रोटियों में दाल का आटा मिलाकर फाइबर और पोषक तत्व बढ़ाए जा सकते हैं।

उम्र वर्गफाइबर का लाभराजस्थानी दालों का सुझाव
बच्चेपाचन सुधार, कब्ज से बचावमूंग दाल का हल्का सूप
वयस्कवजन नियंत्रण, ब्लड शुगर नियंत्रणउड़द-चना मिश्रित दाल, साबुत रूप में
बुजुर्गकोलेस्ट्रॉल नियंत्रण, कब्ज में राहतसाबुत उड़द दाल, अंकुरित दाल

फाइबर के अन्य स्रोत

WHO के अनुसार, दालों के अलावा, फाइबर के अन्य स्रोतों में साबुत अनाज, फल, सब्जियां और नट्स शामिल हैं। इनका सेवन भी फाइबर की मात्रा बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

अपने दैनिक भोजन में साबुत दालों का उपयोग करें, भिगोकर पकाएं, और थाली में दालों की मात्रा बढ़ाएं। इससे न सिर्फ फाइबर मिलेगा, बल्कि प्रोटीन, आयरन और अन्य पोषक तत्व भी मिलेंगे।

डॉक्टर की सलाह

यदि किसी को पाचन संबंधी समस्या, गैस या फाइबर से असहजता होती है, तो धीरे-धीरे फाइबर बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं। किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति (जैसे IBS, डायबिटीज) में, पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। यह लेख डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है।