29 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बाढ़ सिर्फ फसल नहीं डुबोती, मिट्टी की सेहत भी बदलती है; जानें किसान पर कितना असर

क्या आपने कभी सोचा है कि बाढ़ सिर्फ पानी का खेल नहीं, बल्कि आपके खेतों की किस्मत का भी फैसला करती है? जानिए कैसे ये मिट्टी और फसलों के भविष्य को प्रभावित किया है!
3 min read
Google source verification

भारत

image

Ravi Gupta

Aug 29, 2026

flood good for farmer

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

"बाढ़ विनाशकारी होता है"- यह बात पूरी तरह सत्य नहीं है। कुछ मामलों में बाढ़ लाभकारी भी है। हां, अगर इसको लेकर समझदारी से कार्य किया जाए तो किसानों के लिए फायदमेंद भी साबित हो सकता है। भारत में बाढ़ प्रभावित इलाकों को लेकर कुछ रिपोर्ट इस बात की पुष्टि भी करती हैं।

बाढ़ केवल खेतों को डुबोने वाली आपदा नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की गुणवत्ता, फसल उत्पादन और किसानों की आमदनी पर गहरा प्रभाव डालने वाली घटना भी है। नीचे हम वैज्ञानिक अध्ययन, सरकारी आंकड़ों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर इसे विस्तार से समझते हैं।

बाढ़ से मिट्टी की उर्वरता में बदलाव

केरल के त्रिशूर जिले में हालिया अध्ययन में पाया गया कि बाढ़ के बाद मिट्टी में कार्बन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम और सल्फर की मात्रा अधिक रही, जबकि नाइट्रोजन की कमी 53% नमूनों में देखी गई। साथ ही, बोरॉन और मैग्नीशियम की कमी क्रमशः 79% और 67% नमूनों में पाई गई। मिट्टी अम्लीय (pH<6.5) थी, और लोहा, मैंगनीज, जिंक व तांबा पर्याप्त मात्रा में थे। लेकिन सूक्ष्मजीवों की सक्रियता कम होने से मिट्टी की जैविक क्षमता प्रभावित हुई। यह दर्शाता है कि बाढ़ मिट्टी में कुछ पोषक तत्वों को बढ़ा सकती है, लेकिन संतुलन बिगड़ने से खेती के लिए चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं।

पंजाब में मिट्टी की बनावट पर बाढ़ का असर

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विश्लेषण से पता चला कि हिमालयी तलछट (रेड सिल्ट) ने मिट्टी में खनिज तत्वों की मात्रा बढ़ा दी, लेकिन इससे मिट्टी में हार्डपैन (कठोर परत) बन गई, जो रबी फसलों की पैदावार के लिए खतरा है। यह बदलाव मिट्टी की बनावट को प्रभावित करता है और फसल के विकास में बाधा उत्पन्न करता है।

फसल उत्पादन पर व्यापक प्रभाव

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मानसून में प्रमुख खरीफ फसलों की पैदावार सामान्य वर्ष की तुलना में 20–35% तक कम हुई। पंजाब के कई जिलों में बाढ़ से फसल क्षेत्र, मिट्टी क्षरण, पोषक तत्वों का बहाव और सिंचाई ढांचे को नुकसान हुआ, जिससे किसानों की लागत बढ़ी और उत्पादन घटा।

कृषि क्षेत्र में आर्थिक नुकसान का आकलन

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में बाढ़ से फसलों, घरों और सार्वजनिक सुविधाओं को कुल ₹58,433 करोड़ का नुकसान हुआ। 1953–2021 की अवधि में औसत वार्षिक नुकसान ₹6,972 करोड़ रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाढ़ का कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कितना बड़ा प्रभाव होता है।

बाढ़-प्रवण जिलों की पहचान

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25 के अनुसार, भारत में 51 जिले ‘अति उच्च’ और 118 जिले ‘उच्च’ बाढ़ जोखिम श्रेणी में आते हैं। यह जानकारी पंचायतों और सरपंचों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वे अपने क्षेत्र की तैयारी और बचाव योजनाओं को बेहतर बना सकते हैं।

बाढ़ के बाद कृषि अनुकूलन उपाय

ICAR और IWMI की पहल में बिहार और ओडिशा के बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में बाढ़ के बाद वैकल्पिक फसलों (जैसे मक्का, मसूर, सरसों, बैंगन, टमाटर, खीरा, गोभी, फूलगोभी) के बीज उपलब्ध कराए गए। समय पर बुवाई से किसानों को प्रति हेक्टेयर लगभग ₹16,700 अतिरिक्त शुद्ध लाभ हुआ। सब्जियों की खेती से यह लाभ ₹33,200–₹37,700 प्रति हेक्टेयर तक पहुंचा। ओडिशा में 60 दिन पुराने चावल के अंकुरों से 2018 और 2019 में क्रमशः 24% और 29% अधिक अनाज प्राप्त हुआ। लाभ-लागत अनुपात 1.55 से बढ़कर 3.08 हो गया। यह दर्शाता है कि सही प्रबंधन से बाढ़ के बाद कृषि को फिर से जीवंत किया जा सकता है।

बाढ़ कभी-कभी वरदान भी बन सकती है

केरल के कुट्टनाड क्षेत्र में 2018–19 की बाढ़ के बाद पोंचा (रबी) चावल की पैदावार में वृद्धि देखी गई। इसका कारण मिट्टी की उर्वरता में सुधार, कीटों की कम संख्या और भूजल स्तर में वृद्धि था। यह उदाहरण दर्शाता है कि बाढ़ के बाद मिट्टी की सही देखभाल से फसल उत्पादन में सुधार संभव है।

यदि आपके क्षेत्र में बाढ़ का खतरा ‘उच्च’ या ‘अति उच्च’ श्रेणी में आता है, तो मिट्टी की जांच कराएं और पोषक तत्वों की कमी को पहचानें। ICAR और IWMI जैसे संस्थानों की सलाह पर वैकल्पिक फसलें अपनाएं और समय पर बुवाई करें। यदि मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटैशियम की कमी हो तो उर्वरक संतुलित मात्रा में डालें। हार्डपैन जैसी समस्या हो तो मिट्टी को हल्के से जोतकर सुधारें।

अपने खेत की मिट्टी की जांच कराएं, पोषक तत्वों की कमी या अधिकता जानें और बाढ़ के बाद वैकल्पिक फसलों की योजना बनाएं। बाढ़ एक विनाशकारी घटना हो सकती है, लेकिन सही तैयारी और प्रबंधन से यह मिट्टी और फसलों के लिए एक अवसर भी बन सकती है।