
भारतीय दूतावासों, उच्चायोगों और प्रवासी समुदाय ने दुनिया भर में रक्षा बंधन को सांस्कृतिक गरिमा और वैश्विक बंधुत्व के संदेश के साथ मनाया। ( फोटो: AI. )
Global: रक्षा बंधन का पावन पर्व इस वर्ष दुनिया भर में बसे भारतीय प्रवासियों (एनआरआई), भारतीय दूतावासों, उच्चायोगों और हिंदू समुदायों के लिए केवल पारिवारिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक सद्भाव और वैश्विक बंधुत्व का प्रतीक बनकर उभरा। यूरोप से लेकर अमेरिका, खाड़ी देशों और अफ्रीका तक भारतीय समुदाय ने स्थानीय समाज के साथ मिल कर इस पर्व को उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया।
विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों ने रक्षा बंधन को सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। स्विट्जरलैंड, स्पेन के मैड्रिड और डेनमार्क के कोपेनहेगन स्थित भारतीय मिशनों में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां दूतावास अधिकारियों, प्रवासी भारतीयों और स्थानीय संस्थाओं ने पारंपरिक राखी बांधकर शांति, सुरक्षा और आपसी विश्वास का संदेश दिया। डेनमार्क में स्थानीय पुलिस और अग्निशमन कर्मियों को राखी बांध कर उनके प्रति सम्मान भी व्यक्त किया गया।
न्यूज़ीलैंड के वेलिंगटन स्थित भारतीय उच्चायोग ने हिंदू काउंसिल ऑफ न्यूज़ीलैंड के सहयोग से स्थानीय नागरिकों और भारतीय समुदाय के साथ यह पर्व मनाया। मेडागास्कर में भारतीय दूतावास ने पर्यावरण-अनुकूल राखियों के माध्यम से संस्कृति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जोड़ा।
अमेरिका के वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावासों में रक्षा बंधन समारोह आयोजित हुए। इन कार्यक्रमों में प्रवासी भारतीयों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गणमान्य हस्तियों ने भी भाग लिया। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में भी पारंपरिक समारोह के दौरान भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
विदेशों में सक्रिय हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS), बीएपीएस (BAPS), चिन्मय मिशन और इस्कॉन जैसे संगठनों ने रक्षा बंधन को केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रखा। कई देशों में इसे 'यूनिवर्सल ब्रदरहुड डे' यानी विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया गया।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी महिलाओं और बच्चों ने स्थानीय पुलिस थानों, फायर स्टेशनों, पैरामेडिक्स और अस्पतालों में जाकर सुरक्षा कर्मियों को राखी बांधी। इस पहल ने समाज की सुरक्षा में जुटे लोगों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश दिया।
दुबई, अबू धाबी, एडिसन (न्यू जर्सी), ह्यूस्टन (टेक्सास) और लीसेस्टर (ब्रिटेन) के प्रमुख हिंदू मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। यहां विशेष पूजा, हवन, राखी बनाने की कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रवासी बच्चों और युवाओं के लिए भगवान कृष्ण-द्रौपदी तथा रानी कर्णावती-हुमायूं से जुड़े ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों पर आधारित नाटक और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं भी कराई गईं, ताकि नई पीढ़ी भारतीय परंपराओं से जुड़ी रहे।
संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और बहरीन में रहने वाले लाखों भारतीयों ने परिवार और मित्रों के साथ रक्षा बंधन मनाया। सामाजिक संस्थाओं ने श्रमिक बस्तियों और लेबर कैंपों में जाकर मिठाइयां और राखियां वितरित कीं, जिससे दूर-दराज़ काम कर रहे भारतीय कामगारों को भी त्योहार का अपनापन महसूस हुआ।
देश से दूर रहने वाले परिवारों ने डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग किया। अंतरराष्ट्रीय स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए समय से पहले राखियां भेजी गईं, जबकि त्योहार के दिन ज़ूम और व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए आरती, टीका और शुभकामनाओं की रस्में निभाई गईं। ऑनलाइन गिफ्ट और मिठाई डिलीवरी सेवाओं ने भी इस उत्सव को और सहज बना दिया।
विदेशों में रक्षा बंधन का यह उत्सव एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें सीमाओं से कहीं आगे तक फैली हैं। यह पर्व आज भी दुनिया भर में रिश्तों, सम्मान और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को मजबूत करने का माध्यम बना हुआ है।
Updated on:
28 Aug 2026 10:22 pm
Published on:
28 Aug 2026 10:22 pm
