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भारतीय थाली में विदेशी मसालों की एंट्री, जानिए फायदे, इतिहास, कारोबार और सेहत से जुड़ी जरूरी बातें

आपके खाने में छिपे विदेशी मसाले आपकी थाली को एक नया रूप दे सकते हैं। इस लेख में जानते हैं, कैसे ये मसाले स्वाद के साथ आपकी सेहत को भी फायदा पहुंचाते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 17, 2026

Foreign Spice Benefits

विदेशी मसालों के फायदे। (फोटोः एआई)

भारतीय थाली की रंगत और स्वाद में विदेशी मसालों का समावेश एक नया, लेकिन पुराना चलन बनता जा रहा है। यह सिर्फ स्वाद की बात नहीं है, एक सांस्कृतिक और व्यावसायिक बदलाव का संकेत भी है। विदेशी मसालों के प्रयोग से थाली में जो विविधता और गहराई आई है, वह पारंपरिक स्वादों को नया आयाम दे रही है।

मसालों की ऐतिहासिक यात्रा

भारत सदियों से मसालों का केंद्र रहा है। प्राचीन व्यापार मार्गों और उपनिवेशवाद के दौर में, विशेषकर पुर्तगालियों, डचों और अंग्रेजों के आने से जायफल, लौंग, इलायची जैसे विदेशी मसाले भारतीय व्यंजनों में शामिल हुए। मिर्च, जो अब भारतीय खाने की पहचान बन चुका है, वास्तव में अमेरिका से आया था। मुगल काल में मध्य एशियाई व्यंजनों का प्रभाव भी था, जैसे कबाब, यखनी, शोरबा आदि जो बाद में भारतीय थाली का हिस्सा बन गए।

आधुनिक भारतीय थाली में विदेशी मसाले

हाल के वर्षों में भारतीय थाली में विदेशी मसालों का प्रयोग बढ़ा है। उदाहरण के लिए, यूरोपीय शैली के हर्ब्स जैसे ओरिगैनो और काफिर लाइम अब भारतीय व्यंजनों में नए स्वाद के रूप में उभर रहे हैं। यह बदलाव एक सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा बन चुका है।

मसालों की पहचान और कहानी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मसालों को कहानी बताने वाले तत्व के रूप में देखा जा रहा है। लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई और मियामी जैसे शहरों में शेफ्स अब मसालों की उत्पत्ति, उनके समुदाय और सांस्कृतिक महत्व को भी रसोई में शामिल कर रहे हैं। यह बदलाव खाने को एक अनुभव और पहचान का हिस्सा बना रहा है।

मसालों के स्वास्थ्य लाभ

भारतीय मसालों का स्वास्थ्य पर प्रभाव भी अब डेटा-आधारित रूप में सामने आ रहा है। आईआईटी जोधपुर के एक शोध (2020) ने फ्लेवर कंपाउंड्स और मसालों के चिकित्सीय गुणों का विश्लेषण किया है और एक डेटाबेस (SpiceRx) भी तैयार किया है, जो मसालों के स्वास्थ्य लाभों को वैज्ञानिक रूप से दर्शाता है। इसके अलावा, एक अध्ययन ने दिखाया है कि भारतीय व्यंजनों में मसाले अक्सर 'नेगेटिव फूड पेयरिंग' का कारण बनते हैं यानी दो स्वादों का मेल अक्सर विरोधाभासी होता है और यही भारतीय व्यंजनों की खासियत है।

व्यापार और निर्यात की स्थिति

भारत मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। 2025–26 में भारत ने लगभग 17.34 लाख टन मसाले और मसाला उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत लगभग ₹39,140 करोड़ थी। निर्यात में मुख्य योगदान देने वाले मसाले हैं, मिर्च, जीरा, मसाला तेल और ओलियोरेसिन्स, छोटी इलायची, पुदीना उत्पाद, हल्दी, करी पाउडर/पेस्ट, अदरक और काली मिर्च, धनिया। निर्यात के प्रमुख देशों में अमेरिका, चीन, यूएई, बांग्लादेश, सऊदी अरब आदि शामिल हैं।

गुणवत्ता और सुरक्षा की चुनौतियां

विदेशी मसालों का प्रयोग थाली में स्वाद को नया रूप देता है, लेकिन स्वास्थ्य और गुणवत्ता की चिंता भी बढ़ती है। हाल ही यूरोप और अन्य देशों में भारतीय मसालों में एथिलीन ऑक्साइड और कीटनाशक अवशेष पाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे मसालों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। यह दर्शाता है कि स्वाद के साथ गुणवत्ता और स्वास्थ्य का संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।

थाली में नया स्वाद, पर जिम्मेदारी भी

विदेशी मसालों का समावेश भारतीय थाली को और समृद्ध बना रहा है। यह स्वाद, कहानी और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक साथ लाता है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है।

स्वाद के साथ स्वास्थ्य, गुणवत्ता और पारदर्शिता का ध्यान रखना जरूरी होता है। जब हम थाली में विदेशी मसालों को शामिल करते हैं, तो यह स्वाद आपको भारतीय थाली में एक नया अनुभव देता है।