
सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)
विदेश व्यापार में रुपए का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023 के पैरा 2.52 और 2.53 में संशोधन करते हुए 20 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी की है। इसके तहत भारतीय निर्यातक अब गैर-एशियाई क्लियरिंग यूनियन (ACU) देशों के साथ अपने निर्यात सौदे भारतीय रुपए में तय कर सकेंगे, बिल और भुगतान भी करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें डॉलर या यूरो जैसी विदेशी मुद्रा में भुगतान लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि रुपए में मिलने वाले निर्यात भुगतान को अब एडवांस ऑथराइजेशन (AA), ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट ऑथराइजेशन (DFIA) और एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) जैसी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों और निर्यात दायित्वों की पूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा भुगतान के बराबर ही माना जाएगा। पहले यह सुविधा सीमित थी और मुख्यतः प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान जैसे देशों तक सीमित रही थी। नए बदलाव से यह छूट अब सभी गैर-ACU व्यापारिक साझेदारों के लिए खुल गई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि विदेश व्यापार नीति में इस बदलाव से निर्यातकों को अधिक लचीलापन और निश्चितता मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें विदेशों में बिक्री का बिल रुपए में बनाने और भुगतान लेने में पहले जैसी उलझन नहीं रहेगी। उद्योग जगत लंबे समय से यह स्पष्टीकरण मांग रहा था कि घरेलू मुद्रा में कारोबार करने पर निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिलेगा या नहीं।
सरकार का यह फैसला अचानक नहीं आया है। जुलाई 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रुपए में निपटाने के लिए एक अतिरिक्त व्यवस्था शुरू की थी। इस व्यवस्था के तहत अधिकृत डीलर बैंक विदेशी बैंकों के लिए विशेष रुपी वोस्ट्रो खाते (Special Rupee Vostro Account या SRVA) खोल सकते हैं। वोस्ट्रो खाता, वह खाता है जो कोई घरेलू बैंक किसी विदेशी बैंक की ओर से घरेलू मुद्रा में रखता है, ताकि दोनों देशों के बीच लेनदेन सीधे रुपए में निपट सके। इसके कुछ महीने बाद ही DGFT ने भी नीति में बदलाव कर रुपए में व्यापार निपटान को औपचारिक मान्यता दी थी। इस व्यवस्था के तहत खुलने वाले वोस्ट्रो खातों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई है।
साल 2023 की शुरुआत में करीब 18 देशों के बैंकों ने 30 विशेष वोस्ट्रो खाते खोले थे, जिनमें रूस के स्बेरबैंक और वीटीबी बैंक जैसे नाम शामिल थे। इसके बाद के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की शुरुआत तक जर्मनी और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के बैंकों समेत करीब 35 देशों के 83 बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ ऐसे खाते खोल लिए हैं। इसी दौरान वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में भारत के वस्तु व सॉफ्टवेयर निर्यात का करीब 6 प्रतिशत और आयात का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा रुपए में बिल किया गया।
नए बदलाव के पीछे भू-राजनीतिक कारण अहम हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी बैंकों के लिए डॉलर में लेनदेन मुश्किल हो गया, जिसके बाद रूस के प्रमुख बैंकों ने भारत में रुपी वोस्ट्रो खाते खोले। ईरान के मामले में यह रास्ता और पुराना है। प्रतिबंधों के दबाव में ईरान से जुड़े निर्यात को रुपए में भुगतान पाने पर व्यापार प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ देने की छूट सबसे पहले 2012-13 में ही दी गई थी। श्रीलंका के साथ भी भारत की मुद्रा-विनिमय व्यवस्था है, जिसके तहत बिना डॉलर जैसी आरक्षित मुद्रा के सहारे रुपए में व्यापार व निवेश लेनदेन निपटाया जा सकता है।
केंद्र सरकार की नई व्यवस्था अंतरराष्ट्रीयकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस पर भारत बीते कुछ वर्षों से लगातार काम कर रहा है। भारत की मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नीति और रुपए में व्यापार निपटान की व्यवस्था, दोनों अलग-अलग हैं। भारत ने अब तक अलग-अलग देशों और समूहों के साथ करीब 17 FTA किए हैं, जिनमें से 16 फिलहाल लागू हैं। ये करीब 27 से 38 देशों को कवर करते हैं।
इनमें मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, EFTA देश, ब्रिटेन और ओमान शामिल हैं। यूरोपीय संघ, कतर, इजराइल और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान आदि) के साथ बातचीत अलग-अलग चरणों में जारी है।
विश्लेषकों के मुताबिक, रुपए में व्यापार निपटान की सुविधा बढ़ने से अल्पावधि में भारत पर विदेशी मुद्रा भंडार का दबाव कुछ हद तक घट सकता है। इसके साथ ही डॉलर की तंगी से जूझ रहे व्यापारिक साझेदारों के साथ कारोबार आसान होगा। लेकिन रुपए को दुनिया की एक प्रमुख कारोबारी मुद्रा बनाने के लिए इसका पूर्ण परिवर्तनीय होना, गहरी तरलता और स्थिर व्यापक आर्थिक बुनियाद जैसी लंबी संरचनात्मक शर्तें भी जरूरी मानी जाती हैं। इसलिए यह बदलाव एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन इसे तात्कालिक क्रांति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत सरकार रुपए पर विदेशी मुद्रा के समान ही छूट-प्रोत्साहन व सारे फायदे देगी। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा। अंतरराष्ट्रीय कारोबार में रुपए के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार की पहल से विदेशी मुद्रा में मिलने वाले भुगतान के बराबर दर्जा मिलने से अंतरराष्ट्रीय कारोबार में रुपए का रुतबा बढ़ेगा। भारत का लक्ष्य रुपए को कारोबार की वैश्विक मुद्रा बनाने पर है। भारत पिछले कुछ वर्षों से रुपए के अंतरराष्ट्रीयकरण पर काम कर रहा है।
Updated on:
22 Aug 2026 04:20 pm
Published on:
22 Aug 2026 04:20 pm
