
Learning Crisis India: ASER रिपोर्ट से जानिए foundational literacy-numeracy का असली संकट (AI Creative)
Learning Crisis India: कल्पना कीजिए, एक बच्चा पांचवीं कक्षा में बैठा है, लेकिन दूसरी कक्षा की किताब भी ठीक से नहीं पढ़ पा रहा। यह किसी एक स्कूल या एक गांव की कहानी नहीं है, यह भारत के लाखों बच्चों की सच्चाई है, जिसे हर साल ASER (Annual Status of Education Report) के आंकड़े सामने लाते हैं।
ASER 2024- जो प्रथम फाउंडेशन द्वारा 605 जिलों के 17,997 गांवों में, करीब 6.49 लाख बच्चों पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा सर्वे है के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में कक्षा 3 के जिन बच्चों को कक्षा 2 का पाठ पढ़ना आता है, उनकी संख्या 2022 के 16.3% से बढ़कर 2024 में 23.4% हो गई है।
यह 2005 में ASER शुरू होने के बाद का सबसे अच्छा आंकड़ा है। अंकगणित में भी सुधार दिखा, कक्षा 3 के बच्चों में घटाव करने की क्षमता 2018 के 28.2% से बढ़कर 2024 में 33.7% हो गई।
लेकिन यह सुधार तस्वीर का सिर्फ एक कोना है। असली संकट अब भी 'विशाल' है राष्ट्रीय स्तर पर आज भी करीब 76.6% कक्षा 3 के बच्चे कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाते और 66.3% कक्षा 3 व करीब 70% कक्षा 5 के बच्चे साधारण अंकगणित (जैसे भाग या घटाव) नहीं कर पाते। यानी बच्चा स्कूल में है, उम्र के हिसाब से आगे की कक्षा में बैठा है, लेकिन उसकी बुनियादी पढ़ाई-लिखाई (Foundational Literacy and Numeracy, FLN) कई साल पीछे है।
एक दिलचस्प और चौंकाने वाला ट्रेंड यह है कि कोविड के बाद की रिकवरी में सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह सुधार NEP 2020 और NIPUN भारत मिशन जैसी नीतिगत पहलों से जोड़ा जा रहा है, जिन्होंने पहली बार कक्षा 2-3 तक बुनियादी साक्षरता को स्पष्ट लक्ष्य बनाया।
साथ ही, ग्रामीण भारत में सरकारी स्कूलों में नामांकन लगातार चौथे साल बढ़ा है। अब करीब 66.8% बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जबकि निजी स्कूलों में नामांकन करीब 30% पर स्थिर है। यानी सिर्फ़ 'निजी स्कूल बेहतर होते हैं' वाली पुरानी धारणा अब पूरी तरह सच नहीं रह गई। बल्कि नीतिगत फ़ोकस का असर दिखने लगा है।
ग्रामीण भारत की तस्वीर एक जैसी नहीं है। दक्षिण भारत के राज्य, तमिलनाडु, केरल- लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और हिमाचल प्रदेश व पंजाब भी राष्ट्रीय औसत से आगे हैं। उत्तर प्रदेश ने कक्षा 3 की पठन-क्षमता में करीब 15% का उछाल दिखाया, जबकि बिहार और ओडिशा में 8-10% सुधार हुआ।
लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्य अभी भी निचले पायदान पर संघर्ष कर रहे हैं। और सबसे अच्छे (हिमाचल प्रदेश, मिजोरम) और सबसे कमजोर (बिहार, तेलंगाना) राज्यों के बीच का अंतर लगातार चौड़ा होता जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में 60 से कम छात्रों वाले सरकारी स्कूलों की संख्या, 2010 में 17.3% से बढ़कर 2022 में 29.9% हो गई है, जो दिखाता है कि छोटे, कम-संसाधन वाले स्कूल तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां शिक्षकों और सुविधाओं की कमी सीखने पर सीधा असर डालती है।
ASER सिर्फ यह नहीं देखता कि बच्चा अक्षर या शब्द पहचान पाता है या नहीं, बल्कि यह भी परखता है कि क्या वह एक कहानी (paragraph-level text) को समझ और पढ़ सकता है।
बहुत से बच्चे अक्षर और शब्द तो पहचान लेते हैं, लेकिन पूरे वाक्य या पैराग्राफ को समझने (comprehension) में पिछड़ जाते हैं। यही लर्निंग गैप आगे चलकर गणित, विज्ञान और हर दूसरे विषय में उनकी नींव कमजोर कर देता है।
ASER 2024 साफ संदेश देता है, नामांकन (enrolment) अब भारत की समस्या नहीं रही, 6-14 साल के 97% से ज्यादा बच्चे स्कूल जा रहे हैं। असली चुनौती है, क्या वे स्कूल में सीख भी रहे हैं। सरकारी स्कूलों की हालिया रिकवरी उम्मीद जगाती है, लेकिन जब तक हर तीसरा बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से पढ़ना-लिखना नहीं सीख पाता, तब तक 'Learning Crisis' शब्द भारत की शिक्षा व्यवस्था का पीछा नहीं छोड़ेगा।
Updated on:
22 Aug 2026 04:56 pm
Published on:
22 Aug 2026 04:56 pm
