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बच्चे को एक जगह बैठाना हो रहा है मुश्किल? हाइपरएक्टिव बच्चों की परवरिश में मदद करेंगी ये 6 बातें

हाइपरएक्टिव बच्चों को संभालने के लिए मीठी चीजें कम करना, कैफीन से दूरी, स्क्रीन टाइम सीमित करना, खेलकूद, नियमित रूटीन और अच्छे व्यवहार की तारीफ जैसे तरीके मददगार हो सकते हैं। अगर व्यवहार संबंधी परेशानी घर और स्कूल दोनों जगह लगातार बनी रहे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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भारत

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Adarsh Thakur

Sep 07, 2026

Parenting Tips

सांकेतिक इमेजः ChatGPT

बच्चों का हर समय दौड़ना, एक जगह न बैठना या बार-बार अपनी बात मनवाना कई माता-पिता के लिए चुनौती बन जाता है। ऐसे में अक्सर बच्चे को हाइपरएक्टिव कह दिया जाता है, लेकिन हर ज्यादा एक्टिव बच्चा एडीएचडी (अतिसक्रियता विकार) का शिकार नहीं होता। कई बार उम्र, स्वभाव और आसपास का माहौल भी बच्चे के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चे को डांटने के बजाय उसकी ऊर्जा और आदतों को सही दिशा दी जाए।

आइए जानते हैं ऐसे बच्चों को संभालने के लिए आसान टिप्स।

1. मीठी चीजों पर रखें नजर

डॉक्टर हाइपरएक्टिव बच्चों को चॉकलेट, टॉफी और मिठाई जैसी मीठी चीजें कम देने की सलाह देते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मीठा खाना अपने आप एडीएचडी का कारण साबित नहीं हुआ है। इसलिए बच्चे को हर बार मीठा खाने के बाद ज्यादा एक्टिव देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

माता-पिता बच्चे के खाने में संतुलन रखें और जरूरत से ज्यादा मीठी चीजों की जगह पौष्टिक विकल्प दें। अगर किसी खास भोजन के बाद बच्चे के व्यवहार में बदलाव नजर आता है, तो उसका ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से बात करें।

2. चाय-कॉफी से बनाएं दूरी

बच्चों को चाय और कॉफी जैसी कैफीन वाली ड्रिंक्स से दूर रखने की सलाह दी जाती है। बच्चों के लिए इनकी जरूरत नहीं होती। इनकी जगह पानी, दूध और उम्र के अनुसार दूसरे पौष्टिक पेय दिए जा सकते हैं।

माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कैफीन केवल चाय या कॉफी में ही नहीं, बल्कि कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स में भी हो सकती है। बच्चे की नींद और दिनभर की एक्टिविटी पर नजर रखना जरूरी है।

3. स्क्रीन टाइम करें कम

आजकल कई माता-पिता बच्चे को शांत कराने के लिए मोबाइल या टीवी दे देते हैं, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत बच्चे की नींद, खेलकूद और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

अमेरिकी Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, एडीएचडी वाले बच्चों की मदद के लिए घर और स्कूल में व्यवहार संबंधी रणनीतियां जरूरी हैं।

इसलिए बच्चे के लिए स्क्रीन का समय तय करें। खाने, पढ़ाई और सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखें। उसकी जगह कहानी, ड्रॉइंग, पहेलियां और परिवार के साथ बातचीत जैसी गतिविधियां बढ़ाएं।

4. बच्चे की ऊर्जा को सही दिशा दें

कुछ बच्चे लगातार खेलना, दौड़ना और नई चीजें करना पसंद करते हैं। ऐसे बच्चों को बार-बार चुप बैठाने के बजाय उनकी ऊर्जा को सही काम में लगाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

डॉक्टर बच्चों को खेलकूद और उनकी पसंदीदा एक्टिविटी में शामिल करने की सलाह देते हैं। National Health Service भी एडीएचडी वाले बच्चों के लिए पसंद की शारीरिक गतिविधियों को ऊर्जा का अच्छा आउटलेट बताता है।

बच्चे को साइकिल चलाने, तैराकी, डांस, आउटडोर गेम्स या किसी रचनात्मक काम में शामिल करें। इससे उसे अपनी ऊर्जा इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा और वह धीरे-धीरे ध्यान लगाना भी सीख सकता है।

5. रोज का रूटीन तय करें

बच्चे को अगर पता हो कि कब उठना है, कब खाना है, कब पढ़ना है और कब सोना है, तो उसके लिए दिन को समझना आसान हो जाता है। इसलिए माता-पिता रोज का एक सरल रूटीन बनाएं।

American Academy of Pediatrics के अनुसार, व्यवहार प्रबंधन में माता-पिता की ट्रेनिंग और घर में नियमित नियमों का पालन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रूटीन बनाते समय बच्चे की उम्र और जरूरतों का ध्यान रखें। बहुत ज्यादा नियम बनाने के बजाय कुछ जरूरी आदतों पर लगातार काम करें।

6. अच्छे व्यवहार की तारीफ करें

जब बच्चा कोई अच्छा काम करता है, तो उसकी तारीफ करना बहुत जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर वह अपनी बारी का इंतजार करता है, खिलौने समेटता है या कुछ देर ध्यान लगाकर काम करता है, तो उसे जरूर प्रोत्साहित करें।

डांटने के बजाय सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान देने से बच्चा समझता है कि उससे किस तरह का व्यवहार अपेक्षित है। Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, माता-पिता की व्यवहार प्रबंधन ट्रेनिंग बच्चों के व्यवहार, आत्मनियंत्रण और आत्मसम्मान को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर बच्चा बहुत ज्यादा चंचल है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे एडीएचडी है। Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, एडीएचडी की पहचान के लिए एक ही टेस्ट नहीं होता। डॉक्टर बच्चे के व्यवहार, ध्यान और आवेग से जुड़ी समस्याओं का आकलन करते हैं।

अगर बच्चे को घर और स्कूल दोनों जगह ध्यान लगाने, अपनी बारी का इंतजार करने या व्यवहार नियंत्रित करने में लगातार परेशानी हो रही है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। सही समय पर मदद मिलने से बच्चे को बेहतर तरीके से सीखने और आगे बढ़ने में सहायता मिल सकती है।

सुझाव: हाइपरएक्टिव बच्चे को संभालने का सबसे अच्छा तरीका है धैर्य, नियमितता और सकारात्मक व्यवहार। हर बच्चे को समझने का तरीका अलग होता है। माता-पिता अगर उसकी ऊर्जा को सही दिशा दें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें, तो बच्चे के लिए घर और स्कूल दोनों जगह बेहतर माहौल बनाया जा सकता है।