27 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

AI, सेंसर और ड्रोन से बदल रही खेती: कम लागत, ज्यादा पैदावार और बढ़ता मुनाफा

Smart agriculture technology India : खेती में इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे बढ़ा रहा है किसानों का मुनाफा? जानिए एआई सेंसर, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन और डिजिटल एग्री मिशन के फायदों के बारे में।
3 min read
Google source verification
Smart agriculture technology India

Smart agriculture technology India : कैसे किसान बनेंगे स्मार्ट, PC- Chatgpt

खेती में इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी का उपयोग अब केवल भविष्य की बात नहीं, बल्कि आज की आवश्यकता बन चुका है। जब खेतों में सेंसर, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा की शक्ति मिलती है, तो मुनाफा बढ़ता है, लागत घटती है और खेती अधिक भरोसेमंद बनती है। आइए समझते हैं कि ये तकनीकें कैसे काम कर रही हैं और आपके खेत के लिए क्या मायने रखती हैं।

स्मार्ट खेती की नींव: डेटा और AI की ताकत

भारत में डिजिटल खेती का आधार तेजी से मजबूत हो रहा है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अब तक 7.63 करोड़ किसान आईडी बनाए जा चुके हैं और 23.5 करोड़ फसल भूखंडों का सर्वेक्षण हो चुका है। यह विशाल डेटा एआई-आधारित उपकरणों को खेत की स्थिति समझने और किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

तेलंगाना की “सागू बागू” परियोजना इसका एक प्रमुख उदाहरण है। इसमें लगभग 7,000 मिर्च उत्पादक किसानों ने भाग लिया। एक सीजन में किसानों को 21% अधिक पैदावार, 9% कम कीटनाशक उपयोग, 5% कम उर्वरक खपत और 8% बेहतर कीमत मिली। इससे प्रति एकड़ करीब 66,000 रुपये (लगभग 800 डॉलर) की अतिरिक्त आमदनी हुई, यानी किसानों की कमाई लगभग दोगुनी हो गई। इसी तरह आंध्र प्रदेश में एआई-आधारित बुवाई सलाह से किसानों की पैदावार में 30% तक वृद्धि दर्ज की गई।

सेंसर और स्मार्ट सिंचाई से पानी व लागत दोनों की बचत

गुजरात और महाराष्ट्र के छोटे किसानों ने आईओटी (IoT) सेंसर और स्मार्ट सिंचाई प्रणाली को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप फसल उत्पादन में 30% वृद्धि हुई, पानी की खपत 40% घटी और खेती की लागत में 25% तक कमी आई। किसानों की आमदनी भी एक सीजन में 25–30% तक बढ़ी।

इन तकनीकों की खासियत यह है कि खेत की मिट्टी, नमी, पानी और मौसम से जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल या कंप्यूटर पर उपलब्ध हो जाती है। इससे किसान सही समय पर सही निर्णय ले पाते हैं।

हाइड्रोपोनिक्स: नियंत्रित खेती का नया मॉडल

भारत में नियंत्रित खेती की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। ब्रियो हाइड्रोपोनिक्स ने तालोद में देश के सबसे बड़े हाइड्रोपोनिक पार्क की स्थापना की है। इस तकनीक में मिट्टी की जगह पानी और पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है, जबकि आईओटी सेंसर और एआई खेती के लगभग हर पहलू की निगरानी करते हैं।

अब तक 150 से अधिक प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं और 16,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है।

सरकार और एग्रीटेक स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका

केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में एआई और डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। नेशनल डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत डिजिटल आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। वहीं, नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम 66 फसलों और 432 कीटों के लिए रियल-टाइम सलाह उपलब्ध कराता है।

किसान ई-मित्र चैटबोट दिसंबर 2025 तक 93 लाख से अधिक सवालों का जवाब दे चुका है।

वैज्ञानिक और तकनीकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जुलाई 2026 में कहा था कि एआई के उपयोग से प्रत्येक किसान सालाना लगभग 5,000 रुपये तक की बचत कर सकता है। इससे कृषि अर्थव्यवस्था में करीब 70,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मूल्य जुड़ने की संभावना है।

एग्रीटेक प्लेटफॉर्म कैसे बढ़ा रहे हैं किसानों का मुनाफा

AgriDoot जैसे प्लेटफॉर्म किसानों की लागत 20% तक कम करने, पैदावार 30–40% तक बढ़ाने और मुनाफा 118% तक बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

वहीं DeHaat जैसे प्लेटफॉर्म बीज, उर्वरक, कीटनाशक, मशीनरी, वित्तीय सेवाएं और बाजार संबंधी जानकारी मोबाइल ऐप तथा कॉल सेंटर के माध्यम से किसानों तक पहुंचा रहे हैं।

तकनीक अपनाने की राह में चुनौतियां भी हैं

हालांकि तकनीक के लाभ स्पष्ट हैं, लेकिन इसे अपनाने में कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। भारत में अभी 20% से कम किसान डिजिटल तकनीकों का उपयोग करते हैं। छोटे किसानों के लिए महंगे उपकरण खरीदना आसान नहीं है, जबकि डिजिटल साक्षरता की कमी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

इसके अलावा, एग्रीटेक स्टार्टअप्स के सामने लाभप्रदता बनाए रखने की चुनौती भी है, क्योंकि इस क्षेत्र में निवेश की गति धीमी पड़ रही है।

किसानों के लिए क्या हैं अवसर?

यदि आप युवा या प्रगतिशील किसान हैं, तो ये तकनीकें आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।

  • छोटे निवेश से शुरुआत करें, जैसे मिट्टी सेंसर या स्मार्ट सिंचाई प्रणाली।
  • AgriDoot और DeHaat जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर तकनीकी सलाह लें।
  • डिजिटल एग्री मिशन और पेस्ट सर्विलांस जैसी सरकारी पहलों का लाभ उठाएं।
  • एफपीओ (FPO) या सहकारी समितियों के माध्यम से समूह में तकनीक अपनाने पर विचार करें।

तकनीक अपनाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • बड़े निवेश से पहले तकनीक की विश्वसनीयता और लागत-लाभ का आकलन करें।
  • डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण लें या कृषि विस्तार सेवाओं से जुड़ें।
  • मंडी भाव और बाजार से जुड़े आंकड़े तेजी से बदलते हैं, इसलिए ताजा जानकारी के लिए नजदीकी मंडी या eNAM पोर्टल का उपयोग करें।

स्मार्ट खेती ही भविष्य की खेती

खेती में इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी का उपयोग अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बनता जा रहा है। एआई, सेंसर, ड्रोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल करने का अवसर दे रहे हैं।

छोटे कदमों से शुरुआत कर, सही तकनीक चुनकर और उपलब्ध सरकारी व निजी प्लेटफॉर्म का लाभ उठाकर किसान अपनी खेती को भविष्य के लिए तैयार कर सकते हैं। स्मार्ट खेती का यह मॉडल न केवल आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि कृषि को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा।