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JJM 2.0 योजना में बड़ा बदलाव; अब डिजिटली होगी गांव में होने वाली वॉटर सप्लाई की निगरानी, किसे मिलेगा फायदा?

अगर आपको अपने घर में होने वाली पानी की सप्लाई को सिर्फ एक क्लिक के जरिए कंट्रोल करने की सुविधा मिल जाए तो कैसा रहेगा? जल जीवन मिशन 2.0 आपके लिए यही बदलाव लाने वाला है। जल जीवन मिशन 2.0 सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जल सुरक्षा की दिशा में एक बदलाव है।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 26, 2026

Jal Jeevan Mission

सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)

जल जीवन मिशन 2.0 की घोषणा ने ग्रामीण भारत में पेयजल सेवा की दिशा को एक नए युग में प्रवेश कराया है। अब यह केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सतत, भरोसेमंद और समुदाय-केन्द्रित जल सेवा की ओर एक ठोस कदम बन गया है। जल जीवन मिशन 2.0 सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जल सुरक्षा की दिशा में एक बदलाव है।

यह आपके गांव में पानी की सेवा को स्थायी, पारदर्शी और समुदाय‑केन्द्रित बनाता है। अगर आप पंचायत या VWSC से जुड़कर इस मिशन का हिस्सा बनते हैं, तो यह आपके गांव की जल‑भविष्य को मजबूत करेगा। इस लेख में हम समझेंगे कि आपके गांव में इससे क्या बदलाव आएंगे? यह कैसे काम करेगा और आपको क्या फायदा होगा?

JJM योजना में बड़ा बदलाव

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन (JJM) की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी। साथ ही इसे 'जल जीवन मिशन 2.0' के रूप में पुनर्गठित किया गया। इसका उद्देश्य अब सिर्फ बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत और नागरिक-केंद्रित पेयजल सेवा सुनिश्चित करना है। इस नए चरण के लिए कुल बजट ₹8.69 लाख करोड़ रखा गया है, जिसमें से केंद्र सरकार ₹3.59 लाख करोड़ सहायता देगी। यह 2019‑20 में स्वीकृत ₹2.08 लाख करोड़ से काफी अधिक है।

डिजिटल निगरानी और जवाबदेही

JJM 2.0 में 'Sujalam Bharat' नामक एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा लागू किया गया है, जिसके तहत हर गांव को एक 'Sujal Gaon ID' या सेवा क्षेत्र ID दी जाएगी। यह पूरे जल आपूर्ति तंत्र (स्रोत) से लेकर नल तक की डिजिटल मैपिंग और निगरानी संभव बनाएगा। साथ ही, SNA‑SPARSH प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजनाओं के लिए फंड रिलीज, खर्च की ट्रैकिंग और रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

स्रोत स्थिरता और समुदाय की भागीदारी

JJM 2.0 में जल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन, धूसर जल (Grey water) प्रबंधन और ग्राम-स्तरीय जल सुरक्षा योजनाएं शामिल हैं। जल संचय जन‑भागीदारी अभियान 1 जून 2026 को शुरू किया गया, जो जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की दिशा में एक पहल है। साथ ही, ग्राम पंचायतों, ग्राम जल और स्वच्छता समितियों (VWSC), स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों को जल आपूर्ति परिसंपत्तियों के प्रबंधन और रखरखाव में सशक्त बनाया जा रहा है।

वास्तविक बदलाव: गांवों में क्या दिखेगा?

ग्रामीण क्षेत्रों में नल से पीने के पानी की उपलब्धता 16.7% से बढ़कर 82% से अधिक हो गई है। IIT कानपुर के हालिया अध्ययन (21 अगस्त 2026) में उत्तर प्रदेश के देवी पाटन क्षेत्र के 4,000 घरों पर आधारित सर्वे में पाया गया कि FHTC (Functional Household Tap Connection) कवरेज 97.11% तक पहुंच चुका है। इससे परिवारों को पानी लेने में लगने वाला समय बचा, जिससे शिक्षा, देखभाल और आय‑उत्पादक गतिविधियों के लिए समय मिला। स्कूलों में छात्र‑उपस्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। गोंडा में 38.1%, बहराइच में 17.4%, श्रावस्ती में 15.1% और बलरामपुर में 13.2% तक वृद्धि हुई है।

आपके गांव में क्या बदलाव आएंगे?

  • अब नल से पानी मिलने की नियमितता और गुणवत्ता में सुधार होगा, क्योंकि यह सेवा‑केन्द्रित मॉडल पर आधारित है।
  • डिजिटल निगरानी से गांव में पानी की आपूर्ति, खर्च और रखरखाव की जानकारी पारदर्शी होगी।
  • वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसी योजनाएं आपके गांव में जल स्रोतों को मजबूत बनाएंगी।
  • VWSC और ग्राम पंचायत को जिम्मेदारी मिलने से स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी।
  • समय की बचत से महिलाएं और बच्चे शिक्षा, घरेलू काम या आय‑उत्पादन में समय लगा सकेंगे। जैसे- IIT कानपुर के अध्ययन में दिखा।

स्थानीय नागरिकों के लिए सुझाव

  • अपने गांव की VWSC या ग्राम पंचायत से पूछें कि Sujal Gaon ID क्या है और क्या आपके गांव में लागू है।
  • वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण या जल संरक्षण की स्थानीय योजनाओं में सक्रिय भागीदारी करें।
  • पानी की गुणवत्ता, नियमितता और रखरखाव के बारे में जानकारी रखें और जरूरत पड़ने पर पंचायत से संवाद करें।
  • महिलाओं और युवाओं को इस मिशन में शामिल करें—उनकी भागीदारी से योजना की सफलता बढ़ती है।