
'सोना मोती' गेहूं (AI)
राजस्थान के कृषि परिदृश्य में पारंपरिक और विलुप्तप्राय देसी फसलों (Endangered native crops) की वापसी एक नए आर्थिक व पोषण क्रांति का सूत्रपात कर रही है। हाइब्रिड बीजों और अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के दौर में 'सोना मोती' (Sona Moti) गेहूं ने किसानों और स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मोती जैसे गोल, सुनहरे दानों वाली यह प्राचीन किस्म न केवल बेहतरीन पोषण मूल्य प्रदान करती है, बल्कि कम लागत और ऊंचे बाजार भाव के कारण किसानों की आमदनी को दोगुना करने का ठोस जरिया बन रही है।
सोना मोती गेहूं को भारत की प्राचीन कृषि संस्कृति का हिस्सा माना जाता है, जिसके ऐतिहासिक तार सिंधु-घाटी व हड़प्पा सभ्यता से जुड़े हैं। आधुनिक गेहूं की तुलना में इसके दाने चपटे और लंबे न होकर गोल, चमकदार और मोती के समान ठोस होते हैं।
कम ग्लूटन इंडेक्स: इसमें ग्लूटन की मात्रा सामान्य गेहूं से काफी कम होती है, जिससे यह पाचन में बेहद हल्का और सीलिएक सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए अनुकूल माना जाता है।
मधुमेह एवं हृदय रोगियों के लिए उपयुक्त: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है। यह रक्त में शर्करा के स्तर को तेजी से नहीं बढ़ाता।
सूक्ष्म पोषक तत्वों का भंडार: यह फोलिक एसिड, जिंक, आयरन, मैग्नीशियम और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है, जो महिलाओं और बच्चों में पोषण की कमी दूर करने में सहायक है।
उच्च फाइबर और प्रोटीन: इसमें पाचक रेशा (डाइटरी फाइबर) और प्राकृतिक प्रोटीन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।
सोना मोती गेहूं मुख्य रूप से प्राकृतिक और जैविक खाद पर सबसे बेहतर परिणाम देता है। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से इसकी मूल गुणवत्ता और स्वाद प्रभावित हो सकता है। राजस्थान की दोमट, बलुई दोमट और कछारी मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
खेत की तैयारी के प्रमुख चरण:
| मापदंड | सामान्य हाइब्रिड गेहूं | सोना मोती गेहूं |
| खेती का तरीका | रासायनिक (DAP, यूरिया निर्भर) | मुख्य रूप से पूर्ण जैविक / प्राकृतिक |
| लागत प्रति एकड़ | ₹12,000 – ₹15,000 | ₹6,000 – ₹8,000 (देसी खाद आधारित) |
| औसत उपज | 18 – 22 क्विंटल/एकड़ | 12 – 15 क्विंटल/एकड़ |
| मंडी / बाजार भाव | ₹2,275 – ₹2,600 प्रति क्विंटल | ₹7,000 – ₹10,000 प्रति क्विंटल |
| आटा खुदरा मूल्य | ₹30 – ₹40 प्रति किलो | ₹90 – ₹120 प्रति किलो |
राजस्थान के भरतपुर जिले में किसानों द्वारा जैविक विधि से की गई खेती में इसके भाव ₹8,000 प्रति क्विंटल तक प्राप्त हुए हैं। वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) द्वारा इसका पारंपरिक चक्की से पिसा हुआ आटा ₹100 प्रति किलो के प्रीमियम भाव पर सीधे शहरी उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है।
सोना मोती गेहूं की खेती में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर सफलता के लिए कुछ सावधानियां आवश्यक हैं।
कम पानी और शून्य रासायनिक निर्भरता के साथ राजस्थान के किसान सोना मोती गेहूं को अपनाकर बंजर और सीमित संसाधनों वाली भूमि से भी उच्च गुणवत्ता वाली नकदी फसल हासिल कर सकते हैं। सही योजना, मिट्टी के जैविक सुधार और लक्षित मार्केटिंग के साथ यह फसल पारंपरिक खेती को लाभप्रद व्यवसाय में बदलने की पूरी क्षमता रखती है।
Updated on:
26 Aug 2026 05:41 pm
Published on:
26 Aug 2026 05:41 pm
