
प्रतीकात्मक तस्वीर } Credit- ChatGPT
पाकिस्तान ने आतंकवादी मसूद अजहर की गिरफ्तारी कराने वालों को 70 लाख इनाम देने की घोषणा की है। इससे पहले यह राशि करीब 50 लाख थी। दरअसल, पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अपनी वेबसाइट पर 2026 की "रेड बुक- मोस्ट वॉन्डेट हाई प्रोफाइल टेररिस्ट' लिस्ट जारी की है।
ये सिलसिला 2021 से पाकिस्तान में जारी है मतलब कि इंटरनेशनल प्रेशर के कारण 2021 में इस लिस्ट में पाकिस्तान ने मसूद का नाम जोड़ा था। पर, सवाल उठता है कि आखिर पाकिस्तान में छिपे आतंकवादी को ही पाकिस्तानी सुरक्षा टीम पकड़ क्यों नहीं पा रही है?
भारत में संसद हमला (2001) और पुलवामा हमला (2019) जैसे कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड यही है। हालांकि, इसे भारत ने गिरफ्तार कर लिया था लेकिन, दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट (IC-814) के अपहरण के बाद यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए उसे रिहा करना पड़ा था।
पाकिस्तान की जांच एजेंसी (FIA) का मसूद अजहर का नाम जोड़ना और राशि का बढ़ाना। यह साफ करता है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच आतंकवाद विरोधी कार्रवाई दिखाना चाहता है। इससे दवाब को समझा जा सकता है।
पाकिस्तान की ओर से यह दावा किया जाता रहा है कि अजहर देश में नहीं है और अफगानिस्तान भाग गया है। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, पिछले छह महीनों में यह जानकारी मिली है कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में छिपा हुआ है।
दावा 1- CNN को साल 2019 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इंटरव्यू में कहा था कि मसूद अजहर पाकिस्तान में ही हैं। वे बीमार हैं, वे इतने बीमार हैं कि अपने घर से बाहर भी नहीं निकल सकते।
दावा 2- BBC को साल 2025 में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया था कि मसूद अजहर पाकिस्तान में नहीं है।
इससे यह समझ में आता है कि पाकिस्तान सरकार कागज पर कुछ और जमीनी स्तर पर कुछ और खेल खेल रही है। ऐसे में मसूद जैसे मोस्ट वॉन्टेड को पकड़ने की मंशा भी साफ दिख जाती है। पर, ये कागजी खेल कब तक पाकिस्तान खेलेगा?
FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इनमें से 17 आतंकियों की तस्वीरें और उनकी भूमिकाएं सूची में दी गई हैं, जबकि दो आतंकियों—तुर्बत के मोहम्मद खान और बहावलनगर के अब्दुल रहमान—के मामले में तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और भूमिका की जानकारी हटा दी गई है।
इन 19 आतंकियों में से 11 उन लश्कर-ए-तैयबा सदस्यों के नाम हैं, जिन्होंने अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए हमलावरों को समुद्र मार्ग से मुंबई पहुंचाने में मदद की थी। इनके नाम हैं: मुहम्मद अमजद खान (मुल्तान), शाहिद गफूर (बहावलपुर), मोहम्मद उस्मान (साहिवाल), अतीक-उर-रहमान (लाहौर), रियाज अहमद (हाफिजाबाद), मुहम्मद मुश्ताक (गुजरांवाला), मुहम्मद नईम (डेरा गाजी खान), अब्दुल शाकूर (कराची), मुहम्मद साबिर सल्फी (मुल्तान), मुहम्मद उस्मान (लोडरान) और शकील अहमद (रहिम यार खान)।
इसके अलावा, छह आतंकियों पर हमले के लिए आर्थिक मदद देने का आरोप है। इनमें शामिल हैं: - मुहम्मद इफ्तिखार अली (फैसलाबाद) — VOIP कनेक्शन के लिए 70,000 रुपये खर्च किए। - मोहम्मद जिया (रावलपिंडी) — 80,000 रुपये। - मोहम्मद अब्बास नासिर (खानेवाल) — 2,53,000 रुपये। - जावेद इकबाल (कासूर) — 1,86,430 रुपये। - मुख्तार अहमद (मंडी बहाउद्दीन) — 2,98,047 रुपये। - अहमद सईद (बटाग्राम) — 21 लाख रुपये।
FIA के अनुसार, ये सभी 17 आतंकी 18 साल से फरार हैं। लेकिन भारतीय सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि ये सभी पाकिस्तान में ही मौजूद हैं, और उन्हें सूची में शामिल करना केवल अंतरराष्ट्रीय निगरानी को भ्रमित करने का प्रयास हो सकता है।
FIA की रेड बुक में आतंकियों की संख्या भी बढ़ी है - 2021 में इसमें 1,330 नाम थे, जो अब बढ़कर 1,804 हो गए हैं, यानी लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगर पाकिस्तान आतंकवादियों को पकड़ने का सिर्फ कागजी खेल खेलेगा तो ये नंबर बढ़ते जाएंगे, राशि बढ़ेगी और हम सिर्फ आतंकियों की गिनती करेंगे।
Updated on:
15 Sept 2026 05:06 pm
Published on:
15 Sept 2026 05:06 pm
