28 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सप्ताह में एक दिन का वर्कआउट करना कितना फायदेमंद? वैज्ञानिक शोध पता चली ये बातें

क्या आप सोचते हैं कि हर दिन वर्कआउट करना जरूरी है? एक दिन की मेहनत भी आपके स्वास्थ्य के लिए कर सकती है जादू! जानिए कैसे वीकेंड वॉरियर्स बनकर आप भी स्वस्थ रह सकते हैं।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Ravi Gupta

Aug 28, 2026

one day workout in a week

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

क्या एक दिन वर्कआउट करना सच में असरदार है? यह सवाल कई व्यस्त जीवनशैली वाले लोगों के मन में आता है। हाल की शोधों से पता चलता है कि सप्ताह में केवल एक दिन व्यायाम करना भी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है - बशर्ते आप कुछ चीजों का ध्यान रखें।

शोध में क्या पता चला

एक अध्ययन (Circulation, सितंबर 2024) में पाया गया कि जो लोग अपनी पूरी शारीरिक गतिविधि सप्ताह में एक या दो दिनों में पूरी करते हैं - जैसे वीकेंड वॉरियर्स - उनका कई बीमारियों का जोखिम उतना ही कम होता है जितना कि नियमित रूप से सप्ताह में कई दिन व्यायाम करने वालों का। इस अध्ययन में 250 से अधिक बीमारियों - जैसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, मोटापा और स्लीप एपनिया का जोखिम दोनों समूहों में लगभग समान रूप से कम पाया गया।

एक मेटा-विश्लेषण ने भी पुष्टि की है कि ‘वीकेंड वॉरियर’ पैटर्न जिसमें 150 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि सप्ताह में 1–2 दिनों में पूरी की जाती है - स्वास्थ्य परिणामों में नियमित व्यायाम के बराबर लाभ देता है। इसमें सभी कारणों से मृत्यु, हृदय रोग, कैंसर, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, उच्च रक्तचाप, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और अवसाद जैसी स्थितियों में जोखिम में कमी शामिल है।

मृत्यु दर पर भी असर

मृत्यु दर पर भी असर देखा गया है। एक सिस्टमेटिक रिव्यू में पाया गया कि वीकेंड वॉरियर्स की समग्र मृत्यु दर (all-cause mortality) में 23% तक कमी आती है (HR = 0.77), जबकि नियमित व्यायाम करने वालों में यह कमी लगभग 30% (HR = 0.70) थी। हृदय रोग और कैंसर से मृत्यु का जोखिम भी वीकेंड वॉरियर्स में काफी कम पाया गया।

मस्तिष्क स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। एक अध्ययन में पाया गया कि वीकेंड वॉरियर पैटर्न से न्यूरोप्रोटेक्टिव लाभ मिलते हैं—जैसे डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी स्थितियों का जोखिम कम होना।

मांसपेशियों की ताकत और फिटनेस पर प्रभाव: एक चार साल का अध्ययन (2026) जिसमें 60–82 वर्ष के बुजुर्ग पुरुष शामिल थे, यह दर्शाता है कि सप्ताह में एक बार मल्टी-जॉइंट रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (जैसे चेस्ट प्रेस, लेग प्रेस) और 30 मिनट एरोबिक व्यायाम करने से मांसपेशियों की ताकत में सुधार होता है और साथ ही VO₂max (ऑक्सीजन लेने की क्षमता) में भी वृद्धि होती है जो केवल रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से संभव नहीं थी।

मेटा-विश्लेषण से यह भी पता चला है कि जब वॉल्यूम बराबर हो, तो सप्ताह में एक दिन की रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (LF) और ≥3 दिन की ट्रेनिंग (HF) से ताकत में समान सुधार होता है, खासकर अनट्रेंड या बुजुर्गों में।

एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि सप्ताह में एक सेट व्यायाम (एक दिन) करने से ताकत में उतना ही सुधार होता है जितना कि दो दिन करने से - बुजुर्गों में यह विशेष रूप से उपयोगी है।

सप्ताह में एक दिन वर्कआउट करने से निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

  • हृदय और मेटाबॉलिक रोगों का जोखिम कम होना
  • मृत्यु दर में कमी (सभी कारणों से और हृदय संबंधी)
  • मस्तिष्क स्वास्थ्य में सुधार
  • मांसपेशियों की ताकत और कार्डियो फिटनेस में बढ़ोतरी

लेकिन यह तभी संभव है जब वह एक सत्र पर्याप्त तीव्रता और वॉल्यूम का हो।

सबसे पहले, यदि आप व्यस्त हैं और पूरे सप्ताह में समय नहीं निकाल पाते, तो सप्ताह में एक दिन 60 मिनट का मिश्रित व्यायाम जिसमें स्ट्रेंथ (मांसपेशियां बनाने वाला) और कार्डियो (दिल की धड़कन तेज करने वाला) शामिल हो - बहुत असरदार हो सकता है।

बुजुर्गों के लिए: एक दिन में मल्टी-जॉइंट स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और थोड़ी कार्डियो, फिटनेस, ताकत और ऑक्सीजन क्षमता, सभी में वृद्धि कर सकती है।

नियमित व्यायाम सबसे अच्छा है, लेकिन एक दिन का सत्र भी बहुत लाभकारी है। यह शुरुआत करने वालों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक हो सकता है।

ध्यान रखें:

  • यह डॉक्टर या फिटनेस ट्रेनर की सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है या आप बिल्कुल नए हैं, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • अत्यधिक तीव्र व्यायाम से चोट या थकावट हो सकती है—धीरे-धीरे शुरुआत करें।
  • एक दिन का सत्र पर्याप्त है, लेकिन यदि संभव हो तो धीरे-धीरे सप्ताह में दो दिन तक बढ़ाना बेहतर रहेगा।

यदि आप व्यस्त जीवन में फिटनेस को स्थान देना चाहते हैं, तो सप्ताह में एक दिन वर्कआउट करना एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका है। यह आपके स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, चाहे समय कम ही क्यों न हो - बस सत्र को समझदारी से चुनें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।