8 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘एक गांव, एक खेती’: रासायनिक खाद छोड़ जैविक खेती से संवर रही गांवों की तकदीर और मिट्टी की सेहत!

Organic Farming In India : 'एक गांव, एक खेती' की पहल ने जैविक खेती के जरिए किसानों की जिंदगी बदल दी है। जानिए कैसे पीकेवीवाई (PKVY) योजना और स्थानीय प्रयासों से मिट्टी की सेहत सुधर रही है और आय बढ़ रही है।
3 min read
Google source verification
One Village One Farming Concept

One Village One Farming Concept

एक छोटे से गांव से शुरू हुई जैविक खेती की पहल ने अब पूरे क्षेत्र में एक नई राह खोल दी है। जब खेतों में रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक तरीकों से उर्वरता लौटने लगी, तो मिट्टी ने भी मुस्कुराकर जवाब दिया। यह कहानी उन किसानों और ग्रामीणों की है, जिन्होंने मिलकर ‘एक गांव, एक खेती’ की दिशा में कदम बढ़ाया और बदलाव की मिसाल बने।

सपनों को जमीन से जोड़ने का पहला कदम

सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 2015‑16 में ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) शुरू की, जिसमें किसानों को क्लस्टर बनाकर रासायनिक मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। फरवरी 2025 तक इस योजना के तहत लगभग 15 लाख हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के अंतर्गत आ चुकी थी, 52,289 क्लस्टर बने और 25.30 लाख किसान इससे लाभान्वित हुए। यह योजना अब प्रशिक्षण, प्रमाणन और बाजार से जोड़ने का एक मजबूत ढांचा बन चुकी है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति’ (BPKP) को भी PKVY के अंतर्गत 2019‑20 से शामिल किया गया है। इसके अलावा, उत्तर‑पूर्वी राज्यों में जैविक खेती की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने के लिए ‘मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट’ (MOVCDNER) योजना भी लागू है।

सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘जैविक खेती पोर्टल’ भी लॉन्च किया है, जिससे किसान सीधे अपने जैविक उत्पाद बेच सकते हैं, और इसमें किसान, समूह, खरीदार और इनपुट सप्लायर सभी जुड़ सकते हैं।

मिट्टी की सेहत और फसल की मजबूती

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत चलने वाले ‘ऑल इंडिया नेटवर्क प्रोग्राम ऑन ऑर्गेनिक फार्मिंग’ (AINP‑OF) ने 16 राज्यों में 20 केंद्रों के माध्यम से 76 फसल प्रणालियों के लिए जैविक खेती के पैकेज तैयार किए हैं। इन प्रयोगों से मिट्टी के रासायनिक, भौतिक और जैविक गुणों में सुधार और फसलों की मौसम‑सहिष्णुता बढ़ने जैसे सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

‘गोधन न्याय योजना’ जैसी राज्य‑स्तरीय पहलें भी जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 2020 में इस योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य गाय पालन, जैविक खेती और ग्रामीण रोजगार को जोड़ना था।

एक गांव, एक खेती: मॉडल गांवों की कहानी

देश में कई गांवों ने ‘एक गांव, एक खेती’ की दिशा में कदम बढ़ाया है। जम्मू‑कश्मीर के राजौरी जिले के मेहरा गांव में 50 से अधिक परिवारों ने पूरी तरह से जैविक खेती अपनाई है। शिक्षित युवाओं ने नौकरी की कमी के चलते यह पहल शुरू की, जिससे गांव जैविक सब्जियों के लिए प्रसिद्ध हुआ और एक मॉडल बनकर उभरा।

हरियाणा के करनाल जिले के नसीरपुर गांव में जगत राम नामक किसान ने प्राकृतिक खेती अपनाई है। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत और नीम तेल जैसे जैविक उत्पाद तैयार कर उपयोग किए, और करीब 125 तरह की फसलें उगाईं।

राजस्थान के एक गांव में भंवरलाल यादव ने गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के अध्ययन भ्रमण से प्रेरणा लेकर 2012‑13 में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन शुरू किया। छह क्यारियों में गोबर और लाल रंग के केंचुए डालकर तीन महीने में 120 क्विंटल जैविक खाद तैयार होती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत लगभग तीन वर्षों तक नहीं पड़ी।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के निक्कुम गांव में महिलाओं ने ‘मां भवानी जैविक उत्पाद समूह’ बनाकर जैविक खाद, कीटनाशक और अन्य उत्पाद तैयार किए। राष्ट्रीय प्राकृतिक मिशन के तहत स्थापित जैविक संसाधन केंद्र से उनकी आय दोगुनी हुई और मिट्टी की उर्वरता में सुधार आया।

क्या सीख मिलती है इस पहल से?

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जब गांव‑स्तर पर सामूहिक रूप से जैविक खेती अपनाई जाती है, तो मिट्टी की सेहत, फसल की गुणवत्ता और किसानों की आमदनी में सुधार होता है। सरकारी योजनाएं जैसे PKVY, MOVCDNER और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैविक खेती को तकनीकी, वित्तीय और बाजार‑सहायता प्रदान करते हैं। साथ ही, स्थानीय पहलेंचाहे वह वर्मी कम्पोस्ट हो, महिलाओं का समूह हो या युवाओं की प्रेरणा वास्तविक बदलाव की नींव हैं।

सरपंच और पंचायतों को चाहिए कि वे ग्राम स्तर पर जैविक खेती को अपनाने के लिए प्रस्ताव पास करें, PGS‑India प्रमाणन प्रक्रिया अपनाएं और किसानों को प्रशिक्षण व बाजार से जोड़ें। ‘एक गांव, एक खेती’ की दिशा में कदम बढ़ाकर न केवल मिट्टी को बचाया जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और लाभदायक खेती सुनिश्चित की जा सकती है।
यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण भारत की है। जहां मिट्टी, किसान और समुदाय मिलकर एक नई, जैविक दिशा की ओर बढ़ रहे हैं।