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ओंकारेश्वर में ओमकार पर्वत पर तेंदुओं का आतंक, आश्रम से पालतू कुत्ते को बनाया शिकार

जंजीर से बंधे कुत्ते का आधा शव मिला, कुत्ते के चार शावक भी लापता -रात में चार तेंदुए और दो शावक दिखाई देने का दावा, लोगों में दहशत
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खंडवा

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Manish Arora

Aug 08, 2026

Omkareshwar Leopard Attack

ओंकारेश्वर. आश्रम संचालक के अनुसार चार तेंदुए थे।

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में ओमकार पर्वत क्षेत्र में तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे आश्रमों और आसपास के रहवासी क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात हरिओम आश्रम में तेंदुओं के झुंड ने एक पालतू कुत्ते का शिकार कर लिया। जंजीर से बंधे कुत्ते को तेंदुए आधा काटकर ले गए, जबकि आश्रम में मौजूद चार छोटे पिल्ले भी लापता हो गए हैं।

आश्रम के बाहर बंधे कुत्ते और पिल्लों का शिकार

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में हरिओम आश्रम के संचालक एवं नगर परिषद ओंकारेश्वर के ब्रांड एंबेसडर तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत शिवगिरी महाराज ने बताया कि आश्रम का पालतू कुत्ता प्रतिदिन की तरह कुटिया के बाहर जंजीर से बंधा हुआ था और पास में उसके चार पिल्ले भी थे। रात करीब 1 बजे आहट सुनाई देने पर जब वे बाहर निकले तो चार तेंदुए और उनके दो शावकों को जाते हुए देखा। मौके पर पहुंचने पर कुत्ते का आधा शव पड़ा मिला, जबकि चारों पिल्ले गायब थे। उनका अनुमान है कि तेंदुए पिल्लों को भी उठाकर ले गए। जंजीर से बंधे होने के कारण कुत्ते का आधा हिस्सा वहीं छूट गया।

पिछले महीने दो बकरियों का शिकार किया था

गौरतलब है कि इससे पहले 12-13 जुलाई की रात संगम क्षेत्र में भी तेंदुए ने महेश और शांतिलाल की दो बकरियों का शिकार किया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से ओमकार पर्वत क्षेत्र में रहने वाले संतों, आश्रम संचालकों और स्थानीय लोगों में भय का वातावरण है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने, तेंदुओं की निगरानी करने तथा आश्रमों और आबादी वाले क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

तेंदुए और मानव संघर्ष : कारण व बचाव

तेंदुओं का रहवासी इलाकों में आना उनके प्राकृतिक अवास के सिकुडऩे और भोजन की तलाश का परिणाम है। पालतू पशु उनके लिए आसान शिकार होते हैं। ऐसे में निवासियों को अपने पशुओं को सुरक्षित बाड़ों में रखना चाहिए और रात में अकेले बाहर निकलने से बचना चाहिए। वन विभाग को भी ऐसे क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सतर्क करना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।