
खंडवा : छात्र संघ चुनाव की आहट से कॉलेजों में बढ़ी रौनक, प्रतीकात्मक फोटो एआई
कॉलेजों में छात्र संघ के चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग के कैलेंडर में छात्र संगठन गठित करने सितंबर माह में डेडलाइन है। लेकिन चुनाव को लेकर कॉलेजों में अभी आदेश का इंतजार
करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की संभावनाओं ने कॉलेज परिसर में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव को लेकर छात्र-छात्राओं और पूर्व छात्र नेताओं के साथ ही शिक्षाविदों में उत्साह है। सभी का मानना है कि छात्रसंघ केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी सीखने का माध्यम है।
पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि चुनाव से युवाओं को संगठन, संवाद और निर्णय लेने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। वहीं छात्रों की अपेक्षा है कि नया छात्रसंघ केवल चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र में उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाए। कॉलेज में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, नियमित कक्षाएं, पेयजल, स्वच्छता, पुस्तकालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं छात्रसंघ की प्राथमिकता बनें।
पूर्व प्राचार्य जीएस त्रिवेदी का भी मानना है कि छात्र राजनीति सत्ता नहीं बल्कि छात्रों में समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होना चाहिए। छात्रसंघ सकारात्मक सोच और जनहित के मुद्दों पर काम करेगा तो यही मंच भविष्य का नेतृत्व तैयार करेगा। चुनाव की संभावनाओं के बीच कॉलेज परिसर में छात्रों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं कि अब उन्हें अपनी बात रखने और प्रशासन तक समस्याएं प्रभावी ढंग से पहुंचाने का मजबूत मंच मिलेगा।
वर्ष 2017 में कॉलेजों में अंतिम बार हुआ क्लास रिप्रेजेंटेटिव ( सीआर) प्रक्रिया से चुनाव हुआ था। इसके बाद से अब तक छात्र संघ चुनाव नहीं हुए। नौ साल बाद छात्र संघ के चुनाव की आहट से कॉलेजों में हलचल पैदा हो गई है। कॉलेज प्रबंधन शासन के आदेश का इंतजार कर रहा है। एसएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ सोमपाल सिंह का कहना है कि शासन के आदेश का इंतजार है।
शुभम पटेल, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्र संघ, एसएन कॉलेज... छात्र संघ चुनाव का फैसला स्वागत योग्य है। वर्ष 2017 में क्लास रिप्रेजेंटेटिव के रूप में चुना गया था। कॉलेज स्तर पर उपाध्यक्ष बने थे। वर्ष 2018 में टाल दिया गया था। अब नए फैसले से युवाओं में नई उम्मीद जगी है।
कृष्णा शिंदे, पूर्व अध्यक्ष, वर्तमान नगर मंत्री...छात्रा संघ चुनाव में युवाओं को सीखने का मौका मिलता है। सामाजिक स्तर पर भी अच्छा कार्य करने की एक अच्छी सोच विकसित होती है। छात्र संघ चुनाव में महिलाओं की हिस्सेदारी होनी चाहिए।
चंदन राजपूत, एसयूएनआई, जिला अध्यक्षा...वर्ष 2017 के बाद छात्र संघ चुनाव नहीं हुए। उम्र निकल गई। अब छात्र संघ का चुनाव होना चाहिए। इससे नए युवाओं को मौका मिलेगा। छात्र संघ चुनाव से उनमें नेतृत्व क्षमता के साथ देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी।
छात्र संघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। छात्र राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि छात्र हित, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी होना चाहिए। चुनाव के माध्यम से छात्रों में संवाद, संगठन, निर्णय लेने की क्षमता और जनसेवा की भावना विकसित होती है। आज जरूरत इस बात की है कि छात्र राजनीति सकारात्मक सोच, रचनात्मक कार्यों और जनहित के मुद्दों पर आधारित हो। यदि छात्र इसे केवल मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश का माध्यम मानेंगे तो इसका मूल उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा। छात्र राजनीति ऐसी पाठशाला बने, जहां से जिम्मेदार, संवेदनशील और समाज के प्रति समर्पित नेतृत्व तैयार हो।
प्रश्न : छात्रसंघ चुनाव क्यों जरूरी हैं ? जवाब : चुनाव होने से छात्रों को अपनी बात रखने के लिए मजबूत मंच मिलता है । और कॉलेज प्रशासन भी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देता है।
राहुल दिनकर, एमए, राजनीति विज्ञान
प्रश्न : क्या आप छात्रसंघ चुनाव में मतदान करेंगे ? जवाब : हां, क्योंकि इससे हमें ऐसा प्रतिनिधि चुनने का मौका मिलेगा जो छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचा सके।
सुभाष निंगवाल, एमए, हिंदी साहित्य
प्रश्न: छात्रसंघ की पहली प्राथमिकता क्या होनी चाहिए ? जवाब : कैंपस में मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता, पेयजल और नियमित कक्षाओं पर ध्यान देना चाहिए।
प्रीति सेन, एमए, हिंदी साहित्य
प्रश्न: नए छात्रसंघ से आपकी क्या उम्मीद है ? जवाब : छात्रसंघ केवल चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे सत्र में नियमित रूप से छात्रों की समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास करे।
हरिओम मासरे, एमए, हिंदी साहित्य
Updated on:
07 Aug 2026 11:59 am
Published on:
07 Aug 2026 11:59 am
