
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर छात्रों ने किया डांस (Photo-Patrika)
Dharmendra Pradhan Resignation: देशभर के कई राज्यों में नीट यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में चल रहे आंदोलनों के बीच शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बता दें कि प्रदर्शन की शुरुआत दिल्ली से हुई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में जंतर-मंतर पर 20 जून से प्रदर्शन चल रहा था। सोनम वांगचुक भी 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे थे। जैसे ही उनके इस्तीफे की खबर सामने आई, जयपुर में छात्रों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। कई छात्र खुशी में डांस करते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है। वहीं, छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जयपुर में छात्रों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। कुछ छात्र खुशी में एक-दूसरे के साथ डांस करते दिखाई दिए।
देश के Genz ने दिखा दिया कि अगर अपने हक की बात हो तो वह सोती हुई सरकार की नींद उड़ा सकता है और Genz आंदोलन किसी दिन इतिहास की किताबों में जरूर पढ़ाया जाएगा।
- गौरव कुमार, वैशाली नगर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखाता है कि युवा यदि लगातार किसी सही मुद्दे पर डटे रहें, तो सरकार को मानना ही पड़ता है। यदि सरकार शुरुआत में ही युवाओं से जाकर बात कर लेती, तो शायद उन्हें इस्तीफा न देना पड़ता। फिलहाल उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा और निष्पक्ष तरीके से परीक्षाएं आयोजित होंगी।
- मुस्कान यादव, मालवीय नगर
इस इस्तीफे से सिस्टम बदलने वाला नहीं है, लेकिन यह बदलाव की ओर एक प्रमुख कदम जरूर है। यह सिस्टम की जवाबदेही की शुरुआत है। आज भले ही यह कोई बड़ी बात न लगे लेकिन देश के युवाओं के भविष्य के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
- काव्या वर्मा, बजाज नगर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी था, और 25 जुलाई को यह मिला भी… लेकिन सच कहूं तो यह पहले ही हो जाना चाहिए था। समस्या यह है कि किसी भी सरकार को राजनीतिक समीकरण बैठाने में समय लग जाता है, और इसी देरी की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ती है। जरा सोचो किसी भी परीक्षा में एक न्यूनतम मापदंड तय होता है। अगर कोई विद्यार्थी उस मापदंड को पार नहीं करता, तो वह पास नहीं माना जाता, चाहे उसकी मंशा या मेहनत कुछ भी रही हो। यही सिद्धांत हर उस व्यक्ति पर भी लागू होना चाहिए जो किसी सत्ता या जिम्मेदारी के पद पर बैठा है। अगर कोई बार-बार अपने कर्तव्यों को निभाने में असफल हो रहा है, तो सवाल उठना लाजमी है… वह उस कुर्सी पर बना क्यों रहे?
- मनस्वी गोयल, झोटवाड़ा
शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा देकर बहुत सही किया लेकिन बात सिर्फ उनके इस्तीफे की नहीं थी। मेन मुद्दा तो ये है कि एग्जाम सिस्टम इम्प्रूव हो, बिना किसी भेदभाव के फेयर जांच हो और स्टूडेंट्स का फ्यूचर सेफ रहे। जब तक ये मांगें नहीं मानी जातीं, हम यही मानेंगे कि ये इस्तीफा महज एक फॉर्मेलिटी है। यह कदम स्टूडेंट्स नहीं कॉकरोचेज को उनके अधिकार,आंदोलन और लक्ष्य से भटकाने की एक नाकाम कोशिश है।
- नीरज शर्मा, वैशाली नगर
Updated on:
25 Jul 2026, 6:06 PM IST
Published on:
25 Jul 2026, 4:49 PM IST
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