20 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रोजगार : महिलाओं की दो साल से भोपाल में अटकी 1.90 करोड़ की गाढ़ी कमाई

राज्य शिक्षा केंद्र और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह की तीन हजार महिलाओं ने स्कूलों में छह करोड़ रुपए कीमत की स्कूल ड्रेस बच्चों को सिलाई और वितरण की जिम्मेदारी गई थी। महिलाओं ने ड्रेस वितरण किया। दो साल बीतने के बाद भी अभी राज्य शिक्षा केंद्र व एनआरएलएम के बीच उनकी गाढ़ी कमाई फंसी है।
2 min read
Google source verification

खंडवा

image

Rajesh Patel

Sep 20, 2026

school uniform

school uniform

राज्य शिक्षा केंद्र और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह की तीन हजार महिलाओं ने स्कूलों में छह करोड़ रुपए कीमत की स्कूल ड्रेस बच्चों को सिलाई और वितरण की जिम्मेदारी गई थी। महिलाओं ने ड्रेस वितरण किया। दो साल बीतने के बाद भी अभी राज्य शिक्षा केंद्र व एनआरएलएम के बीच उनकी गाढ़ी कमाई फंसी है।

तीन हजार महिलाओं ने तैयार किया स्कूल ड्रेस

शासकीय स्कूलों के बच्चों को स्कूली ड्रेस की सिलाई करने वाली तीन हजार महिलाओं को उनकी मेहनत की पूरी राशि अब तक नहीं मिली है। राज्य शिक्षा केंद्र और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ( एनआरएलएम ) की योजना के तहत जिले में 100 स्व-सहायता समूहों की करीब 3 हजार महिलाओं ने स्कूल ड्रेस तैयार की थी। दावा है कि करीब छह करोड़ रुपए की ड्रेस तैयार कर स्कूलों में वितरित की गई। लेकिन दो साल बाद भी समूहों का 1.90 करोड़ रुपए का भुगतान अटका है। महिलाओं ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई। हर बार भुगतान जल्द होने का आश्वासन मिला। अब महिलाओं को अपने मेहनत के पैसे का इंतजार है।

स्कूलों में सिलाई के बाद दो लाख ड्रेस वितरण की

एनआरएलएम के स्व-सहायता समूहों को वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक स्कूलों के बच्चों की ड्रेस तैयार करने और वितरण की जिम्मेदारी दी गई थी। समूहों ने बाजार से कपड़ा खरीदा और महिलाओं ने सिलाई की। इसके बाद ड्रेस स्कूलों तक पहुंचाई गई। एनआरएलएम के अनुसार तत्कालीन समय एक ड्रेस की कीमत 300 रुपए निर्धारित थी। यदि छह करोड़ रुपए की ड्रेस तैयार होने का आंकड़ा लिया जाए तो करीब 2 लाख ड्रेस बनती हैं। प्रति बच्चे दो ड्रेस के हिसाब से यह करीब 1 लाख बच्चों के लिए ड्रेस होती है। इस काम में जिले के 100 से अधिक समूहों की करीब 3 हजार महिलाओं के जुडऩे की जानकारी सामने आई है।

भुगतान के लिए लगा रहीं चक्कर

समूहों की सुष्मा, रानी समेत कई अन्य महिलाओं का कहना है कि ड्रेस तैयार कर वितरण का काम समय पर पूरा किया गया। इसके बाद भुगतान नहीं हो रहा है। अधिकारियों से बार-बार कहने पर सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। दो साल से आश्वासन दिया जा रहा है। अभी तक भुगतान नहीं हो सका है।

ऑनलाइन होगी भुगतान प्रक्रिया

एनआरएलएम अधिकारियों के अनुसार राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। रिपोर्ट भेजी गई है। अब भुगतान की प्रक्रिया राज्य स्तर से ऑनलाइन होगी।

इनका कहना : पीएस सोलंकी, डीपीसी, खंडवा

राज्य शिक्षा केंद्र और एनआरएलएम के बीच शासन स्तर का मामला है। राज्य शिक्षा केंद्र ने तत्कालीन समय सत्यापन कराया था। इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। भुगतान की प्रक्रिया राज्य स्तर पर ऑनलाइन होगी।