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प्याज की खेती से अलवर के किसान कैसे कर रहे मोटी कमाई, 6 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा उत्पादन

अलवर के किसान अब खुद बीज तैयार कर लाखों कमा रहे हैं और सिंचाई तकनीक से फसल की उपज को आसमान छू रहे हैं — जानिए कैसे!
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Ravi Gupta

Sep 15, 2026

onion farming in alwar

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

अलवर जिले में प्याज की खेती में हालिया बदलाव ने किसानों की आमदनी के रास्ते बदल दिए हैं। खासकर बीज उत्पादन और सिंचाई तकनीकों में नवाचार ने पारंपरिक खेती को लाभदायक विकल्प में बदला है। यह अलवर के किसानों के लिए रेड गोल्ड साबित हो रही है।

बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता

अलवर के किसान अब महाराष्ट्र और गुजरात से प्याज के बीज मंगवाने की बजाय खुद खेतों में बीज तैयार कर रहे हैं। किशनगढ़बास तहसील के जाटका गांव के किसान सुधीर कुमार ने ‘पचगंगा बादशाह’ किस्म का बीज तैयार कर 1 बीघा में लाखों रुपये तक की कमाई की है। यह बीज राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात तक बिक रहा है। इससे न केवल लागत बची है, बल्कि गुणवत्ता और मांग दोनों बढ़ी हैं।

माइक्रो इरिगेशन से लागत और पानी की बचत

अलवर में ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से पानी की बचत और उपज में वृद्धि दोनों हुई है। एक अध्ययन में बताया गया कि खरीफ प्याज में ड्रिप सिंचाई से पानी की खपत 40% तक कम हुई और उपज 50% तक बढ़ी। यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है।

खेती के क्षेत्र में कमी का खतरा

हालांकि, इस साल अलवर में प्याज की बुवाई का क्षेत्र लगभग 20% घटने का खतरा है। पिछले वर्ष लगभग 18 हजार हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, जबकि इस बार केवल लगभग 11 हजार हेक्टेयर ही दर्ज है। महंगे बीज और बढ़ती मजदूरी लागत का असर स्पष्ट है।

मंडी भाव और उत्पादन का हाल

पिछले साल अलवर में प्याज की बम्पर पैदावार हुई थी—उत्पादन लगभग 6 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। मंडियों में रोजाना 25–30 हजार कट्टे प्याज की आवक होती रही। भाव 35–55 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिला। लेकिन कुछ समय बाद भाव गिरने से किसान परेशान भी हुए; कुछ ने फसल नष्ट कर दी क्योंकि लागत भी नहीं निकल पा रही थी।

मशीनरी और जैविक उर्वरक का उपयोग

अलवर के किसान अब खेती में मशीनरी का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। एक अध्ययन में बताया गया कि 90% से अधिक किसान मैकेनाइजेशन अपनाते हैं, जबकि जैविक खाद का उपयोग भी व्यापक है। सुधीर कुमार जैविक खाद—गोबर खाद, पोटाश, जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों—का उपयोग करके बीज की गुणवत्ता बढ़ा रहे हैं।

अलवर में अगस्त 2024 में ‘समृद्ध किसान उत्सव’ आयोजित हुआ, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग ने मिलकर प्याज फसल में रोग-कीट प्रबंधन, ट्रैक्टर नवाचार और अन्य तकनीकों पर किसानों को जानकारी दी। इससे किसानों में तकनीकी अपनाने की जागरूकता बढ़ी।

अलवर के किसान अब बीज उत्पादन, ड्रिप सिंचाई और जैविक उर्वरक जैसे तरीकों से लागत घटाकर मुनाफा बढ़ा सकते हैं। लेकिन इस साल बुवाई में गिरावट चिंता का विषय है। किसान मंडी भाव और लागत का ध्यान रखते हुए, बीज उत्पादन और सिंचाई तकनीकों को अपनाएं। मंडी भाव के लिए ताजा जानकारी नजदीकी मंडी या eNAM पोर्टल से लें। बड़े निवेश से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना फायदेमंद रहेगा।

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