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पीएम सूर्य घर योजना: क्या सच में लाखों घरों का बिजली बिल जीरो हुआ? आवेदन से इंस्टॉलेशन तक की पूरी कहानी

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana : PM सूर्य घर योजना से क्या सच में बिजली बिल जीरो हो रहा है? जानें आवेदन, इंस्टॉलेशन के आंकड़े, सब्सिडी, कमाई और राज्यों के प्रदर्शन से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।
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PM Solar

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से कितने घरों का बिजली बिल हुआ जीरो, PC- Chatgpt

प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) को फरवरी 2024 में लॉन्च किया गया था। यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी घरेलू रूफटॉप सोलर योजना मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 तक 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है, ताकि परिवार अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकें और बिजली बिल में बड़ी बचत कर सकें। योजना के तहत 2 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी और 3 किलोवाट तक की क्षमता पर अतिरिक्त सहायता दी जाती है। अधिकतम सब्सिडी करीब ₹78,000 तक पहुंचती है। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹75,021 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।

योजना को शुरू हुए ढाई साल से भी कम समय हुआ है, लेकिन यह देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत देने लगी है। हालांकि इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा हुआ है। क्या वास्तव में लाखों परिवारों का बिजली बिल जीरो हो गया है, जैसा कि अक्सर हमें सुनाई देता है?

योजना एक नजर में

बिंदुस्थिति
योजना शुरूफरवरी 2024
लक्ष्य1 करोड़ घर (FY 2026-27 तक)
कुल आवेदन77.65 लाख
कुल इंस्टॉलेशन41.94 लाख
लाभान्वित घर50.44 लाख
स्थापित क्षमता14,895 मेगावाट
जारी केंद्रीय सब्सिडी₹28,390.50 करोड़
इंस्टॉलेशन दरलगभग 54%
जीरो बिजली बिल वाले घरकरीब 19 लाख

12 अगस्त 2026 तक यह संख्या और बढ़ गई। कुल इंस्टॉलेशन करीब 43 लाख तथा लाभान्वित घरों की संख्या 51 लाख से अधिक हो चुकी थी। इससे स्पष्ट है कि योजना की रफ्तार लगातार बढ़ रही है।

क्या सच में बिजली बिल जीरो हो रहा है?

योजना के प्रचार में अक्सर कहा जाता है कि इससे बिजली बिल शून्य हो सकता है। लेकिन वास्तविक तस्वीर थोड़ी अलग है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 तक करीब 19 लाख परिवारों ने बताया कि रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया। यह संख्या बड़ी जरूर है, लेकिन कुल 50 लाख से ज्यादा लाभार्थियों की तुलना में देखें तो हर परिवार का बिल जीरो नहीं हुआ है।

असल में बिजली बिल शून्य होना कई बातों पर निर्भर करता है। यदि किसी परिवार की मासिक बिजली खपत 150 से 300 यूनिट के बीच है और उसकी छत पर पर्याप्त क्षमता का सोलर प्लांट लगा है, तो वह अपनी अधिकांश जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकता है। नेट मीटरिंग की सुविधा होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है, जिससे बिजली बिल और कम हो जाता है।

दूसरी ओर, जिन घरों में एयर कंडीशनर, मोटर, बड़े उपकरण या ज्यादा बिजली खपत होती है, वहां सोलर सिस्टम के बावजूद कुछ बिल आ सकता है। इसलिए योजना का लाभ सभी को मिलता है, लेकिन सभी का बिल शून्य नहीं होता।

सोलर से कमाई भी हो रही है

इस योजना का एक दिलचस्प पहलू यह है कि कई परिवार केवल बिजली बचा ही नहीं रहे, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 12 लाख से अधिक परिवारों ने अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर कुल ₹421 करोड़ की आय अर्जित की है। इसका मतलब है कि औसतन एक परिवार को सालाना लगभग ₹3,500 की अतिरिक्त आय मिली है। यह मॉडल भविष्य में घरेलू उपभोक्ताओं को 'बिजली उपभोक्ता' से 'बिजली उत्पादक' बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आवेदन तो लाखों, लेकिन इंस्टॉलेशन कितना?

योजना को लोगों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। अगस्त 2026 तक 77.65 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके थे। लेकिन सभी आवेदनों को अभी इंस्टॉलेशन में नहीं बदला जा सका है।

श्रेणीसंख्या
कुल आवेदन77.65 लाख
पूर्ण इंस्टॉलेशन41.94 लाख
इंस्टॉलेशन दरलगभग 54%

यानी हर 100 आवेदनों में लगभग 54 घरों में ही सोलर सिस्टम लग पाया है।

हालांकि अच्छी बात यह है कि हाल के महीनों में इंस्टॉलेशन की गति काफी तेज हुई है। जुलाई 2026 में अकेले 5.06 लाख नए घर योजना से जुड़े, जो योजना शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है।

अक्टूबर 2025 में जहां प्रतिदिन औसतन 5,038 इंस्टॉलेशन हो रहे थे, वहीं जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 16,328 प्रतिदिन पहुंच गई। यानी करीब सवा तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद डिस्कॉम की मंजूरी, नेट मीटरिंग, तकनीकी निरीक्षण और उपकरणों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

किन राज्यों में सबसे ज्यादा आवेदन आए?

योजना के प्रति सबसे ज्यादा उत्साह महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात में दिखाई दिया। महाराष्ट्र आवेदन के मामले में देश में पहले स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश और गुजरात भी लगभग बराबरी पर दिखाई देते हैं।

राज्यआवेदन
महाराष्ट्र14.60 लाख
Uttar Pradesh11.84 लाख
गुजरात11.78 लाख
आंध्र प्रदेश9.13 लाख

इंस्टॉलेशन में कौन आगे निकला?

आवेदन ज्यादा होना और जमीन पर सोलर लगना दोनों अलग बातें हैं। इंस्टॉलेशन के मामले में गुजरात सबसे आगे निकलकर सामने आया है।

राज्यइंस्टॉलेशन
गुजरात7.80–7.92 लाख
उत्तर प्रदेश7.29–7.47 लाख
महाराष्ट्र7.11–7.24 लाख
उत्तराखंड98,443
तमिलनाडु88,133
आंध्र प्रदेश3 लाख+

गुजरात की खास बात यह है कि वहां आवेदन और इंस्टॉलेशन के बीच का अंतर अपेक्षाकृत कम है। बेहतर डिस्कॉम नेटवर्क, तेज मंजूरी प्रक्रिया और वर्षों से चल रही सोलर नीतियों ने राज्य को बढ़त दिलाई है।

आंध्र प्रदेश भी हाल के महीनों में तेजी से उभरता हुआ राज्य बनकर सामने आया है और इंस्टॉलेशन के मामले में कई राज्यों को पीछे छोड़ चुका है।

किस राज्य को सबसे ज्यादा फायदा हुआ?

यदि जारी सब्सिडी, स्थापित क्षमता और लाभार्थियों के आधार पर देखा जाए तो गुजरात इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य है।

रैंकराज्यजारी सब्सिडी
1गुजरात₹5,711–5,746 करोड़
2महाराष्ट्र₹5,139–5,189 करोड़
3उत्तर प्रदेश₹4,843–4,898 करोड़
4केरल₹2,098 करोड़
5राजस्थान₹1,897 करोड़

गुजरात की सफलता के पीछे केवल अधिक आवेदन नहीं, बल्कि मजबूत कार्यान्वयन व्यवस्था भी है। राज्य में रूफटॉप सोलर को लेकर जागरूकता पहले से अधिक थी, जिसका फायदा इस योजना को मिला।

उत्तर प्रदेश की स्थिति क्या है?

उत्तर प्रदेश इस योजना के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक बनकर उभरा है। यहां लगभग 11.84 लाख आवेदन प्राप्त हुए और 7.3 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं।

इस हिसाब से राज्य की इंस्टॉलेशन दर करीब 62 प्रतिशत बैठती है, जो राष्ट्रीय औसत 54 प्रतिशत से बेहतर है। राज्य के कई जिले देश के शीर्ष सोलर जिलों में शामिल हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही तो उत्तर प्रदेश अगले कुछ वर्षों में लाभार्थियों के मामले में गुजरात को चुनौती दे सकता है।

लोगों को कितना फायदा हो रहा है?

योजना का प्रभाव केवल बिजली बिल तक सीमित नहीं है।

  • बिजली बिल में भारी कमी
  • 19 लाख घरों में शून्य बिल
  • अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई
  • लंबे समय में ऊर्जा लागत में बचत
  • पर्यावरणीय लाभ
  • कोयला आधारित बिजली की मांग कम
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी
  • स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
  • राष्ट्रीय लाभ
  • बिजली मांग का विकेंद्रीकरण
  • ग्रिड पर दबाव कम
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत

इसके अलावा Utility Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत PMAY, BPL और SC/ST परिवारों के लिए चार राज्यों में करीब 1.6 लाख इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं। अब इस मॉडल को 12 राज्यों तक विस्तार देने की मंजूरी मिल चुकी है।

योजना के तहत 1.06 लाख से अधिक सरकारी भवनों को भी सोलराइज किया जा चुका है और 2.32 लाख से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देकर सोलर क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

अभी क्या चुनौतियां हैं?

हालांकि योजना तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी सामने हैं:

  • 77.65 लाख आवेदन और 41.94 लाख इंस्टॉलेशन के बीच बड़ा अंतर
  • कई राज्यों में नेट मीटरिंग की धीमी प्रक्रिया
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
  • प्रशिक्षित तकनीशियनों और इंस्टॉलर की सीमित संख्या
  • कुछ डिस्कॉम में मंजूरी प्रक्रिया का धीमा होना