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राधा अष्टमी 2026: राधा रानी को लगाएं ये 5 भोग, अरबी से लेकर माखन मिश्री तक जानें क्या है खास

राधा अष्टमी 2026 का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में पूजा, श्रृंगार, भजन और भोग की परंपरा है। आइए जानते हैं राधा रानी को कौन-से 5 भोग प्रिय हैं।
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Adarsh Thakur

Sep 18, 2026

Radha Ashtami 2026

सांकेतिक इमेजः ChatGPT

राधा अष्टमी 2026 इस बार 19 सितंबर, शनिवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। ब्रज क्षेत्र में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन राधा रानी और श्रीकृष्ण की पूजा, श्रृंगार, भजन और विशेष भोग की परंपरा है।

राधा अष्टमी पर क्या भोग लगाएं?

राधा रानी को भोग में क्या अर्पित किया जाए, इसे लेकर अलग-अलग परिवार और वैष्णव परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है। सामान्य तौर पर ताजा और सात्विक भोजन श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाता है। इनमें कुछ चीजें विशेष रूप से प्रचलित हैं।

1. अरबी का भोग

राधा अष्टमी के भोग में अरबी का नाम सुनकर आपको हैरानी हो सकती है। ब्रज की कुछ स्थानीय परंपराओं में अरबी से बने साधारण सात्विक व्यंजन राधा रानी को अर्पित किए जाते हैं। अरबी की सब्जी या दूसरे घरेलू व्यंजन भोग की थाली में रखे जा सकते हैं। हालांकि यह परंपरा सभी परिवारों या मंदिरों में समान नहीं है।

2. खीर

खीर भी राधा रानी के भोग में शामिल की जा सकती है। दूध और चावल से बनी खीर के अलावा मखाने की खीर भी बनाई जा सकती है। घर में तैयार ताजा प्रसाद को पहले राधा रानी को अर्पित करने और इसके बाद परिवार में प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है।

3. माखन मिश्री

राधा कृष्ण की भक्ति परंपरा में माखन मिश्री का विशेष स्थान है। राधा अष्टमी पर इसे भी भोग की थाली में शामिल किया जा सकता है। यह भोग घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।

4. पंचामृत

दूध, दही, घी, शहद और चीनी से पंचामृत तैयार किया जाता है। पूजा की परंपरा के अनुसार इसे राधा रानी को अर्पित किया जा सकता है। कई घरों में पंचामृत का इस्तेमाल पूजा और अभिषेक के दौरान भी किया जाता है।

5. मालपुआ रबड़ी और फल

मालपुआ रबड़ी, फल और दूध से बनी मिठाइयां भी भोग में शामिल की जा सकती हैं। खास बात यह है कि भोग की थाली बहुत बड़ी होना जरूरी नहीं है। कुछ परंपराओं में श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विक तरीके से तैयार किया गया साधारण भोजन भी पर्याप्त माना जाता है।

भोग बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

राधा अष्टमी के भोग के लिए भोजन ताजा और सात्विक रखने की परंपरा है। मान्यता है कि भोग बनाते समय प्याज, लहसुन जैसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं करते। भोग तैयार करने से पहले रसोई और पूजा स्थल की साफ सफाई का भी ध्यान रखा जाता है।

पूजा के लिए राधा रानी और श्रीकृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा रखकर फूल, धूप, दीप और भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद आरती और भजन किए जाते हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत और पूजा की विधि अपनाना उचित माना जाता है।

19 सितंबर को होगी राधा अष्टमी

पंचांग आधारित जानकारी के अनुसार 2026 में राधा अष्टमी 19 सितंबर को है। अष्टमी तिथि 18 सितंबर दोपहर करीब 1 बजे शुरू होकर 19 सितंबर दोपहर करीब 3:26 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार मध्याह्न पूजा का समय करीब 11:01 बजे से 1:28 बजे तक बताया गया है। स्थानीय शहर के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

इस दिन बरसाना और ब्रज क्षेत्र में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। प्रशासन ने भी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, सफाई और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया है।

राधा अष्टमी का मूल भाव केवल भोग या व्रत तक सीमित नहीं है। यह राधा रानी की भक्ति, स्मरण और राधा कृष्ण प्रेम परंपरा से जुड़ा पर्व है। इसलिए भोग में कितनी चीजें हैं, इससे ज्यादा महत्व श्रद्धा और सात्विक भाव का माना जाता है।