
रेरा के नियम। (फोटोः एआई)
रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के तहत निर्माण परियोजनाओं की पंजीकरण प्रक्रिया में हाल ही कुछ बदलाव हुए हैं। यदि आप बिल्डर, होम बायर या सामान्य नागरिक हैं, तो यह जानना आपके लिए महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में।
रेरा के तहत अब कई राज्यों में पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। उदाहरण के लिए, बिहार में 1 फरवरी 2026 से एक नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू हुई है, जिसमें बिल्डर को पोर्टल पर प्रत्येक चरण पर मार्गदर्शन मिलता है और आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से जमा किए जा सकते हैं। आवेदन को खंडों में विभाजित किया गया है जैसे परियोजना की जानकारी, नक्शा, भूमि दस्तावेज, वित्तीय विवरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र ताकि आवेदन भरने में आसानी हो और कोई बाधा न आए। आवेदन पूरा होने पर ऑनलाइन सबमिशन और प्रिंटआउट भी उपलब्ध होता है।
उत्तर प्रदेश में भी रेरा ने पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव किए हैं। अब बिल्डर को पंजीकरण प्रमाणपत्र पर QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। इस कोड को स्कैन करके खरीदार सीधे परियोजना की पूरी जानकारी, भूमि, नक्शा, स्वीकृतियां और त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट देख सकते हैं। यह प्रमाणपत्र बिल्डर के कार्यालय, साइट और विज्ञापनों में भी चस्पा करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, 18 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश रेरा ने “सामान्य नियम” जारी किए, जिसमें 13 जुलाई 2026 तक हुए 12 संशोधनों को शामिल किया गया है। अब बिल्डर और एजेंट को विज्ञापनों में UP-RERA पंजीकरण नंबर, वेबसाइट, QR कोड, परियोजना के कलेक्शन अकाउंट की जानकारी, लॉन्च तिथि और एजेंट का पंजीकरण नंबर स्पष्ट रूप से देना होगा। साथ ही, हर तीन महीने में त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (QPR) संबंधित विशेषज्ञों के प्रमाणपत्र के साथ जमा करनी होगी। संकट में फंसी परियोजना की जिम्मेदारी किसी अन्य प्रमोटर को सौंपने या पंजीकरण बढ़ाने/वापस लेने की स्थिति भी साफ की गई है।
इन बदलावों का अर्थ है कि अब रेरा पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और जवाबदेह हो गई है। बिल्डर और प्रमोटर के लिए दस्तावेज जमा करना आसान हुआ है और खरीदारों को परियोजना की जानकारी तक पहुंचने में सुविधा हुई है।
| राज्य/क्षेत्र | बदलाव का सारांश |
|---|---|
| बिहार | ऑनलाइन आवेदन खंडों में विभाजित, मार्गदर्शन, दस्तावेज जमा आसान, 1 फरवरी 2026 से लागू |
| उत्तर प्रदेश | पंजीकरण प्रमाणपत्र पर QR कोड, विज्ञापन में जानकारी अनिवार्य, QPR प्रमाणपत्र सहित त्रैमासिक रिपोर्टिंग |
| उत्तर प्रदेश (सामान्य नियम) | विज्ञापन में रेरा नंबर, वेबसाइट, QR कोड, कलेक्शन अकाउंट, लॉन्च तिथि, एजेंट नंबर; संकटग्रस्त परियोजना के लिए स्पष्ट नियम |
पहला, बिल्डरों के लिए प्रक्रिया आसान हुई है। ऑनलाइन मार्गदर्शन, दस्तावेजों का खंडबद्ध जमा और पोर्टल पर स्पष्ट चेकलिस्ट से आवेदन त्रुटिरहित होता है। दूसरा, खरीदारों को परियोजना की जानकारी सीधे मोबाइल पर QR कोड के माध्यम से मिलती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है। तीसरा, त्रैमासिक रिपोर्टिंग और विज्ञापन में स्पष्ट जानकारी से खरीदारों को विश्वास मिलता है और धोखाधड़ी की संभावना कम होती है।
हालांकि, इन सुधारों के बावजूद कुछ सावधानियां आवश्यक हैं। बिल्डर को सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी दस्तावेज सही और समय पर जमा हों। खरीदार को चाहिए कि QR कोड और विज्ञापन में दी गई जानकारी स्वयं स्कैन कर जांचें। त्रैमासिक रिपोर्ट में प्रमाणपत्र समय पर जमा करें। यदि कोई प्रक्रिया समझ में न आए, तो रेरा की हेल्पलाइन या वेबसाइट से मार्गदर्शन लें।
(डिस्क्लेमरः यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। किसी विशेष मामले में, प्रमाणित रेरा सलाहकार या वकील से संपर्क करें।)
Updated on:
30 Aug 2026 09:12 pm
Published on:
30 Aug 2026 09:12 pm
