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टैक्स-सेवर FD : आपके निवेश को बनाएगी सुरक्षित और देगी बेहतरीन रिटर्न!

क्या आप जानते हैं कि आपकी बचत अब टैक्स बचाने के साथ-साथ बेहतर रिटर्न भी दे सकती है? नई टैक्स-सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीमें आपके लिए एक सुनहरा मौका लेकर आई हैं — जानिए कैसे!
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Ravi Gupta

Sep 15, 2026

new FD scheme

प्रतीकात्मक तस्वीरें | Gemini

बचत और निवेश की दुनिया में टैक्स बचत और सुरक्षित रिटर्न की चाह रखने वालों के लिए नई फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीमें खास आकर्षण बनकर उभरी हैं। विशेष रूप से टैक्स-सेवर एफडी (Tax-Saving FD) विकल्प, जो न केवल ब्याज प्रदान करते हैं, बल्कि आयकर में छूट भी देते हैं। आइए समझते हैं कि ये स्कीमें क्या हैं, किस प्रकार काम करती हैं, और आपके लिए कैसे लाभकारी हो सकती हैं।

नई टैक्स-सेवर एफडी योजनाओं की खास बातें

टैक्स-सेवर एफडी एक 5 वर्ष की लॉक-इन अवधि वाली जमा योजना होती है, जिसमें निवेशक सेक्शन 80सी के तहत प्रति वर्ष ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। ये योजनाएं आमतौर पर बैंकों द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और वरिष्ठ नागरिकों को कुछ अधिक ब्याज दर मिलती है। उदाहरण के लिए, एसबीआई टैक्स-सेवर एफडी पर सामान्य नागरिकों को 6.05% और वरिष्ठ नागरिकों को 7.05% वार्षिक ब्याज दर मिल रही है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा में यह दर 6.30% (सामान्य) और 6.90% (वरिष्ठ नागरिक) है।

ब्याज दरों में विविधता निजी और छोटे वित्तीय संस्थानों में ब्याज दरें और भी आकर्षक हैं। उदाहरण के लिए, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक सामान्य नागरिकों को 7.25%–7.90% और वरिष्ठ नागरिकों को 7.40%–8.05% तक की दरें दे रहा है। अन्य बैंक जैसे एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक आदि भी 6%–7.5% के बीच दरें दे रहे हैं।

पोस्ट ऑफिस और एनएससी से तुलना

पोस्ट ऑफिस की 5 वर्ष की एफडी दरें लगभग 7.50% तक हैं, जो टैक्स-सेवर एफडी की दरों के मुकाबले अच्छी हैं, लेकिन इनमें टैक्स छूट नहीं मिलती। वहीं, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) भी 5 वर्ष की अवधि के साथ सेक्शन 80सी में शामिल होता है, लेकिन ब्याज की कंपाउंडिंग और संरचना टैक्स-सेवर एफडी से अलग होती है।

टैक्स नियम और टीडीएस टैक्स-सेवर

एफडी पर मिलने वाला ब्याज 'अन्य स्रोत से आय' (Income from Other Sources) के तहत कर योग्य होता है, और इस पर टीडीएस लागू हो सकता है। अप्रैल 2026 से फॉर्म 121 (जो फॉर्म 15जी/15एच की जगह ले चुका है) जमा कर, यदि आपकी अनुमानित आय कर योग्य सीमा से कम है, तो टीडीएस से बचा जा सकता है।

निवेशकों के लिए व्यावहारिक सुझाव यदि आप टैक्स बचत के साथ सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं, तो टैक्स-सेवर एफडी एक सरल और भरोसेमंद विकल्प है। 5 वर्ष की लॉक-इन अवधि और सेक्शन 80सी के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट इसे विशेष बनाती है। वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर दरें मिलती हैं, इसलिए यदि आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो यह और भी लाभकारी हो सकता है।

हालांकि, यदि आप अधिक तरलता चाहते हैं या लॉक-इन से बचना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस एफडी या अन्य छोटे वित्तीय संस्थानों की सामान्य एफडी विकल्पों पर विचार करें। लेकिन इनमें टैक्स-सेवर एफडी जैसी टैक्स बचत का लाभ नहीं मिलेगा।

जोखिम और सावधानी टैक्स-सेवर एफडी में लॉक-इन अवधि के कारण आप बीच में पैसा नहीं निकाल सकते। इसलिए, आपातकालीन फंड के लिए अलग से लिक्विड निवेश रखना आवश्यक है। साथ ही, टीडीएस और टैक्स नियमों को समझकर ही निवेश करें — फॉर्म 121 जमा करना न भूलें।

निवेश का निर्णय लेने से पहले, अपने बैंक या वित्तीय सलाहकार से वर्तमान ब्याज दरें, टीडीएस नियम और टैक्स छूट की पुष्टि अवश्य कर लें। यदि आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो विशेष दरों के लिए बैंक से जानकारी लें। और यदि आप तरलता और टैक्स बचत दोनों चाहते हैं, तो टैक्स-सेवर एफडी के साथ अन्य लिक्विड विकल्पों का संतुलन बनाएं।

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