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नेपाल में आई बाढ़ से 1,000 से अधिक मौतें; 17 हजार बच्चों पर संकट, पूर्व भारतीय जज भी लापता

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में भयंकर तबाही हुई है और करीब 17 हजार बच्चे आपदा से प्रभावित हुए हैं। इस बाढ़ और मलबे से मरने वालों की संख्या 1000 से अधिक हो गई है। इसके साथ ही हजारों लोग अब भी लापता हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 01, 2026

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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ में तबाही (फोटो सोर्स- Chatgpt)

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे ने मानवीय संकट को लगातार गंभीर बना दिया है। खासतौर पर बच्चों की स्थिति चिंताजनक है। UNICEF के मुताबिक रासुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में कम से कम 17 हजार बच्चे प्रभावित हुए हैं, जिन्हें तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत है। इस आपदा में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं।

विनाशकारी बाढ़ में 1000 से अधिक मौतें


नेपाल में आई बाढ़ से करीब 1000 से अधिक लोगों की मौत हुई है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 1,050 पहुंच गया है। इसके साथ ही करीब 4,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 11 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है।

18 स्कूल तबाह, 10 हजार बच्चों की पढ़ाई ठप


UNICEF के अनुसार, बाढ़ में 18 स्कूल पूरी तरह नष्ट और 20 अन्य क्षतिग्रस्त हुए हैं। करीब 10 हजार स्कूली बच्चों को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए तत्काल सहायता की आवश्यकता है। प्रभावित इलाकों में नदी किनारे स्थित कई अन्य स्कूल भी खतरे में हैं। चार स्वास्थ्य सुविधाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ से बचे बच्चों के सामने केवल पढ़ाई का संकट नहीं है। UNICEF ने बीमारी, कुपोषण, हिंसा और शोषण का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। परिवार से बिछड़े बच्चों की पहचान और उन्हें परिजनों से मिलाने का काम भी किया जा रहा है। बच्चों और परिवारों के लिए मनोसामाजिक सहायता टीमें तैनात की गई हैं।

UNICEF ने आपात राहत और शुरुआती पुनर्वास के लिए 17.2 मिलियन डॉलर की सहायता की अपील की है। इस राशि से स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल, सैनिटेशन, शिक्षा और बाल संरक्षण जैसी सेवाओं को जारी रखने की योजना है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बने बड़ी चुनौती


नेपाल की तेजी से बढ़ती जलविद्युत व्यवस्था को भी आपदा ने जबरदस्त झटका दिया है। NDRRMA के 31 अगस्त के आंकड़ों में विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े 933 कर्मचारियों और कामगारों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिनके सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। 279 लोगों को सुरंगों और परियोजना क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला गया था। कीचड़ और मलबे से बंद सुरंगों तक पहुंचने के लिए मशीनों, सर्चलाइट और नियंत्रित विस्फोट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि समय बीतने के साथ सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की चुनौती बढ़ रही है।

मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज भी लापता


नेपाल में आपदा के बाद लापता लोगों में मद्रास हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस वी. शिवग्नानम भी शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक वे तमिल तीर्थयात्रियों के एक समूह के साथ नेपाल गए थे। 26 अगस्त की सुबह उन्होंने अपनी पत्नी से WhatsApp पर बातचीत की थी और इसके बाद उनका संपर्क टूट गया।

मद्रास और दिल्ली के तमिल वकील संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय से उनकी तलाश के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है। भारतीय और नेपाली अधिकारियों से समन्वय कर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

क्या है बाढ़ की वजह?

26 अगस्त की आपदा को शुरुआती रिपोर्टों में सामान्य मानसूनी बाढ़ समझे जाने के बजाय अब एक असाधारण हिमालयी घटना से जोड़ा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ ग्लेशियर से जुड़ी विशाल चट्टानी/बर्फीली ढहाव की घटना के बाद आई, जिसने भारी मात्रा में पानी, मिट्टी और मलबा नीचे की घाटियों में धकेल दिया। बाढ़ ने बस्तियों के साथ सड़क, पुल, जलविद्युत परियोजनाओं और संचार नेटवर्क को तबाह कर दिया। नेपाल में तलाश और राहत अभियान अभी जारी है। ऐसे में मृतकों, लापता और बचाए गए लोगों के आंकड़े तेजी से बदल रहे हैं।