
यूपीआई फ्रॉड से कैसे बचें? (फोटोः एआई)
आज यूपीआई से पैसे भेजना इतना आसान हो गया है कि कुछ सेकंड में एक खाते से दूसरे खाते में रकम पहुंच जाती है, लेकिन यही तेजी गलती या फ्रॉड होने पर परेशानी भी बढ़ा देती है। गलत यूपीआई आईडी पर पैसा भेज दिया, बिना अनुमति खाते से रकम कट गई या किसी ठग ने ओटीपी और यूपीआई पिन हासिल करके पैसे निकाल लिए, तो सबसे जरूरी है घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना।
एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के अनुसार यूपीआई एक तुरंत भुगतान प्रणाली है और सफल पी2पी ट्रांजेक्शन को सामान्य तरीके से बाद में रोकने का विकल्प नहीं होता। इसलिए गलती पता चलते ही शिकायत शुरू करना जरूरी है।
गलती या फ्रॉड, दोनों मामलों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। अगर आपने खुद यूपीआई पिन डालकर किसी गलत व्यक्ति को पैसा भेज दिया है, तो यह गलत यूपीआई भुगतान है। ऐसे मामले में तुरंत अपने बैंक और यूपीआई ऐप में शिकायत दर्ज करें। एनपीसीआई के अनुसार यूपीआई से जुड़ी शिकायत ऐप के जरिए भी उठाई जा सकती है।
लेकिन अगर आपने भुगतान नहीं किया और फिर भी खाते से पैसा कट गया, किसी ठग ने आपको धोखा देकर ट्रांजेक्शन कराया या आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हुई है, तो इसे साइबर वित्तीय धोखाधड़ी मानकर तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करना चाहिए।
अगर गलती से गलत यूपीआई आईडी या व्यक्ति को पैसा भेज दिया है तो सबसे पहले ट्रांजेक्शन की जानकारी सुरक्षित करें। यूपीआई ऐप में जाकर उस भुगतान का स्क्रीनशॉट लें और ट्रांजेक्शन आईडी या यूटीआर नंबर नोट कर लें।
इसके बाद उसी यूपीआई ऐप में शिकायत या मदद विकल्प देखें। साथ ही अपने बैंक के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करके गलत खाते में भेजे गए पैसे की शिकायत दर्ज करें।
ध्यान रखें, सफल पी2पी भुगतान को सिर्फ ऐप से खुद रद्द नहीं किया जा सकता। इसलिए बैंक को तुरंत जानकारी देना महत्वपूर्ण है। एनपीसीआई के अनुसार सफल व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांजेक्शन पर यूपीआई ऐप में सामान्य शिकायत दर्ज करने की सुविधा सीमित हो सकती है और ऐसे मामले में बैंक से संपर्क करना पड़ता है।
अगर खाते से आपकी अनुमति के बिना पैसा कट गया है या किसी ठग ने आपको धोखे से भुगतान करा दिया है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है। इसके बाद साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।
जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी जल्दी संबंधित संस्थाओं तक ट्रांजेक्शन की जानकारी पहुंच सकती है। इसलिए यह सोचकर इंतजार न करें कि शायद पैसा अपने आप वापस आ जाएगा।
फ्रॉड या अनधिकृत ट्रांजेक्शन की स्थिति में बैंक को तुरंत सूचना दें। आरबीआई भी ऐसे मामले में बैंक को तुरंत सूचित करने और शिकायत की पावती लेने की सलाह देता है।
बैंक से बात करते समय स्पष्ट रूप से बताएं कि ट्रांजेक्शन आपकी अनुमति के बिना हुआ है। बैंक से शिकायत संख्या या पावती जरूर लें।
आरबीआई के ग्राहक सुरक्षा नियमों के अनुसार अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन की रिपोर्टिंग में देरी ग्राहक की देनदारी को प्रभावित कर सकती है। कुछ परिस्थितियों में 3 कार्यदिवस के भीतर रिपोर्ट करने पर ग्राहक की देनदारी शून्य हो सकती है। हालांकि ग्राहक की लापरवाही, रिपोर्टिंग में देरी और मामले की परिस्थितियों के आधार पर नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए किसी भी स्थिति में बैंक को सूचना देने में देर न करें।
फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड के लिए पहले 1930 पर रिपोर्ट करें और फिर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन की तारीख, रकम, यूटीआर या ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक का नाम, यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर और उपलब्ध अन्य जानकारी तैयार रखें।
सरकारी पोर्टल की गाइडलाइन में ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट और उपलब्ध अन्य संबंधित तस्वीरों को शिकायत के साथ रखने की बात कही गई है।
शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाला पावती नंबर संभालकर रखें। इसी नंबर से शिकायत की स्थिति ट्रैक की जा सकती है।
यूपीआई पिन पैसे भेजने या भुगतान को अधिकृत करने के लिए होता है। इसे किसी व्यक्ति को बताने की जरूरत नहीं है।
एनपीसीआई स्पष्ट रूप से कहता है कि बैंक का कस्टमर सपोर्ट भी आपका यूपीआई पिन नहीं मांगता।
एक और जरूरी बात है। अगर कोई व्यक्ति कहता है कि पैसे प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करके यूपीआई पिन डालें, तो सावधान हो जाएं। एनपीसीआई के अनुसार क्यूआर कोड स्कैन करके यूपीआई पिन डालना भुगतान करने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं।
गूगल या सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी कस्टमर केयर नंबर पर आंख बंद करके भरोसा न करें। ठग अक्सर बैंक, यूपीआई ऐप, बिजली कंपनी या दूसरी सेवा का अधिकारी बनकर फोन करते हैं।
वे आपसे ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड की जानकारी या स्क्रीन शेयर करने को कह सकते हैं।
ओटीपी किसी को न बताएं। यूपीआई पिन किसी को न बताएं। अनजान ऐप डाउनलोड न करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयर न करें।
एनपीसीआई भी फर्जी कस्टमर केयर, अनजान लिंक, फर्जी कैशबैक, क्यूआर कोड और अनजान ऐप से जुड़े फ्रॉड को लेकर सावधान रहने की सलाह देता है।
कुछ भी डिलीट करने से पहले उसका स्क्रीनशॉट और बैकअप रखें। साइबर अपराध पोर्टल की गाइडलाइन भी उपलब्ध ट्रांजेक्शन स्क्रीनशॉट जैसे सबूत सुरक्षित रखने पर जोर देती है।
अगर बैंक में शिकायत करने के बाद समस्या का समाधान नहीं होता या बैंक की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं है, तो आरबीआई के शिकायत प्रबंधन प्रणाली के जरिए शिकायत की जा सकती है। आरबीआई के अनुसार बैंक या संबंधित संस्था की शिकायत का उचित समाधान नहीं होने की स्थिति में आरबीआई लोकपाल व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यहां भी बैंक की शिकायत संख्या, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और सभी दस्तावेज काम आएंगे।
याद रखें, शिकायत के लिए सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि पैसे कट गए। ट्रांजेक्शन आईडी, रकम, समय, यूपीआई आईडी और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसे सबूत मामले को समझने और आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
Updated on:
16 Aug 2026 01:45 pm
Published on:
16 Aug 2026 01:45 pm
