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हिमालय के बीच बसा लीती गांव, जहां नंदा देवी के दर्शन के साथ मिलेगा पहाड़ी जीवन का अनुभव

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का लीती गांव प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी दृश्यों, होमस्टे और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के कारण ग्रामीण पर्यटन के लिए आकर्षण बन रहा है। यहां पर्यटकों को होटल के बजाय स्थानीय परिवारों के साथ रहने और पहाड़ी जीवन को करीब से समझने का मौका मिलता है।
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Adarsh Thakur

Sep 16, 2026

Leeti Village

सांकेतिक इमेजः ChatGPT

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का लीती गांव अब उन यात्रियों के लिए खास जगह बन रहा है, जो पहाड़ों की भीड़भाड़ से दूर प्रकृति और गांव की असली जिंदगी को करीब से देखना चाहते हैं। यहां हिमालयी चोटियों के खूबसूरत नजारे, देवदार और चीड़ के जंगल, पहाड़ी संस्कृति और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी पर्यटकों को आकर्षित करती है। गांव में होमस्टे के जरिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिला है और स्थानीय लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते भी खुले हैं।

घरों में ठहरकर समझें पहाड़ी जीवन

लीती की सबसे खास बात यहां विकसित हुए होमस्टे हैं। कई स्थानीय परिवारों ने अपने घरों को पर्यटकों के ठहरने के लिए तैयार किया है। इससे होटल जैसी जगह के बजाय यात्रियों को स्थानीय परिवारों के साथ रहने और पहाड़ी जीवन को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

यहां आने वाले मेहमानों को स्थानीय भोजन, पारंपरिक जीवनशैली और आसपास के प्राकृतिक स्थलों के बारे में जानकारी भी मिलती है। पुराने स्थानीय विवरणों के अनुसार गांव में महिलाओं ने भी होमस्टे संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे पर्यटन से होने वाली आमदनी का लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंचता है।

सामने दिखता है हिमालय का शानदार नजारा

लीती की भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। साफ मौसम में यहां से हिमालय की ऊंची चोटियों के नजारे दिखाई देते हैं। बागेश्वर जिले के दूसरे पर्यटन स्थलों से भी नंदा देवी, नंदा कोट और त्रिशूल जैसी हिमालयी चोटियों के दृश्य देखे जा सकते हैं।

यही वजह है कि प्रकृति, फोटोग्राफी, ट्रेकिंग और शांत वातावरण पसंद करने वाले यात्रियों के लिए यह इलाका आकर्षक हो सकता है।

ब्रह्म कमल और धार्मिक परंपरा से भी जुड़ा है गांव

लीती केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं जाना जाता। गांव की धार्मिक परंपराएं भी इसे अलग पहचान देती हैं। यहां से श्रद्धालु नंदाकुंड और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों की कठिन यात्रा कर ब्रह्म कमल लेकर आते हैं, जिसे मां भगवती की पूजा से जोड़ा जाता है। यह यात्रा स्थानीय आस्था और हिमालयी परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हाल के वर्षों में लीती से जुड़े श्रद्धालुओं की ब्रह्म कमल यात्रा फिर चर्चा में रही है। इस तरह धार्मिक परंपरा, प्राकृतिक वातावरण और स्थानीय संस्कृति एक साथ यहां का अलग अनुभव बनाते हैं।

ग्रामीण पर्यटन से पलायन रोकने की उम्मीद

उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने का एक बड़ा उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना भी है। राज्य की होमस्टे योजना में दूरदराज के इलाकों में पर्यटकों के लिए आवास सुविधा बढ़ाने और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार देने पर जोर दिया गया है।

लीती जैसे गांव इस मॉडल की संभावनाएं दिखाते हैं। यदि पर्यटन के साथ सड़क, स्वच्छता, इंटरनेट, स्थानीय परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए तो गांवों में रहने वाले लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

कब जाएं और क्या अनुभव करें?

बागेश्वर क्षेत्र में घूमने के लिए सितंबर से जून तक का समय उपयुक्त माना जाता है। आसपास के क्षेत्रों में हिमालयी दृश्य, मंदिर, जंगल और ट्रेकिंग रूट पर्यटकों को अलग-अलग अनुभव देते हैं।

लीती जाने वाले पर्यटकों के लिए खास अनुभव पहाड़ देखने के साथ ही स्थानीय घर में ठहरना, पहाड़ी भोजन चखना, गांव की संस्कृति समझना और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना हो सकता है। यही ग्रामीण पर्यटन की असली खूबसूरती है।