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हूती विद्रोही कौन हैं और क्या है सऊदी अरब से दुश्मनी का इतिहास? मक्का, जेद्दाह सहित 7 शहरों में अलर्ट

हूती विद्रोहियों की कहानी में न केवल सत्ता की लड़ाई है, बल्कि एक ऐसे संघर्ष की गूंज है, जो वैश्विक तेल बाजार को भी हिला सकता है!
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Ravi Gupta

Sep 16, 2026

huti vidrohi and saudi arab

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

सऊदी अरब में हूतियों का हमला बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने अपने नागरिकों को जाने से आगाह किया है। कहा है कि वहां आतंकी हमले का खतरा है। वहीं, सऊदी के सात शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। आइए, हूती विद्रोह के इतिहास और दुश्मनी के बारे में पढ़ते हैं।

हूती विद्रोह की शुरूआत

यमन के हूती विद्रोही—जिन्हें आधिकारिक रूप से "अंसार अल्लाह" (ईश्वर के मददगार) कहा जाता है - एक धार्मिक, राजनीतिक और सशस्त्र आंदोलन हैं, जिनकी जड़ें उत्तरी यमन के सादा प्रांत में हैं। यह आंदोलन 1980–1990 के दशक में जायदी (Zaydi) शिया समुदाय के धार्मिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की मांग के साथ शुरू हुआ, विशेष रूप से सऊदी अरब से फैल रहे सलाफी प्रभाव के विरोध में।

यमन से टकराने और राजधानी पर कब्जा का किस्सा

इसके संस्थापक हुसैन बद्रुद्दीन अल-हूती थे, जिनकी हत्या 2004 में यमन सरकार द्वारा कार्रवाई के दौरान हुई। इसके बाद नेतृत्व उनके भाई अब्दुल-मलिक अल-हूती के हाथों में चला गया। आंदोलन ने धीरे-धीरे एक विद्रोही समूह का रूप ले लिया और 2004 से कई दौर की लड़ाइयों में यमन सरकार से टकराया।

सऊदी अरब का ऑपरेशन

2014–15 में, हूतियों ने यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी और राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व में गठित नौ देशों के गठबंधन ने मार्च 2015 में "ऑपरेशन डिसिसिव स्टॉर्म" शुरू किया, जिसका उद्देश्य हूतियों को सत्ता से हटाकर पूर्व राष्ट्रपति हादी को पुनः सत्ता में लाना था।

हूतियों का सऊदी अरब के प्रति विरोध कई कारणों से गहरा है। वे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा यमन में किए गए हवाई हमलों और नाकाबंदी को अपनी कार्रवाई का मुख्य कारण मानते हैं। वे इसे प्रतिशोध और यमन पर लगी नाकाबंदी को समाप्त करने का प्रयास बताते हैं। इसके अलावा, उन्होंने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों और जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ा है।

ईरान से हूतियों के संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा है। पश्चिमी देशों और सऊदी अरब का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देता है, जिससे उनका सैन्य और राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है। हालांकि हूती स्वयं इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं करते, लेकिन उन्हें आमतौर पर ईरान समर्थित गुट माना जाता है।

सऊदी अरब पर लगातार हमला

हाल के घटनाक्रमों में, जुलाई 2026 में हूतियों ने सऊदी अरब के अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसके जवाब में सऊदी अरब ने सना हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए। इसके अलावा, उन्होंने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर मिसाइल हमले और नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय तेल मार्गों पर तनाव बढ़ गया।

इन हमलों के कारण सऊदी तेल पाइपलाइनों को भारी नुकसान हुआ और उनमें से एक प्रमुख पाइपलाइन कई सप्ताह तक बंद रहने की स्थिति में है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। साथ ही, सऊदी अरब ने इस संघर्ष में अमेरिका और मिस्र से समर्थन मांगा है, क्योंकि लाल सागर में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

पिछले एक सप्ताह के भीतर ये मामला और गरमाता गया है। क्योंकि, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर कई बड़े हमलों की घोषणा की है।

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