
सांकेतिक इमेजः ChatGPT
सोशल मीडिया पर Gen Z से जुड़े नए नए ट्रेंड लगातार सामने आते रहते हैं। अब डेटिंग से जुड़ा एक ऐसा ट्रेंड चर्चा में है, जिसमें कुछ युवा डेट पर जाने से पहले नहाने और डियोड्रेंट लगाने से बच रहे हैं। इसे फेरोमोन मैक्सिंग कहा जा रहा है। इसके पीछे मान्यता है कि शरीर की प्राकृतिक गंध सामने वाले व्यक्ति को आकर्षित कर सकती है।
फेरोमोन मैक्सिंग सोशल मीडिया के मैक्सिंग ट्रेंड का एक नया रूप है। मैक्सिंग का मतलब किसी खास चीज को अधिकतम करने की कोशिश से जुड़ा है। इसमें कुछ युवा अपनी प्राकृतिक शरीर की गंध को बनाए रखने के लिए नहाने, डियोड्रेंट या परफ्यूम से दूरी बनाने की बात करते हैं।
इस ट्रेंड को मानने वालों की सोच है कि शरीर की प्राकृतिक गंध में ऐसे रसायन हो सकते हैं जो दूसरे व्यक्ति के आकर्षण को प्रभावित करें। इसी धारणा के कारण कुछ लोग डेट से पहले ग्रूमिंग कम करने की कोशिश कर रहे हैं। Instagram पर UnpolishedLook, NoShowerDate और RealDateLook जैसे हैशटैग के साथ कई वीडियो सामने आए हैं, जो इस ट्रेंड के बारे में बताते हैं।
यहीं इस ट्रेंड का वैज्ञानिक पक्ष महत्वपूर्ण हो जाता है। कई जानवरों में फेरोमोन सामाजिक और प्रजनन व्यवहार को प्रभावित करते हैं। लेकिन इंसानों में दूसरे व्यक्ति को आकर्षित करने का कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए केवल शरीर की प्राकृतिक गंध बढ़ाने से डेटिंग में सफलता मिलेगी, ऐसा कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।
प्राकृतिक शरीर की गंध और फेरोमोन एक ही चीज नहीं हैं। पसीने की गंध त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के साथ पसीने के घटकों की प्रतिक्रिया से भी बन सकती है। इसलिए लंबे समय तक न नहाना किसी विशेष आकर्षक रासायनिक संकेत को बढ़ाने के बजाय शरीर की सफाई से जुड़ी समस्या पैदा कर सकता है।
बिना नहाए डेट पर जाने से त्वचा पर पसीना, तेल और गंदगी जमा हो सकती है। इससे शरीर की दुर्गंध के अलावा त्वचा में खुजली, जलन और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल किसी ट्रेंड को अपनाने से पहले उसके स्वास्थ्य संबंधी असर को समझना जरूरी है।
खासकर लंबे समय तक नहाने और व्यक्तिगत सफाई से दूरी बनाना स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं माना जा सकता। डेट पर आकर्षक दिखने या अपनी पहचान बनाने के लिए साफ सफाई छोड़ना जरूरी नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि Gen Z के डेटिंग व्यवहार में केवल ग्रूमिंग ही नहीं बल्कि रिश्तों को लेकर सोच भी बदल रही है। Tinder के 2025 Year in Swipe से जुड़े सर्वे में 18 से 25 वर्ष के डेटिंग कर रहे युवाओं में 73 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें तब पता चलता है कि वे किसी व्यक्ति को वास्तव में पसंद करते हैं जब वे उसके साथ खुद की तरह रह पाते हैं। सर्वे में 64 प्रतिशत युवाओं ने डेटिंग में भावनात्मक ईमानदारी की जरूरत बताई।
इससे संकेत मिलता है कि कुछ युवा डेटिंग में परफेक्ट दिखने या एक तय छवि बनाने के बजाय सहज और वास्तविक रहने को महत्व दे रहे हैं। हालांकि इसका मतलब व्यक्तिगत स्वच्छता छोड़ना नहीं है।
किसी रिश्ते में आकर्षण कई चीजों से प्रभावित हो सकता है। बातचीत, सम्मान, आत्मविश्वास, व्यवहार और सामने वाले की सहजता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए फेरोमोन मैक्सिंग को डेटिंग का वैज्ञानिक फार्मूला मानना सही नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर कोई ट्रेंड वायरल होना और उसका वैज्ञानिक रूप से प्रभावी होना दो अलग बातें हैं। डेट पर अपनी वास्तविक पहचान के साथ जाना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ व्यक्तिगत स्वच्छता और दूसरे व्यक्ति की सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
Updated on:
16 Sept 2026 06:11 pm
Published on:
16 Sept 2026 06:11 pm
