
कार्यक्रम में होंगे यह शामिल लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष, पर्यटन व संस्कृति मंत्री के अलावा अन्य तीन मंत्री, पांच विधायक, सांसद व महापौर उपस्थित रहेंगे।

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पुराने परिवेश में नई इमारत इसके रिनोवेशन की सबसे खास बात यह है कि, 18वीं सदी में पहली बार बनी इस नायाब इमारत को पुरानी तकनीक के अनुसार ही रेनोवेट किया गया है। इसके निर्माण में लगी सामग्री को पुराने ज़माने के तर्ज पर ही बनाया गया। इमारत के रेनोवेशन में गुड़, उड़द, जूट और मार्बल पावडर के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है।

मिंटो हॉल का इतिहास मिंटो हॉल का शिलान्यास 12 नवम्बर 1909 में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड मिंटो व लेडी मिंटो ने किया था। इसे तैयार होने में करीब 27 साल का समय लगा था। इतना समय इसलिए लगा क्योंकि, काम शुर होने के कुछ ही समय बाद इसका काम बंद हो गया था। इसके बाद भोपाल रियासत की 12वीं शासक नवाब सुल्तान जहां बेगम ने साल 1936 में इसका निर्माण पूरा कराया। उनके शासन काल में भी अंग्रेज इंजीनियर एसी रबेन की देखरेख में इस भवन का निर्माण कराया गया था।

उस समय की निर्माण लागत थी 3 लाख उस समय भवन निर्माण में कुल लागत 3 लाख रुपए आई थी। ज्यादातर इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री इंग्लैंड से ही मंगवाई गई थी। इसके पीछे वजह यह थी कि, लॉर्ड मिंटो व लेडी मिंटो के समय में शुरु किए गए काम में कई चीजें इंग्लेंड की ही लगी थीं, इसलिए बेगम ने उन चीजों को खंडित करवाकर अपने देश की चीजें लगवाने के बजाये इंग्लेंड की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया था। हालांकि, उसके बाद इसे पुलिस मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया। फिर 1946 में इंटर कॉलेज बना और सितंबर 1956 से विधानसभा भवन बन गया था।

लोकार्पण के बाद बदली काया -600 व्यक्ति क्षमता का मुख्य हॉल-80 व्यक्ति क्षमता की दर्शक दीर्घा-120 व्यक्ति क्षमता के दो कमेटी रूम-30 व्यक्ति क्षमता के बोर्ड रूम और मीडिया रूम-240 व्यक्ति क्षमता के दो मीटिंग रूम
