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देशभर में पहुंच रही बीकानेर की मौली

बीकानेर. धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ व सभी मांगलिक कार्यों में हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र या मौली बांधने की परंपरा है। नवरात्रि पर्व पर मौली की डिमांड ज्यादा रहती है। बीकानेर की एक महिला भी इस उद्योग से जुड़कर आज कई महिलाओं को रोजगार दे रही है। महिला कृष्णा खत्री के ससुर ने इस कारोबार को छोटे स्तर पर शुरू किया था। परिवारजनों की जरूरतों एवं कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए वर्ष 2011 में कृष्णा ने मौली को उद्योग के रूप में आगे बढ़ाया।फोटो : नौशाद अली

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Bikaner's Mauli is reaching across the country

बीकानेर. धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ व सभी मांगलिक कार्यों में हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र या मौली बांधने की परंपरा है। नवरात्रि पर्व पर मौली की डिमांड ज्यादा रहती है। बीकानेर की एक महिला भी इस उद्योग से जुड़कर आज कई महिलाओं को रोजगार दे रही है। महिला कृष्णा खत्री के ससुर ने इस कारोबार को छोटे स्तर पर शुरू किया था। परिवारजनों की जरूरतों एवं कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए वर्ष 2011 में कृष्णा ने मौली को उद्योग के रूप में आगे बढ़ाया। आज कृष्णा ने अपनी मेहनत के दम पर इस कारोबार को बड़े रूप में खड़ा कर लिया है। यहां की मौली की देशभर में डिमांड रहती है। कृष्णा ने देशभर में बीकानेरी मौली भेज कर अपनी अलग पहचान कायम की है। फोटो : नौशाद अली

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बीकानेर. धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ व सभी मांगलिक कार्यों में हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र या मौली बांधने की परंपरा है। नवरात्रि पर्व पर मौली की डिमांड ज्यादा रहती है। बीकानेर की एक महिला भी इस उद्योग से जुड़कर आज कई महिलाओं को रोजगार दे रही है। महिला कृष्णा खत्री के ससुर ने इस कारोबार को छोटे स्तर पर शुरू किया था। परिवारजनों की जरूरतों एवं कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए वर्ष 2011 में कृष्णा ने मौली को उद्योग के रूप में आगे बढ़ाया। आज कृष्णा ने अपनी मेहनत के दम पर इस कारोबार को बड़े रूप में खड़ा कर लिया है। यहां की मौली की देशभर में डिमांड रहती है। कृष्णा ने देशभर में बीकानेरी मौली भेज कर अपनी अलग पहचान कायम की है। फोटो : नौशाद अली

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बीकानेर. धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ व सभी मांगलिक कार्यों में हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र या मौली बांधने की परंपरा है। नवरात्रि पर्व पर मौली की डिमांड ज्यादा रहती है। बीकानेर की एक महिला भी इस उद्योग से जुड़कर आज कई महिलाओं को रोजगार दे रही है। महिला कृष्णा खत्री के ससुर ने इस कारोबार को छोटे स्तर पर शुरू किया था। परिवारजनों की जरूरतों एवं कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए वर्ष 2011 में कृष्णा ने मौली को उद्योग के रूप में आगे बढ़ाया। आज कृष्णा ने अपनी मेहनत के दम पर इस कारोबार को बड़े रूप में खड़ा कर लिया है। यहां की मौली की देशभर में डिमांड रहती है। कृष्णा ने देशभर में बीकानेरी मौली भेज कर अपनी अलग पहचान कायम की है। फोटो : नौशाद अली

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बीकानेर. धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ व सभी मांगलिक कार्यों में हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र या मौली बांधने की परंपरा है। नवरात्रि पर्व पर मौली की डिमांड ज्यादा रहती है। बीकानेर की एक महिला भी इस उद्योग से जुड़कर आज कई महिलाओं को रोजगार दे रही है। महिला कृष्णा खत्री के ससुर ने इस कारोबार को छोटे स्तर पर शुरू किया था। परिवारजनों की जरूरतों एवं कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए वर्ष 2011 में कृष्णा ने मौली को उद्योग के रूप में आगे बढ़ाया। आज कृष्णा ने अपनी मेहनत के दम पर इस कारोबार को बड़े रूप में खड़ा कर लिया है। यहां की मौली की देशभर में डिमांड रहती है। कृष्णा ने देशभर में बीकानेरी मौली भेज कर अपनी अलग पहचान कायम की है। फोटो : नौशाद अली

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बीकानेर. धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ व सभी मांगलिक कार्यों में हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र या मौली बांधने की परंपरा है। नवरात्रि पर्व पर मौली की डिमांड ज्यादा रहती है। बीकानेर की एक महिला भी इस उद्योग से जुड़कर आज कई महिलाओं को रोजगार दे रही है। महिला कृष्णा खत्री के ससुर ने इस कारोबार को छोटे स्तर पर शुरू किया था। परिवारजनों की जरूरतों एवं कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए वर्ष 2011 में कृष्णा ने मौली को उद्योग के रूप में आगे बढ़ाया। आज कृष्णा ने अपनी मेहनत के दम पर इस कारोबार को बड़े रूप में खड़ा कर लिया है। यहां की मौली की देशभर में डिमांड रहती है। कृष्णा ने देशभर में बीकानेरी मौली भेज कर अपनी अलग पहचान कायम की है। फोटो : नौशाद अली