
भारत में आदिकाल से ऋषि कृषि होती रही है जो उन्नत कृषि के महत्व को प्रमाणित करती है। ऋग्वेद में उन्नत कृषि के मंत्र विद्यमान है। महाभारत में नारद-युधिष्ठर संवाद में बीज संरक्षण व संवद्र्धन, उन्नत सिंचाई, सानुग्रह ऋण जैसी व्यवस्थाएं प्राचीन वाडमय में भी रही हैं। भारत दुनिया का पोषण करने वाला देश रहा है। दुनिया में भारत के पास सर्वाधिक 18.9 करोड़ हैक्टयर कृषि भूमि है।

विश्व में सिंचाई की दृष्टि से दुनिया में दूसरा बड़ा देश है। भारत कृषि के परम्परागत ज्ञान से कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण एवं संवद्र्धन करके कृषि उपज छह गुणा ज्यादा बढ़ा सकता है। यह बात बुधवार को स्वामी केशवानंद कृषि विवि के 15 वें दीक्षांत समारोह में वक्ताओं ने कही। समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति कल्याण सिंह एवं कृषि मंत्री प्रभू लाल सैनी के आने का कार्यक्रम था लेकिन दोनों ही अतिथि नहीं पहुंचे।

समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बी. आर. छींपा ने की।विशिष्ट अतिथि प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा ने कहा कि भारत विश्व की खाद्य शक्ति बनेगा। देश में प्रतिवर्ष 20 करोड हैक्टेयर मीटर जल बह कर समुद्र में चला जाता है इसका यथोचित उपयोग कर सिंचित क्षेत्र को 6.67 करोड हैक्टेयर से बढाकर 16 करोड हैक्टेयर किया जा सकता है।उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में कृषि मित्र कीटों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण पर जोर दिया।

कीटनाशकों के बेतरतीब उपयोग से भी मित्र कीट, भूमि की उर्वरकता और जमीन की जलग्रहण क्षमता घट रही है। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में असंतुलन से जैव-विविधता को भी नुकसान हो रहा है।

कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने कहा कि इस विवि ने अपने 30 वर्ष के सफर में कृषि शिक्षा, अनुसंधान व प्रसार कार्यों से कृषि जगत में अपना विशिष्ट योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कृषि में रोजगारपरक कौशल विकास की विपुल संभावनाएं मौजूद हैं। अत: यह क्षेत्र युवाओं के लिए वरदान हो सकता है।

समारोह में चौधरी चरण सिंह स्मृति अवार्ड कृषि संकाय में सुश्री आकांक्षा देवड़ा व नितिका को प्रदान किया गया। दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि रूप में केन्द्रीय हिन्दी अकादमी, आगरा के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डे मंचासीन थे। समारोह में बीकानेर पश्चिम के विधायक डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, कोटा कृषि वि.वि. के कुलपति प्रो. जी. एल. केशवा, जोबनेर कृषि वि.वि. के कुलपति प्रो. पी.एस. राठौड, सी.आई.ए.एच. के निदेशक डॉ. पी.एल. सरोज, काजरी के निदेशक डॉ. एन.डी. यादव सहित राजुवास के निदेशक व अधिष्ठाता शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद थे।

15 वें दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने बुधवार को कृषि, गृह विज्ञान और कृषि व्यवसाय प्रबंधन के 681 छात्र-छात्राओं को उपाधियां और 11 को स्वर्ण पदकों से विभूषित किया। समारोह में स्नातकोत्तर योग्यता प्राप्त करने वाले 572 छात्र-छात्राओं को उपाधियां तथा तीन को स्वर्ण पदकों से नवाजा गया। स्नातकोत्तर में 88 को उपाधियां और सात को स्वर्ण पदक तथा 21 को विद्यावाचस्पति की उपाधियों से अलंकृत किया गया। कुमारी सुरज्ञान रूण्डला को वर्ष 2016-17 के लिए पहली बार कुलाधिपति के स्वर्ण पदक से विभूषित किया गया।