
जिला अस्पताल परिसर में स्थित आयुष विंग अस्पताल में पंचकर्म के लिए सैंकड़ों मरीज अब भी कतार में लगे हुए हैं।

जिले में आयुर्वेद के बढ़ते क्रेज के चलते जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग व सिविल वार्ड नंबर 5 में आयुष अस्पताल संचालित है, इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में 37 आयुष औषधालय व 4 हौम्योपैथी अस्पताल हैं।

इन अस्पतालों से लोगों को लाभ दिलाने के लिए शासन द्वारा मुफ्त दवाओं के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन दमोह शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उसके पीछे का कारण है कि हौम्योपैथी के कुल 3 डॉक्टर हैं जबकि 4 अस्पताल संचालित हैं। आयुर्वेद के 44 डॉक्टरों के पद चाहिए लेकिन कार्यरत 26 हैं। जिला अस्पताल परिसर में संचालित आयुष विंग में पंचकर्म के लिए दो डॉक्टरों की आवश्यकता है, लेकिन यहां एक महिला चिकित्सक ही सेवाएं दे रही हैं।

मरीज बढ़ रहे समय पर नहीं मिल रहा इलाज आयुर्वेद के बढ़ते प्रचार के चलते मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके लिए प्रत्येक असाध्य रोगी पंचकर्म की सुविधा लेना चाहता है, लेकिन दमोह के दोनों अस्पतालों में एक दिन में दो से तीन मरीज को लाभ मिल रहा है, 25 से अधिक कतार में लगे हैं। अन्य चिकित्सीय सुविधाओं के लिए भी मरीज आयुर्वेद पद्धति से इलाज कराना चाहते हैं, लेकिन समय पर डॉक्टर न मिलने और दवाएं न मिलने के कारण मजबूरी में उनका पलायन एलौपैथी की ओर हो रहा है। जनवरी माह में आयुष विंग की ओपीडी 3 हजार से अधिक मरीजों को लाभ देना बता रही है, लेकिन इससे अधिक मरीज अभी भी कतार में बताए जा रहे हैं।

हो रहा है भवन का कायाकल्प जिला अस्पताल की भव्य इमारत के नीचे बेरंगत लिए आयुष विंग अस्पताल का भी कायाकल्प कराया जा रहा है। रेनोवेशन का कार्य किया जा रहा है, जिससे यहां पंचकर्म की टेबल बढ़ाई जाना है, आयुर्वेद की अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी मुहैया कराई जानी है, इसी तरह सिविल वार्ड स्थित अस्पताल में भी रेनोवेशन का कार्य चल रहा है, जिससे आगामी दिनों में मरीजों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

डेंगू की रोकथाम में कारगर, अब कोरोना भी रोकेंगे आयुष बिंग भले ही अस्पतालों में इलाज न दे पा रहा हो, लेकिन महामारी रोकने के लिए अमला प्रयासरत है, डेंगू की गोलियां घर-घर वितरण कराई गईं, जिससे डेंगू के मामले सामने नहीं आए। अब कोरोना वायरस की गोली वितरण के साथ बच्चों को स्वर्ण प्रासन की दवाई पिलाने का अभियान चलाया जाना है