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आयुर्वेद अपना रहे लोग, नहीं मिल पा रहा इलाज

जिले में आयुर्वेद के बढ़ते क्रेज के चलते जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग व सिविल वार्ड नंबर 5 में आयुष अस्पताल संचालित है

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दमोह

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rakesh Palandi

Mar 04, 2020

People adopting Ayurveda, cannot get treatment

जिला अस्पताल परिसर में स्थित आयुष विंग अस्पताल में पंचकर्म के लिए सैंकड़ों मरीज अब भी कतार में लगे हुए हैं।

People adopting Ayurveda, cannot get treatment

जिले में आयुर्वेद के बढ़ते क्रेज के चलते जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग व सिविल वार्ड नंबर 5 में आयुष अस्पताल संचालित है, इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में 37 आयुष औषधालय व 4 हौम्योपैथी अस्पताल हैं।

People adopting Ayurveda, cannot get treatment

इन अस्पतालों से लोगों को लाभ दिलाने के लिए शासन द्वारा मुफ्त दवाओं के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन दमोह शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उसके पीछे का कारण है कि हौम्योपैथी के कुल 3 डॉक्टर हैं जबकि 4 अस्पताल संचालित हैं। आयुर्वेद के 44 डॉक्टरों के पद चाहिए लेकिन कार्यरत 26 हैं। जिला अस्पताल परिसर में संचालित आयुष विंग में पंचकर्म के लिए दो डॉक्टरों की आवश्यकता है, लेकिन यहां एक महिला चिकित्सक ही सेवाएं दे रही हैं।

People adopting Ayurveda, cannot get treatment

मरीज बढ़ रहे समय पर नहीं मिल रहा इलाज आयुर्वेद के बढ़ते प्रचार के चलते मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके लिए प्रत्येक असाध्य रोगी पंचकर्म की सुविधा लेना चाहता है, लेकिन दमोह के दोनों अस्पतालों में एक दिन में दो से तीन मरीज को लाभ मिल रहा है, 25 से अधिक कतार में लगे हैं। अन्य चिकित्सीय सुविधाओं के लिए भी मरीज आयुर्वेद पद्धति से इलाज कराना चाहते हैं, लेकिन समय पर डॉक्टर न मिलने और दवाएं न मिलने के कारण मजबूरी में उनका पलायन एलौपैथी की ओर हो रहा है। जनवरी माह में आयुष विंग की ओपीडी 3 हजार से अधिक मरीजों को लाभ देना बता रही है, लेकिन इससे अधिक मरीज अभी भी कतार में बताए जा रहे हैं।

People adopting Ayurveda, cannot get treatment

हो रहा है भवन का कायाकल्प जिला अस्पताल की भव्य इमारत के नीचे बेरंगत लिए आयुष विंग अस्पताल का भी कायाकल्प कराया जा रहा है। रेनोवेशन का कार्य किया जा रहा है, जिससे यहां पंचकर्म की टेबल बढ़ाई जाना है, आयुर्वेद की अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी मुहैया कराई जानी है, इसी तरह सिविल वार्ड स्थित अस्पताल में भी रेनोवेशन का कार्य चल रहा है, जिससे आगामी दिनों में मरीजों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

People adopting Ayurveda, cannot get treatment

डेंगू की रोकथाम में कारगर, अब कोरोना भी रोकेंगे आयुष बिंग भले ही अस्पतालों में इलाज न दे पा रहा हो, लेकिन महामारी रोकने के लिए अमला प्रयासरत है, डेंगू की गोलियां घर-घर वितरण कराई गईं, जिससे डेंगू के मामले सामने नहीं आए। अब कोरोना वायरस की गोली वितरण के साथ बच्चों को स्वर्ण प्रासन की दवाई पिलाने का अभियान चलाया जाना है