तानसेन समारोह का प्रारंभ शहनाई वादन से होता है। इसके बाद ढोली बुवा महाराज की हरिकथा और फिर मीलाद शरीफ का गायन। सुर सम्राट तानसेन और प्रसिद्ध सूफी संत मौहम्मद गौस की मजार पर चादर पोशी भी होती है। ढोली बुआ महाराज अपनी संगीतमयी हरिकथा के माध्यम से कहते हैं कि धर्म का मार्ग कोई भी हो सभी ईश्वर तक ही पहुंचे हैं।