
जयपुर में ढूंढ़ाड़ की रियासतकालीन परंपरा और आस्था का संगम मानी जाने वाली गोपाल जी महाराज की 207वीं हेडे की परिक्रमा आज सुबह छह बजे गोपाल जी का रास्ता स्थित नृसिंहजी के मंदिर से शुरू हुई।

परिक्रमा में 36 जातियों के सैकड़ों भक्त जयपुर की परंपरागत वेशभूषा-सफेद धोती, कुर्ता और मोतिया रंग की पगड़ी धारण कर ढोलकी और मंजीरों की ताल पर भजन-कीर्तन करते हुए निकले।

कुंज बिहारी धोतीवाले ने बताया कि इस बार की परिक्रमा की खासियत है कि जिस मंदिर में पहुंचेगी, उसी मंदिर के ठाकुरजी का भजनों से गुणगान होगा। भजन मंडली के साथ श्रद्धालु जौहरी बाजार के मंदिरों के दर्शन करते हुए सांगानेरी गेट पहुंचे।

सांगानेरी गेट से नगर परिक्रमा में श्रद्धालु पैदल ही पंचमुखी हनुमान, गढ़गणेश होते हुए दोपहर को गलताजी पहुंचेंगे। दोपहर दो बजे सिसोदिया रानी के बाग के सामने चतुर्भुज मंदिर पहुंचकर विश्राम करेंगे।

इसके बाद शाही लवाजमा, बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा भजन-कीर्तन करते हुए जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, चौड़ा रास्ता होते हुए रात दस बजे गोपालजी के मंदिर पहुंचेगी।