
शहर की कॉलोनियों में बने नगर निगम के पार्क अब सार्वजनिक स्थानों के बजाय निजी संपत्तियों में तब्दील होते जा रहे हैं। निगम की अनदेखी का खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

जयपुर पैलेस होटल के सामने लक्ष्मी मंदिर के पास स्थित पार्क देखरेख के अभाव में बदहाल हो गया है। पार्क की दीवारें तोड़कर निजी उपयोग में लिया जा रहा है। पार्कों का मूल उद्देश्य ही खत्म होता नजर आ रहा है।

इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा नुकसान बच्चों और बुजुर्गों को हो रहा है। न टूटे झूलों पर बच्चे खेल सकते हैं, न गंदगी के बीच कोई सैर कर सकता है। पार्कों में खुलेआम कपड़े और बिस्तर सुखाए जा रहे हैं।

पार्कों की हरियाली गुम हो गई है। पार्क में जगह—जगह कचरे का अंबार लगा है। पार्कों की हालत देखकर कोई भी यहां आना तक पसंद नहीं करता है। देखरेख के अभाव में पार्क में लगे पौधे तक सूख गए हैं।

पार्क में लगे बोर्ड पर कचरे न डालने व फूलों को न तोड़ने सहित कई हिदायत लिखी गई हैं, लेकिन इसके बाद भी पार्क के हालात खराब है। ऐसा लगता है मानों सालों से पार्क की निगम के जिम्मेदारों ने सुध तक नहीं ली है।

स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। निवासियों ने मांग की है कि पार्कों की मरम्मत कराकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।