
जोधपुर के भीतरी क्षेत्र में एक ऐसा गार्डन, जिसमें देश-विदेश के 7000 पौधों का खजाना है। फोटो : जेके भाटी

यहां रंग-बिरंगे व खुशबू वाले फूलों के पौधों के साथ हर्बल के पौधे भी देखने को मिलते हैं। फोटो : जेके भाटी

मेड़ती गेट स्थित कुचामन हाउस निवासी रवींद्र काबरा अपने शौक की वजह से लोकप्रिय हैं। फोटो : जेके भाटी

शौकिया और प्रोफेशनल दोनों ही तौर पर गार्डनिंग करने वाले काबरा पेड़-पौधों की अपने बच्चों की तरह देखभाल कर रहे हैं। फोटो : जेके भाटी

10 वर्ष की उम्र में जब वे अपने दादा गोकुलचंद्र काबरा के साथ बगीचे में जाते थे तो उन्हें भी उनसे सीखने का अवसर मिला। फोटो : जेके भाटी

अपने द्वारा बड़ी शिद्दत से तैयार किए इस गार्डन का नाम अपने दादा की स्मृति में ‘गोकुल- द वैली ऑफ फ्लॉवर्स’ रखा। फोटो : जेके भाटी

हॉलैंड के ट्यूलिप के अलावा 250 प्रजातियों के गुलाब के फूल अलग-अलग रंगों में हैं। फोटो : जेके भाटी

इनके अलावा, खुशबू वाले पौधों में स्वर्णचंपा, हरा चम्पा, जूही, चमेली, मोगरा। औषधीय पौधों में दालचीनी, तेजपता, लौंग, पीपरमेंट तुलसी सहित कई प्रजातियां है। फोटो : जेके भाटी

ये दुर्लभ व नई प्रजाति के पौधे देश-विदेश से मंगवाते हैं। फोटो : जेके भाटी

प्रतिदिन सुबह 7 बजे से 11 बजे तक गार्डन में रहकर इनकी सार-संभाल कर रहे काबरा लोगों को नि:शुल्क बागवानी भी सिखा रहे हैं। फोटो : जेके भाटी