
पला चला कैसे होता है प्रशासनिक कार्य एडीएम सिटी पंकज ओझा की दोनों बेटियां तेजस्विनी, ओजस्विनी भी अपने पिता के साथ सोमवार को कलक्ट्रेट गई। पिता के साथ दफ्तर में समय बिताया तो उन्हें पता चला कि प्रशासनिक कार्य कैसे किया जाता है।

शुक्रिया पत्रिका, जो मौका दिया राजस्थान पत्रिका का शुक्रिया, जो बेटियों को ऐसा मौका दिया। वैसे तो मैं रोजाना पापा भरतराम गोयल के काम में हाथ बंटाती हूं, लेकिन पूरा दिन काम करना एक अलग अनुभव रहा। पापा कड़ी मेहनत करते हैं। मैं भी उनकी तरह मेहनत कर पढ़ लिखकर बड़ी अधिकारी बनना चाहती हूं। अर्चिता गोयल, कक्षा 8

सेल किया सेट टॉप बॉक्स हमारी शॉप ममता इलेक्ट्रो सेल्स पर पापा ललित खत्री के साथ जाकर इलेक्ट्रोनिक उत्पाद देखे और समझे। हाई डेफिनेशन टीवी वे बिलिंग भी खुद करते हैं। उनके बताने के बाद एक ग्राहक को सेट टॉप बॉक्स सेल किया। शॉपकीपर बनकर अच्छा लगा। नेहल खत्री, कक्षा 07 देखा ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम

सीखा आंखों की जांच करना आज सुवि आई हॉस्पिटल एण्ड लेसिक लेजर सेंटर जाकर पापा डॉ. सुरेश के. पाण्डेय व मम्मी डॉ. विदुषी पाण्डेय के कामकाज को बारिकी से समझा। दोनों ने आंखों की जांच करना सिखाया। आंखों की विभिन्न बीमारियों के बारे में बताया। इशिता पाण्डेय, कक्षा 6

ऐसे काम करता है सिक्यूरिटी सिस्टम पापा के ऑफिस 24/7 सिक्यूरिटी सिस्टम आकर बहुत अच्छा लगा। पापा नितिन गुप्ता से बताया कि सिक्यूरिटी सिस्टम कैसे काम करता है। मुझे पता चला कि पापा कितनी कड़ी मेहनत करते हैं। मैं भी उनकी तरह मेहनत करूंगी। रिशिता गुप्ता

फ्लेक्स बनाने की तकनीक सीखी पापा विजय वर्मा की शॉप पर आकर फ्लेक्स बनाना सीखा साथ ही कैसे फ्लेक्स को रंगीन बनाया जाता है यह तकनीक भी सीखी इशिका वंशिका विजय

पापा मनोज कुमार जांगिड़ आरटीयू में असिस्टेंट रजिस्ट्रार हैं। उनके ऑफिस जाकर ऑनलाइन बिल पैमेंट सिस्टम देखा और समझा। वे अपने काम को खूब एंजोए करते हैं। ये देखकर अच्छा लगा। पिहू जांगिड़

बहुत जिम्मेदारी का है काम मैंने पापा की मेडिकल शॉप पर जाकर पूरा दिन उनके कामकाज के बारे में सीखा। वह कैसे ग्राहकों को हैंडिल करते हैं। दवा देते हैं, उन्हें दवा लेने के बारे में बताते हैं। पापा का काम बेहद जिम्मेदारी का है, उसे कैसे हंसते-हंसते करते हैं, यह भी सीखा। जाह्नवी यादव, कक्षा 12

विद्यार्थियों से संवाद करना सीखा रीयल मैथोमेटिक्स क्लासेज की निदेशक मीनू विजय अपने कोचिंग सेन्टर पर बेटी तूलिका विजय को साथ लेकर गई। तूलिका ने मां से समझा कि विद्यार्थियों से कैसे संवाद किया जाता है। तूलिका ने बताया कि मां के साथ बिताए पल बहुत अच्छे लगे। इसके साथ यह भी पता चला कि उनकी मां का कार्य कितना महत्वपूर्ण है।