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जानें आरबीआई समीक्षा बैठक के बारें मे कुछ खास बातें

नई दिल्ली। भारजीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी द्विमासिक बैठक में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोइ बदलाव नहीं किया है। अभी रेपो र

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RBI

नई दिल्ली। भारजीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी द्विमासिक बैठक में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोइ बदलाव नहीं किया है। अभी रेपो रेट 6 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी बरकरार है। इसके साथ ही अब दीवाली में आपको सस्ते कर्ज को तोहफा नहीं मिलेगा। हालांकि आरबीआई ने एसएलआर 0.5 फीसदी घटाकर 19.5 फीसदी कर दिया है। आरबीआई की अगली क्रेडिट पॉलिसी अब 5-6 से दिसंबर को होगी। आरबीआई के इस समिति ने जीएसटी के प्रभावों पर भी चर्चा की और साथ ही ये आर्थिक वृद्धि दर का 6.7 फीसदी कर दिया है, जो कि पहले 7.3 फीसदी था। आइए स्लाइड के जरिए जानते है आरबीआई के इस समीक्षा बैठक के बारे में कुछ खास बातें।

Economy Index

1. आरबीआई ने अपने इस बैठक मे प्रमुख नीतिगत दर मे कोई बदलाव नहीं किया है। प्रमुख नीतिगत दर पहले की तरह अभी भी 6 फीसदी ही रखा है। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट मे भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिवर्स रेपो रेट भी पहले की तरह 5.75 पर है।

Economy Growth rate

2. आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। और दूसरी छमाही की मुद्रास्फीति को 4.2 से 4.6 फीसदी रहने का अनुमान किया है।

GST

3. आरबीआई के इस बैठक मे इस बात पर भी चर्चा हुआ कि जीएसटी लागू होने के वजह से लघु अवधि मे विनिर्माण क्षेत्र की संभावनाएं अनिश्चित है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने मुख्य मुद्रास्फीति को टिकाऊ आधार पर 4 फीसदी के आसपास रखने का लक्ष्य रखा है।

Banks

4. केन्द्रीय बैंक दूसरे बैंको के बही खाते से कंपनियों की दबाव वाली संपत्तियो के हल के लिए काम करेगा। इस बैठक मे इस बात पर भी चर्चा हुआ कि हालिया संरचनात्मक सुधारों से कारोबारी धारणा, पारदर्शिता और अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने को लेकर हालात पहले की अपेक्षा सुधरा है।

Stam paper

5. रिजर्व बैैंक ने फैसला लिया है कि ठहरे परियोजनाओं को शुरू किया जाए, कारोबार सुगमता को और बढ़ावा दिया जाए और जीएसटी को और अधिक सरल बनाने के लिए कोशिश किया जाए। वहीं राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले उंचे स्टाम्प शूल्को की दरों को तर्कसंगत बनाने का भी सुझाव दिया है। साथ ही सस्ते आवासीय कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाए।