
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हिमालय के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर के कपाट अगले 6 महीने तक बंद होने से पहले भगवान शिव के दर्शन किए।

दीपावली के एक दिन बाद, प्रधानमंत्री मंदिर के गर्भगृह में बैठे और पुजारियों के साथ प्रार्थना की और भगवान शिव का रूद्राभिषेक किया। यहां करीब 20 मिनट तक पीएम मोदी ने पूजा अर्चना की।

केदारनाथ में पीएम का एक नया अंदाज देखा गया। उन्होंने सफेद कुर्ते के ऊपर नीले रंग की स्वेटर पहन रखी थी। इसके ऊपर ग्रे रंग की सदरी और गले में रुद्राक्ष की बड़ी माला इसके साथ कंधे पर डिजाइनर शॉल थी।

केदारनाथ आने पर प्रसिद्ध भगवान शिव मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। मंदिर को पीले फूलों से सजाया गया था।

केदारनाथ धाम में रूद्राभिषेक करने के बाद पीएम ने इसके पुनर्निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक चिकित्सा, ऑर्गेनिक फार्मिंग और जल संसाधन के विकास की असीमित संभावनाएं हैं जिसका दोहन कर राज्य का विकास किया जाएगा।

केदारनाथ धाम में 2013 में आयी प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए PM मोदी ने कहा कि गुजरात के सीएम रहते हुए वे मारे गए लोगों के परिवारों, घायलों की पीड़ा को समझते हुए यहां आने से खुद को रोक नहीं सके थे। वो केदारनाथ में पीड़ितों की मदद करने के लिए वे उत्तराखंड आना चाहते थे, लेकिन जब दिल्ली में इस बात की खबर पहुंची तो उन्हें यहां आने और लोगों की मदद करने से रोक दिया गया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि केदारनाथ के दोबारा पुनर्निर्माण करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि यहां की प्राकृतिक खूबसूरती से कोई छेड़छाड़ न हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और केदारनाथ की प्राकृतिक विविधतता को बनाये रखते हुए आधुनिकतम विकास किया जाएगा जिससे नैसर्गिक सुंदरता के साथ-साथ विकास भी आगे बढे।

उन्होंने कहा कि केदारनाथ में श्रद्धालुओं, पुजारियों, पुरोहितों और धार्मिक पर्यटन के यात्रियों, सबके लिए सुविधा का प्रबंध होगा। पुरोहितों को मिलने वाले मकान अब विशेष प्रकार के होंगे जिनमें खुद उनके रहने के अलावा उनके अतिथियों और यात्रियों को रुकने के लिए प्रबंध रहेगा।

पीएम ने कहा कि यह पुरानी कहावत रही है कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी, पहाड़ के काम नहीं आता, लेकिन वे उत्तराखण्ड में ऐसे विकास को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं जिससे यहां के जवानों को यहीं काम मिले, जिससे यहां के जवानों की ताकत पहाड़ों के लिए काम आये।